जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इतिहासकार और पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित रोमिला थापर को भेजे गए पत्र से कैंपस का माहौल गरमा गया है। रजिस्ट्रार प्रमोद कुमार की ओर से यह पत्र भेजा गया है। इसमें रोमिला को सीवी जमा करने को कहा है। कहा जा रहा है कि प्रशासन जेएनयू में थापर की सेवाओं को जारी रखने के लिए उनके कार्यों का मूल्यांकन करेगा। इस मामले पर जमकर बवाल हो रहा है। इस बीच लेखक जावेद अख्तर ने सरकार पर निशाना साधते हुए इस पर तंज कसा है।
रोमिला थापर सीवी विवाद: जावेद अख्तर ने कसा तंज, बोले- उनकी बीए की डिग्री है या नहीं...
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जावेद अख्तर ने ट्विटर पर लिखा- 'नाराज होने की जरूरत नहीं है। बेशक वे जानते हैं कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर की सम्मानित इतिहासकार हैं, जिनका सीवी दिल्ली की टेलीफोन डायरेक्टरी से थोड़ा-सा ही छोटा होगा।'
उन्होंने आगे लिखा- 'इसके जरिए वे सिर्फ इस बात को पुख्ता करना चाहते हैं कि उनकी बीए की डिग्री है या नहीं क्योंकि यह आजकल अक्सर खो जाती है।'
Please don’t get so upset . Ofcourse they know that she is an internationally recognised and respected Historian with a CV that is slightly shorter than the Delhi telephone directory . They just want to confirm if she has her B.A. degree because that often goes missing .
जावेद अख्तर ने ये ट्वीट कांग्रेस नेता शशि थरूर ने ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए लिखा जिसमें उन्होंने कहा था, 'जेएनयू ने रोमिला थापर को उनकी प्रोफ़ेसर एमरिटा स्थिति जारी रखने के लिए सीवी प्रस्तुत करने के लिए कहा, यह अपमान से भी बदतर है, यह शिक्षा के मूल्यों और सिद्धांतों और बौद्धिक योग्यता के लिए एक अपराध है। क्या JNU इससे भी नीचे गिर सकता है?'
JNU asking Romila Thapar to submit a cv to JNU to continue her Professor Emerita status is worse than an insult, it is a crime against the values & principles of education & respect for intellectual merit. Can JNU sink any lower? https://t.co/mb9widqiNu
बता दें कि मानव संसाधन विकास (एचआरडी) मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इतिहासकार रोमिला थापर समेत ‘प्रोफेसर एमेरिटस’ का दर्जा प्राप्त किसी भी व्यक्ति की सेवा समाप्त करने का कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।