हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के दिग्गज कॉमेडियन जॉनी वॉकर को भला कौन नहीं जानता। एक दौर था जब उनके बिना कोई भी कॉमेडी फिल्म अधूरी लगती थी। उन्होंने अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के दिल में खास जगह बनाई। बॉलीवुड में एक से बढ़कर एक कॉमेडियन आए लेकिन जॉनी वॉकर को लेकर जो क्रेज लोगों के बीच देखने को मिला वह सबसे अलग ही था। जॉनी वॉकर ने अपनी अदाकारी से न केवल लोगों को गुदगुदाया, बल्कि उनके चेहरे पर मुस्कान भी बिखेरी। लीजेंड्री कॉमेडियन जॉनी वॉकर भले ही आज हमारे बीच नहीं है लेकिन अपनी फिल्मों के जरिए वह हमेशा हमारे बीच रहेंगे। आज ही के उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कहा था। आज उनकी 97वीं बर्थ एनिवर्सरी है। ऐसे में आज हम बात करेंगे उनसे जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें। तो चलिए शुरू करते हैं...
Johnny Walker: बेवड़ा बन खूब हंसाया लेकिन कभी नहीं पी शराब, जानें बस कंडक्टर से कॉमेडी किंग कैसे बने जॉनी वॉकर
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गुरुदत्त ने दिया नया नाम
जॉनी वॉकर का असली नाम बदरुद्दीन जमालुद्दीन था। उनका जन्म 11 नवंबर 1920 को इंदौर में हुआ था। जब जॉनी वॉकर एक्टिंग की दुनिया में आए तो एक्टर गुरुदत्त ने उनका नाम बदल दिया था। गुरुदत्त ने उनका नाम एक प्रसिद्ध शराब के ब्रांड के नाम पर रखा। लेकिन खास बात ये है कि फिल्मों में बेशक जॉनी वॉकर शराबी का किरदार निभाते थे, लेकिन असल जिंदगी में उन्होंने कभी शराब को हाथ नहीं लगाया।
बस कंडक्टर का किया काम
जॉनी वॉकर जब मुंबई आए तो शुरुआत में उन्होंने अपना पेट पालने के लिए बस कंडक्टर का काम किया। इसके लिए उन्हें महीने के 26 रुपये सैलरी मिलती थी। लेकिन इस दौरान भी उन्होंने एक्टिंग करना नहीं छोड़ा। वह बस में सफर के दौरान अपनी एक्टिंग और कॉमेडी से लोगों का मनोरंजन किया करते थे।
गुरु दत्त ने जॉनी को बनाया स्टार
जॉनी अपने अंदाज में बस यात्रियों का मनोरंजन करते हुए अपना काम करते थे। इस दौरान एक बार बलराज साहनी की नजर उन पर पड़ी। इसके बाद बलराज साहनी ने निर्देशक गुरु दत्त को जॉनी वॉकर के बारे में बताया। उस समय गुरु दत्त अपनी फिल्म बाजी की तैयारी कर रहे हैं। बलराज साहनी ने जॉनी वॉकर को गुरु दत्त से मिलने की सलाह दी। इसके बाद गुरु दत्त के सामने उन्होंने शराबी की एक्टिंग की जो गुरु दत्त को काफी पसंद आई और उन्होंने जॉनी वॉकर को फिल्म बाजी में रोल दिया। इस फिल्म में अभिनेता देव आनंद और अभिनेत्री गीता बाली मुख्य भूमिका में थीं। यहां ये उनकी किस्मत का बंद दरवाजा खुला और इसके बाद जॉनी वॉकर ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
जॉनी वॉकर के नाम कई अवॉर्ड्स
जॉनी वॉकर ने अपने फिल्मी सफर में तकरीबन 300 फिल्में की, जिसमें ‘जाल’, ‘आंधियां’, ‘नया दौर’, ‘टैक्सी ड्राइवर’, ‘मुधमती,’ ‘कागज के फूल’, ‘गेटवे ऑफ इंडिया,’ ‘मिस्टर एक्स,’ ‘मेरे महबूब,’ ‘साईआईडी’ जैसी सुपरहिट फिल्में शामिल हैं। जॉनी वॉकर को उनकी शानदार अदाकारी के लिए पहला फिल्मफेयर अवॉर्ड 1959 में 'मधुमती' में सहायक अभिनेता के लिए मिला। इसके बाद फिल्म 'शिकार' के लिए उन्हें बेस्ट कॉमिक एक्टर के फिल्मफेयर मिला था। ताउम्र दर्शकों को हंसाने वाले जॉनी वॉकर ने 29 जुलाई, 2003 को दुनिया से अलविदा कह दिया था। लेकर आज भी जब हम उनकी फिल्में देखते हैं तो चेहरे पर मुस्कान आ जाती है और उनका हमारे बीच होने का एहसास होता है।