'कहो ना प्यार है' साल 2000 में रिलीज हुई। राकेश रोशन ने बेटे ऋतिक रोशन को इस फिल्म के जरिए लॉन्च किया। और अभिनेता का आगाज धमाकेदार अंदाज में हुआ। कहा जाता है कि जो दीवानगी कभी देवआनंद और राजेश खन्ना जैसे सितारों को लेकर रहा करती थी, कुछ वैसी ही दीवानगी लड़कियों के बीच ऋतिक रोशन को लेकर देखी गई। उन्हें शादी के प्रपोजल मिले। रिपोर्ट्स के मुताबिक खून से लिखे खत भी मिले। कोई उनके डांस का दीवाना हो गया तो कोई स्मार्टनेस का। मगर, उस दौर के वे बच्चे और किशोर जो अब बड़े हो चुके हैं। इस फिल्म को देखने के उनके क्या अनुभव और यादें हैं? जानते हैं
Kaho Naa Pyaar Hai: 'कहो ना प्यार है' के 25 साल पूरे, जानिए क्या कहते हैं ऋतिक रोशन की फिल्म के पहले दर्शक
25 Years Of Kaho Naa Pyaar Hai: ऋतिक रोशन की डेब्यू फिल्म 'कहो ना प्यार है' की रिलीज को आज ढाई दशक बीत गए। इस मौके पर उनकी फिल्म के पहले दर्शकों से बात की गई। यानी वे लोग जिन्होंने बचपन या किशोर उम्र में ये फिल्म देखी। आज फिल्म से जुड़ी उनकी क्या यादें हैं? जानते हैं
यादों में बस गया फिल्म का ये सीन
मूल रूप से कानपुर की रहने वाली और अब दिल्ली में नौकरी कर रहीं दीपाली पोरवाल बताती हैं, 'कहो ना प्यार है' की रिलीज के वक्त मैं 7 या 8 साल की थी तो जाहिर है कि फर्स्ट डे, फर्स्ट शो जैसा कोई क्रेज नहीं रहा होगा। हालांकि जब भी देखी थी, तभी यह उस समय की फेवरिट फिल्मों वाली लिस्ट में आ गई थी। काजोल-शाहरुख खान की एवरग्रीन जोड़ी के बीच ऋतिक रोशन और अमीषा पटेल की जोड़ी ताजी हवा के झोंके जैसी थी। कार में बैठकर लिपस्टिक लगाती अमीषा और बगल में साइकिल पर ऋतिक वाला सीन आज भी बहुत अच्छी तरह से याद है। कम उम्र में भी यह जोड़ी बहुत प्रॉमिसिंग लगी थी, इसके गाने जुबां पर चढ़ गए और मन एक ऐसी अदद प्रेम कहानी के ख्वाब बुनने लगा था। फिल्म में दोस्ती, प्यार, परिवार, खूबसूरत लोकेशन, एक्शन, रिश्तों की उलझनें.. सब कुछ था। ठीक से तो याद नहीं लेकिन अगले कई सालों तक जब भी यह फिल्म टीवी पर आई थी, मैंने इसे हमेशा देखा था.. और इसका लीड गाना तो आज इतने साल गुजर जाने के बाद भी बिल्कुल नया सा लगता है'।
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ऋतिक को देखकर तय किया करियर
दिल्ली की सुप्रिया श्रीवास्तव बताती हैं, 'जब ये फिल्म आई तो मैं 12 साल की थी और सातवीं क्लास में पढ़ती थी। फिल्म मुझे बहुत अच्छी लगी और ऋतिक रोशन की तो दीवानी हो गई थी। फिर यहीं से मेरे जर्नलिस्ट बनने के सपने की शुरुआत भी हुई। उस दौर में सोशल मीडिया नहीं होता ता। न्यूज पेपर, मैगजीन और न्यूज चैनल हर जगह ऋतिक रोशन के इंटरव्यू आते थे। मुझे हमेशा से लगता था कि मुझे ऋतिक से मिलना है। मैं भीड़ का हिस्सा नहीं बनना चाहती थी। जब ऋतिक के इंटरव्यू देखे तो लगा कि ये लोग डायरेक्ट उनसे बात कर रहे हैं, यही रास्ता ठीक है। फिर न्यूज पेपर में उनके बारे में पढ़ने लगे। फिर मास कॉम का कोर्स किया और जर्नलिज्म में आ गए। हालांकि, बड़े होते-होते बचपन का सपना तो कहीं खो गया, लेकिन यादें आज भी ताजा हैं।
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रोहित की मौत पर फूट-फूटकर आया रोना
उत्तर प्रदेश के खुर्जा की रहने वाली कुलदीपिका शर्मा बताती हैं कि इस फिल्म की रिलीज के वक्त उनकी उम्र सात साल थी। वह बताती हैं कि यह फिल्म उन्होंने घर पर वीसीआर (वीडियो कैसेट रिकॉर्डर) पर देखी थी। फिल्म में जब रोहित (ऋतिक रोशन) की मौत हुई तो वे भी रोने लगी थीं। अमीषा पटेल को रोता देख रोना आ गया था। वहीं, मूल रूप से शिमला की रहने वाली स्मृति शर्मा बताती हैं कि यह उनकी पहली फिल्म है, जो उन्होंने सिनेमाघर में अपने माता-पिता के साथ देखी। स्मृति कहती हैं, 'मैंने चंडीगढ़ में बत्रा थिएटर में अपने मम्मी पापा के साथ यह फिल्म देखी थी। यह थिएटर में मेरी पहली पिक्चर थी'।
रोहित की मौत के बाद उसके छोटे भाई की होने लगी चिंता
उत्तर प्रदेश की ताजनगरी आगरा की रहने वाली शालिनी गौर ने भी अपना अनुभव साझा किया है। उन्होंने बताया, 'मैंने हॉल में तो नहीं देखी थी ये फिल्म, बल्कि रिलीज के चार-पांच साल बाद टेलीविजन पर ही देखी। इस फिल्म में जब रोहित ( ऋतिक रोशन) की मौते के बाद उसका भाई अमित सदमे में चला जाता है, वो सीन देखकर बहुत रोना आया था। कई दिनों तक ऐसा लगा जैसे सच में मेरे सामने ऐसा हुआ है और मुझे अमित की चिंता होने लगी। घर वालों ने समाझाया कि ये फिल्म है'।
