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किराने की दुकान पर काम करते थे ये म्यूजिक कंपोजर, फिर ऐसे बने संगीत के सरताज
Fri, 24 Aug 2018 07:47 AM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Updated Fri, 24 Aug 2018 07:47 AM IST
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कल्याणजी
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हिंदी सिनेमा के गानों का जब भी जिक्र होगा संगीतकार कल्याणजी-आनंदजी का नाम जरूर आएगा। दोनों ने एक से बढ़कर एक फिल्मों के गानों का संगीत दिया। जिसमें मुख्य 'डॉन', 'सफर', 'कोरा कागज' जैसी फिल्में रही हैं। इस जोड़ी में से कल्याणजी की पुण्यतिथि पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ा एक किस्सा...
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कल्याणजी आनंदजी
कल्याणजी का पूरा नाम कल्याणजी वीरजी शाह था। उनका परिवार गुजरात के कच्छ का रहने वाला था। कल्याणजी के पिता का नाम वीरजी था। वीरजी शाह का परिवार कच्छ से मुंबई पहुंचा और यहां किराने की दुकान खोल ली। उनके दुकान से एक ग्राहक सामान तो लेता लेकिन पैसे नहीं चुका पा रहा था।
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कल्याणजी आनंदजी
वीरजी ने एक दिन उससे उधारी चुकाने के लिए कहा तो उस शख्स ने उनके दोनों बेटों कल्याणजी और आनंदजी को संगीत सिखाने की जिम्मेदारी ली। इस तरह उधारी के पैसे को चुकाने के लिए कल्याणजी को संगीत की शिक्षा मिली। इसके बाद दोनों की रुचि संगीत की ओर बढ़ने लगी और दोनों भाई संगीत की दुनिया से जुड़ गए।
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कल्याणजी
कल्याणजी ने अपने भाई आनंदजी के साथ मिलकर 'कल्याणजी वीरजी एंड पार्टी' के नाम से एक आर्केस्ट्रा कंपनी बनाई थी। जो अलग-अलग शहरों में जाकर परफॉर्मेंस दिया करती थी। इसी दौरान वो फिल्म संगीतकारों के संपर्क में आए और दोनों भाई हिंदी सिनेमा की दुनिया में पहुंचे।
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कल्याणजी आनंदजी
उस वक्त एस.डी. बर्मन, हेमंत कुमार, मदन मोहन, नौशाद जैसे संगीतकार हुआ करते थे, ऐसे में कल्याणजी-आनंदजी के लिए अपना मुकाम बना पाना वाकई काफी मुश्किल था। शुरुआत में कल्याणजी ने कल्याणजी वीरजी शाह के नाम से फिल्मों में संगीत देना शुरू किया। उनकी पहली फिल्म 1959 में सम्राट चंद्रगुप्त थी। बाद में उनके साथ आनंदजी जुड़ गए और यही से ये जोड़ी कल्याणजी-आनंदजी के नाम से मशहूर हो गई।
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