कंगना रणौत का महाराष्ट्र सरकार और बॉलीवुड के बीच इन दिनों काफी पंगा चल रहा है। सुशांत सिंह राजपूत की मौत के बाद ट्विटर पर शुरू हुई लड़ाई में नौबत यहां तक आ गई कि बीएमसी उनके घर को तोड़ने पहुंच गई और बॉलीवुड की तरफ से भी लगातार कंगना पर हमले किए जा रहे हैं। कंगना सरकार का सामना करने हिमाचल प्रदेश से सीधे मुंबई पहुंच गईं। लेकिन लोकसभा के मानसून सत्र में भी इशारों- इशारों में कंगना पर हमला हो ही गया। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं है जब कंगना अकेले ही फिल्म इंडस्ट्री या सरकार से भिड़ गईं। इससे पहले भी कई बार कंगना ने ना सिर्फ बॉलीवुड की दूसरी हस्तियों से पंगा लिया है बल्कि दूसरे समाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी खुल कर अपनी राय रखी है।
Kangana Ranaut: बॉलीवुड की 'मणिकर्णिका' से विवादों की 'क्वीन' तक, कंगना रणौत ने इतनी बार लिया फिल्म इंडस्ट्री से 'पंगा'
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पिछले एक साल से चाहे वो निर्भया मामला हो या फिर दीपिका पादुकोण का फिल्म प्रमोशन के बहाने जेएनयू जाने का मामला रहा हो या फिर कश्मीर में 370 हटाने का मामला, कंगना हर मामले पर अपनी राय रखती आई हैं। कुछ लोग इसे कंगना के राजनीति में जाने के संकेत के तौर पर देख रहे हैं। ये तो हुई कंगना के वर्तमान की बात। लेकिन फिल्मों में कंगना का अतीत कैसा रहा है? इस पर जुलाई 2016 में फिल्म पत्रकार संजय मिश्रा ने उनके फिल्मी सफर पर एक लेख लिखा था। पढ़िये, कंगना के फिल्मी सफर की पूरी कहानी।
वो 2007 की दोपहर थी और मुंबई के जूहू इलाके में स्थित एक नामी होटल में हमेशा की तरह हमें फिल्म स्टार कास्ट से मिलने के लिए बुलाया गया था। यह फिल्म थी 'लाईफ इन ए मेट्रो' जिसमें उस समय शिल्पा शेट्टी, शाइनी आहूजा, कोंकणा सेन, इरफान खान, धर्मेंद्र जैसे कलाकार थे और इनके इंटरव्यू के लिए मीडियाकर्मी कतार लगाए इंतजार कर रहे थे। यहां-वहां रिपोर्टरों के झुंड मौजूद थे और हर कोई अपनी बारी का इंतजार कर रहा था कि इतने में खबर उड़ी की आज शिल्पा शेट्टी तो नहीं आ रही हैं और कोंकणा को बाहर निकलना है। मैं बेचैन हो गया! अरे, कोंकणा भी चली जाएंगी तो इंटरव्यू किसका लेंगे? सुबह से यहां बैठे हैं? इतने में पीआर ने मुझसे कहा, "संजय तब तक कंगना का इंटरव्यू कर लो वो भी फिल्म में को-स्टार है।"
उस रोज कई लोग कंगना के इंटरव्यू के लिए मना कर चुके थे क्योंकि उन्हें डर था कि कहीं इस बीच कोंकणा निकल गई तो लेने के देने पड़ जाएंगे ऐसे में हर कोई कोशिश कर रहा था कि पीआर को कोई बहाना लगा दे। लेकिन मैंने हां कर दी और उस भीड़ में एक कोने में बैठी खूबसूरत, पतली, लंबे घुंघराले बालों वाली लड़की से मेरी पहली मुलाकात हुई जिसका नाम था कंगना रणौत। यह हमारी पहली मुलाकात थी, मैं चार साल से मीडिया में था और वो अभी सिर्फ दो फिल्में पुरानी थी इसलिए मेरा पलड़ा थोड़ा भारी था। कंगना पहली मुलाकात में मुझे थोड़ी कम बोलने वाली, प्राइवेट और ज्यादा सवाल पूछने पर परेशान होने वाली एक सामान्य अदाकारा लगी जो बोलने में हड़बड़ाने और तुतलाने लगती। मुझे लगा वो बस एक दो फिल्मों के बाद यह गायब होने वाली हैं लेकिन कंगना रनौत के पास आज की तारीख में तीन राष्ट्रीय पुरस्कार हैं और हिट फिल्मों की कतार।
ये तो विकीपीडिया पर भी लिखा है कि कंगना हिमाचल प्रदेश के एक छोटे से गांव से हैं जहां उनके परदादा एक विधायक थे, दादा आईएएस अफसर थे और पिता कारोबारी और मां टीचर थीं। मेडिकल की पढ़ाई छोड़कर वो पहले दिल्ली में मॉडल बनी और फिर थिएटर करते-करते मुंबई आ गईं और एक एक्टिंग कोर्स में दाखिल हो गई। मेडिकल की पढ़ाई छूटने पर घर वालों से बातचीत बंद हो गई लेकिन 2007 में जब उनकी तीसरी फिल्म लाईफ इन ए मेट्रो रिलीज हुई तो घरवालों से उनकी फिर से सुलह हो गई और आज कंगना की मैनेजर उनकी सगी बहन रंगोली हैं। मेट्रो फिल्म मिलने से पहले कंगना का बहुत मुश्किल से गुजारा चल रहा था। और ये भी नहीं कि कैसे हिमाचल के किसी कस्बे की लड़की अपना सफर खुद तय कर बॉलीवुड हीरोइनों की एक नई इमेज गढ़ सकती है। साल 2007 में लाइफ इन ए मेट्रो में कंगना के साथ काम करने वाले इरफान खान ने भी कहा था, "कंगना अब हीरो हो गई हैं, उनके साथ काम करने के लिए अब मुझे हीरोईन बनना होगा।" बॉलीवुड में अभिनेता आदित्य पांचोली के साथ उनके अफेयर की खबरें थी और साथ ही आए दिन आदित्य के कंगना को पीटे जाने के चर्चे आम हो रहे थे, इसी बीच उनकी बहन रंगोली पर एक सिरफिरे आशिक ने एसिड फेंका और इन सारी बातों के एक के बाद एक होने से किसी का भी विचलित होना स्वाभाविक था। कंगना का भी।

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