मणिकर्णिका – ट्रेलर
'ठग्स ऑफ हिंदोस्तान' जैसा नकली है 'मणिकर्णिका' का ट्रेलर, ये हैं 5 बड़ी कमियां
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
फिल्म 'मणिकर्णिका' के टीजर और ट्रेलर के बीच गंगा में बहुत सा पानी बह चुका है। कंगना रनौत फिल्म निर्देशक बन गई हैं। जिस टीजर को देखने के बाद कंगना ने निर्देशक बनने का फैसला किया और करीब 40 दिन फिल्म की शूटिंग फिर से कर डाली, वह ट्रेलर पर भारी पड़ता दिख रहा है।
Experience and relive the proudest chapter in our history⚔
Presenting the epitome of a warrior, a mother and a Queen,#ManikarnikaTrailer out now: https://t.co/qVWXlIXZRf#KanganaRanaut @anky1912 @Jisshusengupta @DirKrish @shariqpatel @KamalJain_TheKJ @ZeeStudios_ #JhansiKiRani
मणिकर्णिका के ट्रेलर पर इस बात पर जोर है कि इसे 'बाहुबली' और 'भाग मिल्खा भाग' की राइटर टीम ने लिखा है। के विजयेंद्र प्रसाद की कथा-पटकथा और प्रसून जोशी के संवाद अपनी जगह चुस्त दुरुस्त हैं लेकिन ट्रेलर अपना असर नहीं छोड़ पाता। वजह है, फिल्म में हर फ्रेम को 100 फीसदी संपूर्ण दिखाने की कोशिश करना। यही गलती विजय कृष्ण आचार्य अपनी पिछली फिल्म 'ठग्स ऑफ हिंदोस्तान' में कर चुके हैं और फिल्म ट्रेलर आने के साथ ही हकीकत से दूर लगने लगी थी।
अच्छे सिनेमा की पहली शर्त यही है कि दर्शक का परदे पर दिख रहे किरदारों से जुड़ाव होना चाहिए। सजे-धजे कुलभूषण खरबंदा हों या सुरेश ओबेरॉय या फिर डैनी, सभी किरदार बनावटी दिखते हैं। 'मणिकर्णिका' बनीं कंगना रनौत ने खुद को लार्जर दैन लाइफ दिखाने के लिए लो एंगल इस्तेमाल किया।
'मणिकर्णिका' फिल्म के ट्रेलर में स्लो मोशन इस्तेमाल किया और हर संवाद को ऐसे बोला है कि सुनील शेट्टी याद आने लगते हैं। सिनेमा अगर नकली दिखता है तो दर्शकों की नजर में हार जाता है। सिनेमा को असली दिखना चाहिए। जीवन जैसा। 'मणिकर्णिका' फिल्म 25 जनवरी 2019 को रिलीज होगी।