देश में चल रहे आम चुनाव के चलते भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इस साल अभी तक राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा भले न की हो, लेकिन चुनाव कार्यक्रमों को बीच में ही छोड़ इसके दो बड़े अफसर फ्रांस के कान्स शहर में होने वाले सालाना फिल्म फेस्टिवल में शरीक होने की तैयारियां कर चुके हैं।
कंगना रनौत की फिल्म का कान फिल्म फेस्टिवल में सरकारी खर्चे पर होगा प्रदर्शन
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अमर उजाला को सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कान जा रहे इस दस्ते में इस बार के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की जूरी में शामिल निर्माता निर्देशक राहुल रवैल, फिल्म इंदु सरकार बनाने वाले मधुर भंडारकर भी शामिल हैं। ये अफसर अपने साथ कंगना रनौत की फिल्म मेंटल है क्या भी लेकर जा रहे हैं, जिसे वहां भारत सरकार की तरफ से प्रदर्शित किया जाएगा।
पिछले महीने एक आधिकारिक विज्ञप्ति जारी कर सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने कहा था कि 17वीं लोकसभा और चार राज्यों के विधानसभा चुनाव जारी हैं। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में फिल्मों के लिए दोस्तान व्यवहार करने वाला एक राज्य भी चुना जाता है। चूंकि चुनावों के चलते आचार संहिता लागू इसलिए ये पुरस्कार आचार संहिता लागू रहने तक घोषित नहीं किए जाएंगे। हर साल राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का वितरण राष्ट्रपति 3 मई को करते रहे हैं। फिल्म जगत में सरकार के इस निर्णय की तीखी आलोचना हुई थी। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार तय करने वाली जूरी के अध्यक्ष रह चुके शेखर कपूर ने भी इसे सही नहीं माना था।
राष्ट्रीय पुरस्कारों को चुनाव के नाम पर टाल देने वाले सूचना और प्रसारण मंत्रालय के अफसर अब 14 मई से 25 मई तक होने वाले कान्स फिल्म समारोह जाने की तैयारी कर चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक कान जा रहे सरकारी दस्ते में सेंसर बोर्ड के प्रमुख प्रसून जोशी, फिल्म निर्देशक मधुर भंडारकर, शाजी करून और राहुल रवैल के अलावा पिछले साल सर्वश्रेष्ठ फिल्म का राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली निर्माता-निर्देशक रीमा दास के अलावा सूचना और प्रसारण मंत्रालय सचिव अमित खरे व संयुक्त सचिव अशोक कुमार परमार शामिल हैं।
'मेंटल है क्या' का सरकारी प्रदर्शन
ये भी पता चला है कि ये सरकारी दस्ता अपने साथ अभिनेत्री कंगना रनौत की फिल्म मेंटल है क्या भी लेकर जा रहे हैं और इसका प्रदर्शन कान फिल्म समारोह में लगने वाले भारतीय पैवेलियन में दुनिया भर से आने वाले फिल्म निर्माताओं व निर्देशकों के लिए वहां करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस बारे में सूचना और प्रसारण मंत्रालय से उनका पक्ष लेने की कोशिश भी की गई लेकिन वहां से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिला।