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पद्म भूषण पुरस्कार लेने से मना करते वक्त सितारा देवी ने कहा था, 'भारत रत्न से कम कुछ नहीं लूंगी'
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: भावना शर्मा
Updated Fri, 08 Nov 2019 12:30 PM IST
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sitara devi
- फोटो : social media
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मशहूर कथक डांसर सितारा देवी को कौन नहीं जानता होगा । आज इस नृत्यांगना का 99वां जन्मदिन है। सितारा देवी की कामयाबी के पीछे एक लंबा संघर्ष रहा । आज के दिन हम आपको उनसे जुड़े कुछ अनसुने किस्सों से रूबरू कराते हैं। सितारा देवी का जन्म 8 नवंबर 1920 को कोलकाता में हुआ था। 16 साल की उम्र में ही सितारा देवी को 'नृत्य सम्रागिनी' का खिताब मिल गया था ।
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सितारा देवी
ये खिताब उन्हें रविंद्रनाथ टैगोर ने दिया था । सितारा देवी के पिता सुखदेव महाराज भी एक कथक डांसर थे । साथ ही उन्हें संस्कृत भाषा का विद्वान भी कहा जाता था। सुखदेव महाराज ने ही अपनी बेटी को नृत्य सिखाया । इस वजह से समाज में उनकी काफी आलोचना भी हुई थी । इसके बावजूद सुखदेव महाराज और उनकी बेटी सितारा देवी ने हार नहीं मानी।
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सितारा देवी
सितारा को लोग प्रॉस्टिट्यूट कहकर भी बुलाने लगे थे। तब पिता सुखदेव ने कहा था, 'जब राधा कृष्ण के लिए डांस कर सकती है तो मेरी बेटी क्यों नहीं।' बहिष्कार के बाद महाराज जी ने अपना घर बदल दिया था। फिर उन्होंने एक डांसिंग स्कूल शुरू किया जहां वेश्याओं के बच्चों को दाखिला दिया। कम उम्र से ही नृत्य की शिक्षा लेने वाली सितारा देवी 10 साल की उम्र में ही सोलो परफॉर्मेंस देने लगी थीं ।
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सितारा देवी
मुंबई आने के बाद सितारा देवी ने आतिया बेगम पैलेस में कथक की प्रस्तुति दी थी । इस कार्यक्रम में रविंद्रनाथ टैगोर, सरोजनी नायडू और पारसी परोपकारी सर कोवाजसी जहांगीर शामिल थे । सितारा देवी ने कुछ फिल्मों में भी काम किया। उनकी डेब्यू फिल्म 'औरत का दिल' थी । इसके अलावा उन्होंने 'नगीना', 'रोटी', वतन और अंजली जैसी फिल्मों में भी परफॉर्म किया ।
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सितारा देवी
कला और नृत्य में विशेष योगदान देने के लिए सितारा देवी को 1970 में पद्मश्री और 1994 में कालीदास सम्मान मिला था । इसके अलावा 1969 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है । साल 2002 में उन्हें पद्मभूषण सम्मान दिया जाने वाला था लेकिन उन्होंने ये पुरस्कार लेने से इनकार कर दिया था।
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