सीरियल 'खिचड़ी' छोटे पर्दे का काफी लोकप्रिय शो रहा हैं। इसी शो से प्रेरित होकर शो के मेकर्स ने साल 2010 में फिल्म 'खिचड़ी' का निर्माण किया था, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया था। इसके 13 साल बाद अब 'खिचड़ी 2' आ रही हैं। बुधवार को मुंबई में इस फिल्म के ट्रेलर लांच के दौरान फिल्म के निर्माता और अभिनेता जमनादास मजेठिया ने कहा कि इस फिल्म को देखने के बाद अगर दर्शक पचास बार नहीं हंसे, तो बाबूजी की मूंछें मुड़वा दूंगा।
Khichdi 2 Trailer: बाबूजी की मूंछें मुड़वा दूंगा अगर दर्शक 50 बार नहीं हंसे, जानिए किसने किया ये दावा
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फिल्म 'खिचड़ी 2' में अभिनेता अनंग देसाई बाबू जी के की किरदार में नजर आएंगे। ट्रेलर लांच के दौरान जमनादास मजेठिया ने कहा, 'यह फिल्म पूरी तरह से कॉमेडी फिल्म है। जिस तरह से दर्शकों ने टेलीविजन पर 'खिचड़ी' को पसंद किया। उनकी पसंद को ध्यान में रखते हुए हमने पहली बार फिल्म 'खिचड़ी' का निर्माण किया। इस फिल्म को भी दर्शकों का भरपूर प्यार मिला। दर्शकों का प्यार देखकर हमारी जिम्मेदारी 'खिचड़ी 2' को और भी बेहतर बनाने की थी। हमारा मकसद सिर्फ दर्शकों की चेहरे पर खुशी लाना है। मैं वादा करता हूं कि इस फिल्म से दर्शकों को भरपूर मनोरंजन मिलेगा। अगर इस फिल्म को देखकर दर्शक पूरी फिल्म में पचास बार नहीं हंसे तो बाबू जी की मूंछें मुड़वा दूंगा।'
जमनादास मजेठिया ने भले ही यह बात मजाक में कहीं हो, लेकिन उनके चेहरे पर जबरदस्त आत्मविश्वास दिख रहा था। ट्रेलर लांच के दौरान जब जमनादास मजेठिया से पूछा गया कि 'खिचड़ी 2' को बनाने में 13 साल का वक्त क्यों लग गया। जमनादास मजेठिया ने कहा, 'हम चाह रहे थे 'खिचड़ी' के बाद जो भी फिल्म बनाए वह उससे बेहतर हो। इसके लिए फिल्म की स्क्रिप्ट बहुत प्रभावशाली होना जरूरी था। हमने तीन बार स्क्रिप्ट पर काम किया, लेकिन स्क्रिप्ट पसंद नहीं आ रही थी। जब हमें एक अच्छी कहानी मिल गई तब हमने 'खिचड़ी 2' की शूटिंग शुरू की। इसे बनाने में 13 साल का समय इसलिए लगा क्योंकि हम इसे 'खिचड़ी' से बड़ी फिल्म बनाना चाह रहे थे।'
फिल्म के निर्माता और एक्टर जमनादास मजेठिया ने कहा, 'हम अपनी फिल्मों के माध्यम से दर्शकों के चेहरे पर खुशी लाना चाहते है। कोविड के बाद से हम हंसाना भूल गए है। दिवाली पर दर्शकों के लिए यह एक तोहफा है। अपने परिवार के साथ इस फिल्म का पूरा आनंद ले सकते हैं। मुझे बड़ी हैरानी होती हैं। जब यू ए सेंसर सर्टिफिकेट मिलने वाली हिंसात्मक फिल्मों को देखने लोग अपने बच्चों के साथ थिएटर में जाते हैं। ऐसी फिल्मों को देखकर उन बच्चों के मन में किस तरह के ख्याल आते होंगे, यह सोचने वाली बात है। मैं ऐसी फिल्मों का विरोध नहीं करता,लेकिन बच्चों के लिए तो ऐसी फिल्में बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।'
आतिश कपाड़िया के निर्देशन में बनी यह फिल्म 17 नवम्बर को थियेटर में रिलीज हो रही है। फिल्म में सुप्रिया पाठक, जमनादास मजेठिया, राजीव मेहता, वंदना पाठक, अनंग देसाई, कीर्ति कुल्हारी, परेश गणात्रा, अनंत विधात, फराह खान और प्रतीक गांधी जैसे कलाकारों की मुख्य भूमिकाएं हैं।
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