बॉलीवुड अभिनेता इरफान खान का 54 साल की उम्र में निधन हो गया है। इरफान खान ने मुंबई के कोकिलाबेन अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन से पूरा बॉलीवुड शोक में डूब गया है। इऱफान खान की गिनती ऐसे अभिनेताओं में होती है जिन्होंने हर किरदार को निभाया है। इरफान की मेहनत और लगन का ही नतीजा है कि उनका परचम देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी लहराया। इरफान खान ने अपने करियर के शुरुआती दौर में बहुत संघर्ष किया है। इतना नाम और शोहरत इरफान को आसानी से नहीं मिला है।
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Irrfan Khan
- फोटो : instagram
इरफान खान का बॉलीवुड में कभी कोई गॉड फादर नहीं था। और ना ही उन्हें किसी और का कोई सपोर्ट था। इरफान ने अपने शुरुआती करियर में टेलीविजन धारावाहिकों से पहचान बनाई थी। लेकिन एनएसडी (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा) से पढ़ाई करने के बाद इरफान के सपने धारावाहिकों तक ही सीमित नहीं थे। उन्हें विश्व में ख्याति प्राप्त करना थी। जिसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और अपना मुकाम हासिल किया।
अपने शुरुआती करियर में इरफान नेशनल टेलीविजन के शो 'चाणक्य', 'भारत एक खोज', 'सारा जहां हमारा', 'बनेगी अपनी बात' और 'चंद्रकांता' जैसे धारावाहिकों से शुरुआत की। लेकिन इससे इरफान को खासी पहचान नहीं मिली। इसके बाद उन्होंनें फिल्मों की दुनिया में कदम रखा। लेकिन शुरुआती दौर उनके लिए कुछ खास नहीं रहा। इरफान ने 1988 में फिल्म 'सलाम बॉम्बे' से बड़े पर्दे पर कदम रखा लेकिन इस फिल्म में उन्हें किसी ने खास नोटिस नहीं किया।
इसके बाद 90 के दशक में भी इरफान ने कई फिल्मों में काम किया। इरफान को नोटिस किया गया लंदन के रहने वाले एक निर्देशक आसिफ कपाड़िया की फिल्म 'द वॉरियर' में। इस फिल्म के बाद इरफान पर ध्यान दिया जाने लगा। लेकिन इरफान को असली पहचान साल 2003 में आई फिल्म 'मकबूल' से मिली। इस फिल्म में इरफान के साथ अभिनेत्री तब्बू थीं। इसके बाद लगातार 'रोग', 'लाइफ इन अ मेट्रो', 'स्लमडॉग मिलेनियर', 'पान सिंह तोमर', 'द लंचबाक्स' जैसी फिल्मों में इरफान को सराहना मिली।
इरफान खान का कहना था कि उनके करियर में उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती उनका चेहरा था। अपने एक पुराने इंटरव्यू में इरफान ने खुद इस बारे में कहा था। इरफान ने बताया था कि शुरुआती दौर में उनका चेहरा लोगों को विलेन की तरह लगता था। वो जहां भी काम मांगने जाते थे, निर्माता और निर्देशक उन्हें खलनायक का ही किरदार देते। जिसके चलते उन्हें करियर के शुरुआती दौर में सिर्फ निगेटिव रोल ही मिले। लेकिन उनकी मेहनत और दमदार एक्टिंग ने इस चुनौती का सामना किया। इसके लिए उन्होंने छोटी बजट की फिल्मों में हाथ आजमाया जहां उन्हें हीरो के रूप में पहचान बनाने का मौका मिला।
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