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सुनिए छत्तीसगढ़ से मुंबई पहुंचे संजू बाबा के ‘बेटे’ के संघर्ष की कहानी, उन्हीं की जुबानी
मुंबई डेस्क, अमर उजाला
Published by: anand anand
Updated Mon, 16 Sep 2019 01:13 PM IST
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Satyajeet Dubey
- फोटो : social media
बिलासपुर, छत्तीसगढ़ से मुंबई एक्टर बनने आए सत्यजीत दुबे का करियर संघर्ष के रास्ते लगातार चलता रहा लेकिन सत्यजीत ने कभी हार नहीं मानी। शाहरुख खान की कंपनी की फिल्म से डेब्यू करने के बावजूद उन्हें फिल्म प्रस्थानम से चर्चा में आने में आठ साल लगे हैं। पढ़िए सत्यजीत की कहानी, उन्हीं की जुबानी।
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Prasthanam
- फोटो : social media
मैं बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में पैदा हुआ। 12 साल का था तो मेरे पिता का देहांत हो गया। दादी ने पाल-पोसकर बड़ा किया और हमेशा हिम्मत भी बधाई। मैं स्कूल के दिनों से ही नाटक, वाद-विवाद, डांस और कोरियोग्राफी में अच्छा रहा हूं। लोगों ने खूब सराहा भी। यहां तक कि नौवीं कक्षा में फेल हो गया तो नंबर बढ़ाकर मुझे पास कर दिया गया। मैं मुंबई आया तो दादी अपनी पेंशन से मुझे चार हजार रुपये खर्चा चलाने के लिए देती थी। मुंबई में इतने पैसे से गुजारा होता नहीं है। मैंने कॉल सेंटर में नौकरी की, कॉफी हाउस में काम किया, फिर फैशन शोज और तमाम दूसरे काम करते मैंने मुंबई में अपना संघर्ष शुरू किया। 127 ऑडिशन्स देने के बाद मैंने पहला ब्रेक पाया जोकि एक विज्ञापन फिल्म के लिए था। कुछ टीवी शोज किए। शाहरुख खान के प्रोडक्शन हाउस की फिल्म ऑलवेज कभी कभी से बड़े परदे पर डेब्यू किया लेकिन फिल्म चली नहीं।
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Satyajeet Dubey
- फोटो : social media
सत्यजीत दुबे आगे कहते हैं, जब काम के लाले पड़ गए और जेब में फूटी कौड़ी भी नहीं थी तब भी मैं दिल नहीं हारा था। मुझे नवाजुद्दीन सिद्दीकी, पंकज त्रिपाठी और इरफान खान जैसे कलाकारों को देखकर काफी प्रोत्साहन मिलता था। अली फजल से मेरा नाता फिल्म प्रस्थानम से भी पुराना है। उसके साथ मैंने अपनी पहली फिल्म की थी। उसने मुझे कभी भाई की कमी महसूस नहीं होने दी। फिल्म में भी वह मेरे बड़े भाई के किरदार में है।पहले मैं और अली साथ में रहा करते थे फिर मैं अंधेरी शिफ्ट हो गया और अली बान्द्रा। उसका घर संजू बाबा (संजय दत्त) के घर के कुछ ही दूरी पर है। वह मुझसे बोला करता कि मेरी खिड़की से संजू बाबा का घर दिखता है। मैं कई बार तो इसी लालच में उसके घर चला जाया करता था। हम दोनों संजू बाबा के बहुत बड़े फैन हैं। दो साल पहले मुझे जब प्रस्थानम में रोल मिला तो मैंने उसे फोन किया और कहा कि काश तू भी होता और ठीक दो महीने बाद अली ने मुझे फोन करके बताया कि वह फिल्म में मेरे बड़े भाई को किरदार अदा कर रहा है।
प्रस्थानम
- फोटो : सोशल मीडिया
प्रस्थानम मिलने का किस्सा भी बड़ा रोचक है। दो साल पहले मान्यता मैडम ने किसी हवाई यात्रा के दौरान मेरी फिल्म कैरी ऑन कुत्तों देखी और मेरी तलाश करवाई। प्रस्थानम की कहानी सुनते समय मैं बहुत भावुक हो गया था। जब मैंने इस किरदार को समझना शुरू किया तो मुझे बहुत कुछ और भी मिला।
