राज कपूर के परिवार का पेशावर से रिश्ता अब तक कायम है और इसकी एक बड़ी वजह कपूर परिवार की ऐतिहासिक हवेली है, जो अंदरूनी पेशावर शहर में स्थित है। यह हवेली अब बहुत ही जर्जर हालत में है और इस हवेली के मौजूदा मालिक इस हवेली को गिरा कर यहां एक प्लाजा बनाना चाहते हैं। लेकिन पाकिस्तान का पुरातत्व विभाग इसे गिराने की तीन कोशिशों को नाकाम बना चुका है। पेशावर के ऐतिहासिक बाजार किस्सा ख्वानी में ढकी मोनव्वर शाह स्थान पर एक बड़ी हवेली अब तक ऐतिहासिक विरासत की एक निशानी है। वैसे तो इस हवेली की अपनी एक अहमियत है लेकिन कपूर परिवार की वजह से इस हवेली की अहमियत और भी बढ़ जाती है।
98 साल पुरानी है कपूर खानदान की पाकिस्तान में मौजूद ये हवेली, अब दिखती है ऐसी
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राज कपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर, अपने आप को पहला हिंदू पठान कहते थे। वो बॉलीवुड में कलाकारों के पहले परिवार के जनक थे जिसकी अब चार पीढ़ियां हो गई हैं। वो अक्सर भारत में पेशावर की हिंदको भाषा भी बड़े गर्व से बोला करते थे। पुरातत्व विभाग, खैबर पख्तूनख्वाह के डायरेक्टर अब्दुस्समद खान ने बीबीसी को बताया कि सरकार ने ही अब तक इस हवेली को बचा रखा है वरना तो लोग इसे कब का गिरा चुके होते। उन्होंने बताया कि इमारत को इसके मौजूदा मालिकों ने गिराने के लिए तीन कोशिशें की हैं लेकिन पुरातत्व विभाग ने समय पर पहुंचकर इस इमारत को गिराने से बचाया है और मालिकों को मजबूर किया है कि वो ये इमारत नहीं गिराएगें। उन्होंने बताया कि ये इमारत इतनी जर्जर नहीं थी लेकिन इसे अंदर से गिराने की कोशिशों की वजह से इस इमारत को नुकसान पहुंचा है।
सरकार ने इस इमारत में म्यूजियम बनाने का एलान भी किया था। ऐसी सूचना है कि विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने बॉलीवुड कलाकार और राज कपूर के बेटे ऋषि कपूर से पहले भी एक मुलाकात में कहा था कि इस हवेली में म्यूजियम बनाया जाएगा। अब्दुस्समद खान ने बताया कि सरकार ने एलान जरूर किया है लेकिन इस समय प्राथमिकता है उन स्थानों को सुरक्षित बनाना जो चार-पांच हजार साल पुराने हैं। पुरातत्व विभाग के निदेश के अनुसार कपूर हवेली की तरफ भी तवज्जोह जरूर है और पेशवर की खूबसूरती के लिए नगर पालिका की योजना के तहत शहर में म्यूजियम बनाए जाएंगे लेकिन अभी तक इसके लिए कोई फंड आवंटित नहीं किए गए हैं। उन्होंने इस बात की पुष्टि कर दी कि इस हवेली को म्यूजियम बनाये जाने की योजना जरूर विचाराधीन है।
इस समय इस हवेली के मालिक एक स्थानीय सुनार हाजी इसरार खान हैं। उनसे संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन संपर्क नहीं हो सका। उनके भाई से टेलीफोन पर बात हुई तो उनसे इस हवेली के बारे में पूछा ही था कि उनका कहना था कि यह अब कपूर हवेली नहीं बल्कि खुश हाल हवेली है। उनसे उनके भाई के बारे में पूछा तो उन्होंने और बात नहीं की। मीडिया में उपलब्ध सूचना के अनुसार यह हवेली 1968 में चारसद्दा के रहने वाले एक व्यक्ति ने खरीदी थी और फिर इसके बाद उन्होंने पेशावर के एक शहरी को बेच दी थी। इस हवेली के मौजूदा मालिक हाजी इसरार शाह का कहना है कि उनके पिता ने यह इमारत 1980 में खरीदी थी। ढकी मोनव्वर शाह में स्थित कपूर हवेली महान शोमैन राज कपूर के दादा बशेशर नाथ ने 1922 में बनवाई थी। पेशावर से संबंध रखने वाले मशहूर लेखक इब्राहिम जिया ने 'पेशावर के फनकार' नाम से शोध परक किताब लिखी है। इस किताब में उन्होंने राज कपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर से लेकर शाहरुख खान तक पेशावर से संबंध रखने वाले कलाकारों का जिक्र किया है।
इब्राहिम जिया ने बीबीसी को बताया कि हवेली अब खस्ता हाल में है हालांकि अपने दौर में यह हवेली एक शानदार इमारत थी। इसमें बहुत से कमरे और कॉरिडोर थे। इब्राहिम जिया ने बताया कि कपूर हवेली के पास ही इंडियन फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर अदाकार दिलीप कुमार का मकान भी स्थित है और सरकार को चाहिए कि उन मकानों को सुरक्षित करें जैसे सेठी हाउस को सुरक्षित किया गया है। ये तीन मंजिला इमारत खूबसूरत बालकनी और मेहराबदार खिड़कियों से सजी हुई है जो अब बहुत ही जर्जर हालत में है। इस हवेली को कुछ समय पहले गिराने की कोशिश की गई थी लेकिन पुरातत्व विभाग ने ऐसा करने से रोक दिया था और इमारत गिराने वाले लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया था। सिविल सोसाइटी से संबंध रखने वाले सेक्रेटरी कल्चर हेरिटेज काउंसिल शकील वहीदुल्लाह खान ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा कि उन्होंने बार-बार सरकार से कहा है कि पेशावर में सभी सौ साल से पुरानी इमारतों को सुरक्षित करने के लिए कदम उठाये क्योंकि कुछ लोग उन पर कब्जा कर रहे हैं जिससे उन इमारतों को नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि कपूर हवेली और दिलीप कुमार का मकान इस समय जर्जर हालत में है और अगर कोई भूकंप आया तो किसी वक्त भी ये गिर सकता है। उन्होंने कहा कि सिविल सोसाइटी को लेकर वो इसके लिए जरूर कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि वह एक पत्र खैबर पख्तूननख्वाह के मुख्यमंत्री को लिखेंगे जिसमें इन इमारतों की सुरक्षा के लिए कहेंगे और उम्मीद करेंगे कि सरकार इस तरफ तवज्जोह दे वरना वह इसके खिलाफ भरपूर आवाज उठाएंगे।