लंबे समय से कोरोना वायरस का प्रकोप पूरा देश झेल रहा है। इस वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 67 हजार से ज्यादा हो गई है, जबकि 2206 लोगों की मौत हो चुकी है। कोरोना वायरस ने अपनी जद में केवल भारत को ही नहीं बल्कि कई देशों को ले लिया है। वहीं बहुत से देश मिलकर कोरोना वायरस से जंग जीतने के लिए वैक्सीन भी बनाने में लगे हुए हैं। कोरोना जैसे वायरस पर कई फिल्में और टीवी शो भी बन चुके हैं।
जब सीआईडी शो की पूरी टीम ने जीती थी कोरोना जैसे वायरस से जंग, वायरल हो रहा शो का एपिसोड
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उनमें से एक सोनी चैनल का सीरियल सीआईडी भी है। दरअसल सीआईडी मशहूर भारतीय टीवी सीरियल्स में से एक रहा है। इस सीरियल में अलग-अलग केस को दिखाया जाता है। सीआईडी की एक सीरीज साल 2013 में प्रसारित हुई थी जो हर तरह के वायरस के प्रकोप पर आधारित थी। इस सीरीज का नाम 'सीआईडी- खतरनाक वायरस का रहस्य' था। इसी में से एक एपिसोड कोरोना वायरस जैसे जानलेवा वायरस पर भी आधारित था। इस बात की जानकारी सोनीलिव ने दी है।
सोनीलिव के अनुसार 'सीआईडी- खतरनाक वायरस का रहस्य' के एक एपिसोड में दिखाया गया है कि एक फार्मा कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया जाता है। फार्मा कंपनी से बदला लेने के लिए वह कर्मचारी वायरस की शीशी चुरा लेते है और उसे फैला देता है। जिसके बाद देश की आबादी का बड़ा हिस्सा उस खतरनाक वायरस की मार झेलता है। वहीं बाद में एसीपी प्रद्युम्न (अभिनेता शिवाजी साटम) अपनी पूरी टीम के साथ मिलकर इस केस को हल करते हैं।
'सीआईडी- खतरनाक वायरस का रहस्य' के इस एपिसोड में एसीपी प्रद्युम्न की पूरी टीम को पीपीई किट्स पहनते हुए भी दिखाया गया। आपको बता दें कि सीआईडी सीरियल्स से जुड़े ज्यादातर एपिसोड यूट्यूब पर भी मौजूद हैं। दर्शकों ने इस शो को हमेशा से खूब पसंद किया है। साथ ही यह लंबे समय तक चलने वाले भारतीय सीरियल्स में से एक है।
बात करें देश में फैले कोरोना वायरस की तो कोरोना वायरस का कहर देश में लगातार बढ़ता ही जा रहा है। वहीं कोरोना वायरस की वजह से देश में जारी लॉकडाउन के बीच केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा है। जिसमें राज्यों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि लॉकडाउन के दौरान डाक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ को आवाजाही में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए। सरकार ने कहा है कि इनकी आवाजाही पर प्रतिबंध लगाने से कोविड और गैर-कोविड चिकित्सा सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती हैं।
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