निर्माता निर्देशक रामानंद सागर को आज भी उनके शो 'रामायण' के लिए याद किया जाता है। शो को करीब 30 साल बाद भी जो सफलता हासिल हुई है वह आश्चचर्यचकित करने वाली है। दूरदर्शन के बाद अब यह शो स्टार प्लस पर प्रसारित हो रहा है। रामायण के निर्माता निर्देशक रामानंद सागर के बेटे प्रेम सागर बताते हैं कि जब उमर गांव में शूटिंग चल रही थी तब वहां सैकड़ों किलोमीटर दूर से लोग भगवान के दर्शन करने की इच्छा से पहुंच जाते थे।कई दिनों का सफर कर उमरगांव पहुंच जाने वालों के ठहरने के लिए कमरों से लेकर बच्चों के दूध का इंतजाम तक किया जाता था। सिर्फ आम लोग ही नहीं कई बार तो वीआईपी मेहमान भी शूटिंग में पहुंच जाते थे।
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दिन रात चली रामायण की शूटिंग
प्रेम सागर ने बताया कि शूटिंग का कोई समय तय नहीं था। सुबह, दिन से लेकर रात के 3 बजे भी शूटिंग शुरू हो जाती थी। आधी रात में उठकर दारा सिहं, हनुमान के किरदार के लिए मेकअप करवाया करते थे। जिसमें तीन से चार घंटे का समय लगता था। शो में बड़ी तादाद में जूनियर आर्टिस्ट की जरूरत होती थी। सेना में दिखने वाले सैनिकों को इकट्ठा करना किसी चुनौती से कम नहीं था। इसके लिए आस पास के गांवों में ढोल नगाड़े बजाकर लोगों को बुलाया जाता था। यह घोषणा की जाती थी काम करने वाले लोगों को फ्री में खाना और 10 रुपये मिलेंगे। काफी कलाकार हमने महीने के हिसाब से रखे थे इस वजह से शो में एक ही कलाकार कई किरदार में नजर आए हैं। ऐसा शो पहले कभी नहीं बनाया गया था इसलिए हमें पहले से किसी भी चीज का आइडिया नहीं था। आगे चलकर यह शो एक ट्रेंड सेटर बना।
सीता के किरदार ने बदली जिंदगी
सीता मां का किरदार निभाने के बाद दीपिका चिखलिया आने वाले समय में सरोजिनी नायडू के रोल में नजर आएंगी। अपने पुराने अनुभव और आगे की योजनाओं को लेकर उन्होंने बताया कि उन्हें करियर की शुरुआत में कई रोचक किरदार मिले हैं। चाहे वह 'विक्रम बेताल' हो या 'रामायण'। सीता के किरदार का ही करिश्मा था कि वह देखते ही देखते आम लड़की से सीधे संसद पहुंच गईं। उसके बाद भी उनकी जिंदगी में बहुत बदलाव आए। वह अपनी जिदंगी में कई दूसरी चीजें आजमाना चाहती थी। बीच के कुछ साल वह अपने पति की कंपनी में काम करने लगी और घर-परिवार को समय देने लगी। इस दौरान बहुत कुछ बदल गया। अब उन्होंने वापसी की है। फिल्म 'बाला' में काम करने के बाद वह अब सरोजिनी नायडू के रोल में नजर आने वाली हैं। अब जो वह कर रही हैं वह पहले की तुलना में काफी अलग है। दोनों ही महिलाएं काफी खास रही हैं।
इस बार अदाकारी को मिली पहचान
दीपिका ने बातों बातों में यह भी बताया कि सीता का किरदार निभाना उनके लिए स्टीरियोटाइप रहा। लोगों ने जब उन्हें पिछली बार 'रामायण' में देखा था तब उनकी सुदंरता को प्रशंसा मिली थी। लेकिन इस बार उन्हें एक कलाकार के तौर पर पहचाना जा रहा है। यह उनके लिए काफी बड़ी बात है। दीपिका ने आगे बताया कि अक्सर ऐसी बातें होती हैं कि क्या सीता के रोल के कारण उनके हाथ से दूसरी तरह किरदार फिसल गए जो वह निभा सकती थी? इस पर वह बताती हैं कि उन्होंने रामायण से पहले इंडस्ट्री में करीब आठ साल तक काम किया था। अगर कुछ और मिलना होता तो उस दौरान भी मिल सकता था। हां अपनी इस वापसी से यह उम्मीद जरूर कर रही हैं कि उन्हें बहुत कुछ मिलेगा। उन्होंने रामायण को 30 साल से भी अधिक का समय दे दिया है अब लगता है कि इससे आगे बढ़ने का समय आ गया है।
टीआरपी पर सफाई
रामायण के कलाकारों के साथ हुई ऑन लाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीते दिनों रामायण को दुनिया का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला शो का तमगा हासिल करने वाले विवाद को लेकर भी बताचीत हुई। दरअसल दूरदर्शन की तरफ से एक ट्वीट के जरिए यह बताया गया कि 16 अप्रैल को प्रकाशित हुए एपिसोड में रामायण को 77 मिलियन टीआरपी हासिल हुई थी जो 'बिग बैंग थ्योरी' और 'गेम ऑफ थ्रोन्स' से अधिक थी। लेकिन बाद में यह खुलासा हुआ कि साल 1983 में प्रकाशित हुए शो 'मैश' को करीब 108 मिलियन की व्यूअरशिप हासिल हुई। इस बारे में सुनील लहरी ने बताया कि जब 'मैश' को यह व्यूअरशिप हासिल हुई थी उस समय तमाम डिजिटल प्लेफॉर्म्स उपलब्ध नहीं थे लेकिन आज के समय में तमाम दूसरे विकल्पों के रहते हुए यह संख्या प्राप्त करना बड़ी चुनौती है।