फिल्म 'मिमी' के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने वाली अभिनेत्री कृति सेनन इन दिनों अपनी आगामी फिल्म 'तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया' को लेकर उत्साहित हैं। इस फिल्म में कृति सेनन एक रोबोट का किरदार निभा रही हैं, जिसका नाम है, सिफ्रा। फिल्म 'आदिपुरुष' और 'गणपत' जैसी सुपरफ्लॉप फिल्मों की हीरोइन रहीं कृति सेनन के लिए ये फिल्म बहुत बड़ी चुनौती है। हालांकि, उनकी करीब करीब होम प्रोडक्शन ही हो चुकी कंपनी मैडॉक फिल्म्स का साथ उनको लगातार मिल रहा है, लेकिन फिर भी फिल्म 'तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया' उनके लिए किसी लिटमस टेस्ट से कम नहीं है। उनसे एक खास बातचीत।
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मैडॉक फिल्म्स के साथ तो लगातार कई फिल्में कर चुकी हैं, जब इस फिल्म के लिए आपके पास प्रस्ताव आया तो आपकी पहली प्रतिक्रिया क्या थी?
जब मैंने पहली बार फिल्म की कहानी सुनी तो मेरी चौंकने वाली प्रतिक्रिया थी लेकिन यह बहुत ही दिलचस्प था। मुझे बताया कि भविष्य में आगे चल कर ऐसा हो सकता है। रोबोट इंसान के इतने करीब है कि उससे प्यार हो जाए और रिलेशनशिप में आने बाद वह परिवार के बीच आए तो तो क्या क्या बातें हो सकती हैं, यह मुझे बहुत ही दिलचस्प लगा। मैंने मैडॉक के साथ कई फिल्में की हैं, उनकी फिल्मों में हमेशा कुछ न कुछ नया ही होता है।
फिल्म 'तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ में रोबोट का नया एंगल है..
हां, रोबोट का एंगल बहुत नया है लेकिन कहीं न कहीं फिल्म कुछ ऐसी बातें बोल जाती है कि आपको सोचने पर मजबूर कर देती है। एक कलाकार होने के नाते मुझे यह किरदार बहुत ही दिलचस्प लगा। मुझे यह पता नहीं था कि इसे कैसे करने वाली हूं। हमेशा एक चीज खुद में ढूंढना कि आप उसे कैसे करेंगे, बहुत ही चुनौतीपूर्ण होता है। कई बार आपको किरदार पता होता है, और आप को लगता है कि हो जाएगा, लेकिन जब आप करने जाते हैं, तब आपको लगता है कि उस किरदार को कैसे निभाना है।
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इस किरदार को निभाने के लिए अपनी भावनाओं को कितना नियंत्रित करना पड़ा ?
रोबोट का जो किरदार है वह इमोशन में नहीं जाएगा, क्योंकि वह रोबोट है। ऐसी कई चीजें हैं जो हम करते है और वह रोबोट नहीं कर सकता है। शुरू में मैं यह देख रही थी कि ठीक से हो रहा है कि नहीं हो रहा है। ज्यादा इंसानी या फिर ज्यादा रोबोटिक तो नहीं लग रही। कई बार तो मुझे ऐसा लग रहा था कि मुझे बांध दिया गया है और मैं एक्टिंग कर रही हूं। शुरुआत में मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे दम घुट रहा हो। वैसे भी अगर इंसान को रोबोट के अंदर डाल दिया जाए तो घुटन तो होगी ही। लेकिन धीरे- धीरे करते करते मुझे मजा आने लगा। जो काम जितना चुनौतीपूर्ण होता है, उसे करने में उतना ही मजा आता है।
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आपका फिल्मों की म्यूजिक सीटिंग और रिकॉर्डिंग जाना होता है?
हर गाने की म्यूजिक सीटिंग में नहीं जा पाती हूं। म्यूजिक में मेरी बहुत ही दिलचस्पी रही है। म्यूजिक खासकर करके बैकग्राउंड म्यूजिक किसी भी दृश्य को उठा, गिरा सकता है। किसी सामान्य दृश्य को बहुत ही अच्छा कर सकता है। और, कभी-कभी बहुत अच्छे सीन को बहुत खराब भी कर सकता है। हिंदी सिनेमा में संगीत शुरू से ही बहुत ही महत्वपूर्ण रहा है।
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