एक्टर और सिंगर कुंदनलाल सहगल यानी केएल सहगल को हिंदी फिल्म उद्योग का पहला सुपरस्टार माना जाता है। उन्होंने एक से बढ़कर एक कईं बेहतरीन फिल्में दी हैं। उनके अभिनय और गायन को लोगों के द्वारा खूब पसंद किया जाता था। भले ही वो आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी फिल्मों के जरिए आज भी वो हम सब में जिंदा हैं। उनका जन्म 11 अप्रैल 1904 को जम्मू में हुआ था। आज उनके जन्मदिन की 114 वीं वर्षगांठ के मौके पर चर्चा करते हैं उनकी जिंदगी के कुछ अनसुने पहलुओं पर। तो चलिए शुरू करते हैं...
KL Saigal: सेल्समैन बन घूमी दुनिया, सिंगिंग-एक्टिंग को बनाया जिंदगी, जानें देश के पहले सुपरस्टार का सफर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सहगल को बचपन से ही अभिनय और संगीत काफी पसंद था। वह अक्सर अपनी मां केसरबाई के साथ आए दिन संगीत कार्यक्रमों में पहुंच जाते थे। उनके पिता अमरचंद जम्मू कश्मीर के राजा के कोर्ट में एक तहसीलदार थे। के एल सहगल को अभिनय का इतना शौक था कि वह रामलीला में सीता का किरदार निभाया करते थे। बचपन में ही उन्होंने इंडियन क्लासिकल म्यूजिक में महारत हासिल कर ली थी।
सहगल ने कम उम्र में स्कूल छोड़ जाना बंद कर दिया था। पैसा कमाने के लिए उन्होंने रेलवे टाइम कीपर का काम किया। जिसके बाद उन्होंने टाइपराइटर सेल्समैन की नौकरी की। इस नौकरी के सहारे उन्होंने पूरा देश घूमा। इस दौरान लाहौर में उनकी मुलाकात मेहरचंद जैन से हुई। वह मेहपचंद के साथ कोलकाता आए। कोलकाता में रहते हुए उनकी संगीत की और रूचि बढ़ने लगी। साल 1930 में संगीत निर्देशक हरिश्चंद्र बाली के द्वारा आरसी बोरल रॉय से उनकी पहचान कराई गई।
यह भी पढ़ें: सिद्धार्थ की यादों से उबर नहीं पाई हैं शहनाज गिल? सलमान खान ने दी 'मूव ऑन' की सलाह
फिल्मों में काम पाने के लिए सहगल ने खूब मेहनत की। बी एन के फिल्म स्टूडियो में उन्होंने 200 रुपए महीने के वेतन पर काम किया। इस दौरान उनकी मुलाकात केसी डे, पहाड़ी सान्याल और पंकज मल्लिक से हुई थी। इसके बाद ही उनके हाथ में पहली फिल्म आई थी, सहगल को फिल्म 'मोहब्बत के आंसू' में काम करने का मौका मिला। साल 1932 में उन्होंने फिल्म 'जिंदा लाश' और 'सुबह का सितारा' की। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुडकर नहीं देखा।
यह भी पढ़ें: पुलिस ऑफिसर का रोल अदा करने के लिए मृणाल ने बेले खूब पापड़, बोलीं- खुशी है कि मेहनत सफल हुई
साल 1935 में आई उनकी फिल्म देवदास को लोगों ने खूब पसंद किया। उनके बेहतरीन अभिनय की हर तरफ चर्चा हुई। उन्होंने अपने कैरियर में करीब 36 फिल्मों में गाने गाए। इनमें 28 हिंदी, सात बंगाली और एक तमिल फिल्म शामिल है। उन्होंने करीब 185 गानों में अपनी आवाज का जादू बिखेरा। जिनमें से 142 फिल्मी व 43 गैर फिल्मी गाने शामिल हैं।
यह भी पढ़ें: फिल्म फरहाद सामजी की, सलमान खान को ट्रेलर लॉन्च पर याद आए भंसाली और बड़जात्या