स्वर कोकिला लता मंगेशकर की पहली पुण्यतिथि पर मंगेशकर परिवार ने उनके बुजुर्ग कलाकारों के लिए वृद्धाश्रम खोलने के सपने के मूर्तरूप लेने की जानकारी दी है। लता मंगेशकर का पिछले साल 6 फरवरी 2022 को निधन हो गया था। लता मंगेशकर की छोटी बहन उषा मंगेशकर का कहना है कि दीदी जैसा कोई 100 वर्षों तक नहीं बन सकता है। वह भगवान की देन और साक्षात सरस्वती की अवतार थी। वह घर के सभी सदस्यों का बहुत ख्याल रखती थी खास तौर पर मेरा तो कुछ ज्यादा ही क्योंकि मैं घर में सबसे छोटी थी। अभी भी हमें ऐसा लगता है कि दीदी हमारे आस पास ही हैं। जब मैं सात साल की थी, तब से दीदी के साथ ही रही हूं, आज मुझे ऐसा ही लगता है, जैसे हमारे पीछे वह खड़ी हैं।
Lata Mangeshkar: लता मंगेशकर के निधन के बाद परिवार ने त्याग दी ये मिठाई, वृद्धाश्रम के लिए नासिक में मिली जमीन
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पहली बार अपनी दीदी के साथ फिल्म 'आजाद' में 'अपलम चपलम' गीत गाने वाली उषा कहती हैं, तब मुझे गायिकी का उतनी समझ नहीं थी, मैं तो पेंटिंग करती थी, दीदी के कहने पर ही मैंने उनके साथ गाया था। इस तरह से गायकी के क्षेत्र में मेरी शुरुआत हुई थी। लता मंगेशकर को गाने के अलावा खाना बनाने का भी बहुत शौक था।
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उषा मंगेशकर बताती हैं, दीदी को खाना बनाने का बहुत शौक था। वह वेज और नॉन वेज खाना बहुत अच्छा बनाती थी। खास तौर पर तो गाजर का हलवा बहुत ही स्वादिष्ट बनाती थीं. उनके जाने के बाद हमने गाजर का हलवा खाना बंद कर दिया। कई लोग उनके हाथ का बना खाना खाते आते थे। खाना बनाने के अलावा उन्हें क्रिकेट और फोटोग्राफी का भी बहुत शौक था।
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लता मंगेशकर का सपना एक वृद्धाश्रम बनाने का था। उषा मंगेशकर कहती हैं, 'दीदी का कहना था कि जो भी कलाकार हैं, उनका बुढ़ापा खराब नहीं होना चाहिए, इसलिए वह वृद्धाश्रम बनाना चाहती थी। हम लोग उनके इस सपने को पूरा करने जा रहे हैं। वृद्धाश्रम के लिए हमे नासिक में जमीन मिल गई है, जल्द ही इसपर काम शुरू होगा। एक वृद्धाश्रम में एक गौशाला भी बनाया जाएगा, जहां पर भटके हुए जानवरों को रखा जाएगा। दीदी ने स्वर मौली फाउंडेशन का का निर्माण किया था। इसी संस्था के तहत वृद्धाश्रम का देखभाल किया जाएगा।'
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इसके अलावा मुंबई यूनिवर्सिटी के सामने लता मंगेशकर की याद में एक म्यूजियम बनने जा रहा है। यह फैसला महाराष्ट्र सरकार पिछले साल लता मंगेशकर के निधन के तुरंत बाद लिया था। बताया जा रहा है कि इसके लिए सरकार 1200 करोड़ रुपये खर्च करेगी और यह भारत रत्न लता दीनानाथ इंटर कालेज ऑफ म्यूजिक एंड म्यूजियम के नाम से जाना जाएगा। उषा मंगेशकर कहती हैं, 'हमने दीदी का सारा सामान संभालकर रखा है। दीदी की याद में हम लोग मुंबई यूनिवर्सिटी के सामने एक म्यूजियम बनाने जा रहे हैं, जहां पर दीदी की सारी चीजे रखी जाएगी।'
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