अपने जमाने के हिट निर्देशक रहे मधुर भंडारकर का करियर इन दिनों हाशिये पर है। एक समय ऐसा भी रहा है जब वह सुपर सितारों के दुलारे निर्देशक हुआ करते थे। अक्षय कुमार, अजय देवगन, तब्बू, प्रियंका चोपड़ा और करीना कपूर जैसे दिग्गज सितारों के साथ काम कर चुके मधुर को अपनी फिल्मों ‘चांदनी बार’, ‘पेज थ्री’, ‘फैशन’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिल चुके हैं। साल 2016 में उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया जा चुका है। लेकिन, आज मधुर भंडारकर की ऐसी स्थिति है कि उनके साथ कोई बड़ा स्टार काम करने को तैयार नहीं है। उनकी रिलीज को तैयार फिल्म 'बबली बाउंसर' को वितरक नहीं मिले तो ये फिल्म सीधे ओटीटी पर रिलीज हो रही है। इस फिल्म में सबसे बड़ी गलती उन्होंने इसकी हीरोइन के तौर पर तमन्ना भाटिया को लेकर की। तमन्ना भाटिया हिंदी सिनेमा की फ्लॉप हीरोइनों में शुमार होती हैं। एक सुपरहिट निर्देशक हिंदी सिनेमा में और किन नौ गलतियों के चलते आहिस्ता आहिस्ता हाशिये पर पहुंच गया, आइए जानने की कोशिश करते हैं…
Madhur Bhandarkar: कैसे धीरे धीरे हाशिये पर पहुंच गए मधुर भंडारकर, इन 10 गलतियों में छिपी पूरी रामकहानी
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कास्टिंग काउच के आरोप से खराब हुआ नाम
फिल्म 'चांदनी बार' के बाद मधुर भंडारकर की गिनती बॉलीवुड के सफल निर्देशकों में होने लगी थी।यह फिल्म समीक्षकों द्वारा खूब सराही गई और फिल्म को सर्वश्रेष्ठ फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। तब्बू को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री और सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता के लिए अतुल कुलकर्णी को भी राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके बाद मधुर भंडारकर की 'सत्ता' और 'आन-मेन एट वर्क' जैसी फिल्में आईं जो व्यावसायिक रूप से उतनी सफल नहीं रहीं। इसी बीच साल 2004 में प्रीति जैन नामक एक मॉडल ने मधुर भंडारकर पर कास्टिंग काउच का आरोप लगा दिया। साल 2005 में इसके चलते मधुर की गिरफ्तारी भी हुई। बाद में ये पूरा मामला अदालत में गलत पाया गया और बाद में प्रीति जैन को भी मधुर को मारने की सुपारी देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया।
'आन' की विफलता का ठीकरा निर्माता के सिर फोड़ा
'चांदनी बार' और 'सत्ता' के बाद मधुर भंडारकर ने साल 2004 में मल्टीस्टारर फिल्म 'आन-मेन एट वर्क' का निर्देशन किया। इस फिल्म में अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, शत्रुघ्न सिन्हा, जैकी श्रॉफ, इरफान खान, परेश रावल, रवीना टंडन, लारा दत्ता, ओम पूरी, राहुल देव, रवि किशन जैसे सितारों की फौज थी। इसके बावजूद फिल्म नहीं चली तो मधुर भंडारकर ने इसकी असफलता का ठीकरा फिल्म के निर्माता फिरोज नाडियाडवाला पर फोड़ते हुए कहा कि वह निर्देशन में न सिर्फ बहुत हस्तक्षेप करते थे, बल्कि कई बार तो वह खुद ही सीन निर्देशित करने लगते थे। इस विवाद ने भी मधुर के संबंध निर्माताओं से खराब किए।
'दिल तो बच्चा है जी' में बड़ा गच्चा
'आन' की असफलता के बाद मधुर भंडारकर का फिर सामाजिक मुद्दे पर झुकाव हुआ और उन्होंने 'पेज थ्री', 'ट्रैफिक सिग्नल' और 'फैशन' जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। इसके बाद मधुर को फिर लगा कि उन्हें अब बिल्कुल नया प्रयोग करना चाहिए तो उन्होंने रोमांटिक कॉमेडी फिल्म 'दिल तो बच्चा है जी' बना डाली। इस फिल्म का निर्माण भी मधुर भंडारकर ने कुमार मंगत पाठक के साथ मिलकर किया। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर न सिर्फ फ्लॉप हुई बल्कि इस फिल्म को लेकर मधुर भंडारकर की आलोचना भी खूब हुई। अजय देवगन जैसे सितारे को संभालने कूवत न होने की बातें होने लगीं और मामला आगे फिर बिगड़ता ही चला गया। 'दिल तो बच्चा है जी' से पहले मधुर भंडारकर की फिल्म 'जेल' में भी पहले दिन ही फ्लॉप घोषित हो गई थी।
‘जेल’ के बाद नहीं मिली करियर को बेल
चर्चा जब मधुर भंडारकर की 'जेल' की शुरू ही हो गई है तो इस फिल्म से जुड़ी बात भी बताते चलते हैं। 'जेल' का निर्देशन मधुर भंडारकर ने साल 2009 में किया था। इस फिल्म के हीरो थे नील नितिन मुकेश। नील को बड़ी उम्मीदें थी कि ये फिल्म उनका करियर संवार देगी। फिल्म में परसेप्ट पिक्चर कंपनी के मालिक शैलेंद्र सिंह ने दिल खोलकर पैसा लगाया। फिल्म का बजट 14 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। लेकिन फिल्म रिलीज होते ही फ्लॉप हो गई। शैलेंद्र सिंह की हालत ये हो गई कि उन्हें आगे चलकर ये फिल्म कंपनी ही बंद करनी पड़ी।