भारतीय सिनेमा के जाने-माने फिल्म निर्देशक, निर्माता और लेखक मणि रत्नम को प्रमुख तौर पर तमिल सिनेमा में काम करने के लिए जाना जाता है। लेकिन, उन्होंने हिंदी सिनेमा में भी उतना ही शानदार काम किया है। हाल ही में उनकी ऐश्वर्या राय बच्चन के साथ अखिल भारतीय फिल्म 'पोन्नियिन सेल्वन' की चर्चाएं जोरों पर हैं। हालांकि यह फिल्म भी तमिल में ही बनेगी लेकिन पूरे भारत में सभी प्रमुख भाषाओं में डब होकर हर भारतीय का मनोरंजन करेगी। मणि रत्नम इससे पहले भी तमिल फिल्में बनाकर हिंदी का फिल्मफेयर अवॉर्ड जीत चुके हैं। इसी वजह से उन्होंने अपने पूरे करियर में छह राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, चार फिल्मफेयर पुरस्कार और छह तमिल फिल्मफेयर पुरस्कार जीत चुके हैं। आज हम आपको उनकी हिंदी में धमाल मचाने वाली फिल्मों के बारे में बताते हैं।
Mani Ratnam Birthday: पाकिस्तान पर सीधे कैमरा तानने वाले मणिरत्नम की ये फिल्में हैं उनके दमदार निर्देशन की असली झांकी
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रोजा (1992)
मणि रत्नम को खासतौर पर आतंकवादियों के ऊपर बनी रोजा, बॉम्बे और दिल से फिल्मों की ट्रायलॉजी के लिए जाना जाता है। इन सभी फिल्मों ने मणि रत्नम की फिल्मोग्राफी को नए आयाम दिए। मणि रत्नम की यह फिल्म तमिलनाडु की एक साधारण लड़की की कहानी है जो अपने खोए हुए पति को पागलों की तरह ढूंढने में लगी हुई है। उसके पति को एक सीक्रेट अंडरकवर मिशन के दौरान जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों ने किडनैप कर लिया है। इस बहुत ही साधारण सी कहानी को मणिरत्नम ने बहुत ही अच्छे से फिल्माया। मणि रत्नम ने इस फिल्म के लिए खूब वाह वाही बटोरीं। यह पहली भारतीय फिल्म भी है जिसमें सीधे सीधे पाकिस्तान को आतंकवाद के लिए जिम्मेदार दिखाया गया। हिंदी में डब होकर रिलीज होने वाली फिल्मों में भी इस फिल्म ने और इसके संगीत ने कामयाबी का नया रिकॉर्ड बनाया।
बॉम्बे (1995)
आतंकवादियों वाली फिल्मों में मणि रत्नम की दूसरी फिल्म यह रही। इस सुपरहिट फिल्म में अरविंद स्वामी, मनीषा कोइराला, सोनाली बेंद्रे आदि ने मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं। यह एक मुस्लिम और एक हिंदू के प्यार की कहानी है जो चुपके से एक दूसरे से शादी कर लेते हैं। लेकिन, उनके परिवारों को उनकी इस शादी से ऐतराज होता है। इसके बावजूद यह जोड़ा मुंबई चला आता है। यहां आकर उन्हें सांप्रदायिक दंगों का सामना करना पड़ता है। इस बेहतरीन फिल्म को मणि रत्नम ने खुद लिख कर निर्देशित किया और इसका खुद ही निर्माण भी किया। फिल्म तमिल में भी हिट रही और हिंदी में भी इसे सर्वश्रेष्ठ फिल्म के फिल्मफेयर क्रिटिक्स अवॉर्ड से नवाजा गया। दक्षिण सिनेमा के फिल्मफेयर अवॉर्ड में भी इस फिल्म के लिए मणि रत्नम को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के अवार्ड से नवाजा गया।
दिल से (1998)
आतंकवादियों की ट्रायलॉजी में मणिरत्नम की यह अंतिम फिल्म है। इस फिल्म में मनीषा कोइराला, शाहरुख खान, प्रीति जिंटा, तिग्मांशु धूलिया आदि कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आए। इस फिल्म का तो म्यूजिक भी काफी हिट हुआ और इसके लिए ए आर रहमान को सर्वश्रेष्ठ संगीतकार के फिल्मफेयर अवॉर्ड से भी नवाजा गया। फिल्म की कहानी में अमर नाम का एक पत्रकार होता है जो एक रहस्यमयी लड़की से प्यार करने लगता है। हालांकि वह अमर की भावनाओं को नहीं समझती। अमर जब शादी के लिए तैयार होता है तो वह उससे अपने एक काम को पूरा करने के लिए मदद मांगती है। इस फिल्म के लिए मणिरत्नम को बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में स्पेशल अवॉर्ड से नवाजा गया।
साथिया (2002)
मणि रत्नम ने इस फिल्म को लिखा है और इसका निर्माण भी किया है। लेकिन, इसके निर्देशन की जिम्मेदारी मणि रत्नम ने शाद अली को सौंपी। यह रोमांटिक म्यूजिकल फिल्म अपने जॉनर के हिसाब से एक प्रेमी जोड़े की कहानी है। इसमें आदित्य और सुहानी परिवार से भारी विरोध झेलने के बाद भाग कर शादी कर लेते हैं। हालांकि, दुनियादारी समझने के साथ ही धीरे-धीरे उनके रिश्ते में दरार आना शुरू हो जाती है। इस अनोखी कहानी में विवेक ओबेरॉय, रानी मुखर्जी, शाहरुख खान, संध्या मृदुल, शमिता शेट्टी आदि कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आए। जैसे कि यह एक म्यूजिकल फिल्म है जिसके लिए ए आर रहमान ने सर्वश्रेष्ठ संगीत निर्देशक, गुलजार ने सर्वश्रेष्ठ लिरिक्स और सोनू निगम में सर्वश्रेष्ठ पुरुष गायक का फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता। मणि रत्नम को भी इस फिल्म के लिए सर्वश्रेष्ठ स्क्रीनप्ले के अवार्ड से नवाजा गया।