एक चतुर नार बड़ी होशियार...,ए मेरी जोहरा जबीं, तुझे मालूम नहीं... ऐसे कई यादगार और सदाबहार गाने हिंदी सिनेमा को दिए हैं मन्ना डे ने। गायकी की दुनिया का वह एक ऐसा अनमोल रत्न थे, जिनके सुर और ताल की दुनिया आज भी दीवानी है। आज भी मन्ना डे के खूबसूरत गाने लोगों की जुबान पर चढ़े रहते हैं। वह एक ऐसे गायक थे, जिन्होंने हिंदी के अलावा कई क्षेत्रीय भाषाओं में भी हिट गाने दिए। बड़े से बड़े सिंगर भी मन्ना डे का लोहा मानते थे। आज लीजेंडरी प्लेबैक सिंगर मन्ना डे का जन्म दिवस है। चलिए इस खास मौके पर जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें...
Manna Dey: मन्ना डे की गायकी और कठिन गानों के मोहम्मद रफी भी थे कायल, इस वजह से एक बार जेल जाने की आई थी नौबत
मन्ना डे का जन्म एक मई 1919 में कोलकाता के एक बंगाली परिवार में हुआ था। मन्ना डे का असली नाम प्रबोध चंद्र था। बचपन से ही उनकी रूचि संगीत की और थी, लेकिन उनके पापा उन्हें वकील बनाना चाहते थे। हालांकि, उन्होंने अपने मन की बात सुनते हुए संगीत की दुनिया में कदम रखा। मन्ना डे ने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने चाचा उस्ताद कृष्ण चंद्र डे और उस्ताद दाबिर खान से ग्रहण की थी। हिंदी सिनेमा में उन्होंने साल 1947 में आई फिल्म 'तमन्ना' से गाने की शुरुआत की थी। वह अपनी गायकी के अनोखे अंदाज और शैली के लिए जाने जाते थे।
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मन्ना डे के गानों की पसंद बाकी गायकों से अलग थी। उनके गाने बेहद पेचीदा होते थे। मन्ना डे को कठिन गाने गाना पसंद था। वह मोहम्मद रफी और किशोर कुमार के गानों को अपनी आवाज बड़े ही आराम से दे सकते थे, लेकिन मन्ना डे के गाने को गाना बाकी गायकों के बस की बात नहीं थी। पांच दशकों के करियर में मन्ना डे ने बंगाली, गुजराती, मराठी, मलयालम, कन्नड़ और असमी भाषा में लगभग 3500 से ज्यादा गाने। शास्त्रीय संगीत पर मन्ना डे की पकड़ काफी मजबूत थी। उन्होंने कई क्लासिकल और सेमी क्लासिकल गानों को अपनी आवाज दी।
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मन्ना डे ने हिंदी सिनेमा में इतने पेचीदा गाने गाए थे कि मोहम्मद रफी और किशोर कुमार भी उनके फैन हो गए थे और उनके गानों की तारीफ किया करते थे। मन्ना डे के गाने को लेकर मोहम्मद रफी ने कहा था, 'आप लोग मेरे गीत को सुनते हैं, लेकिन अगर मुझसे पूछा जाए तो मैं कहूंगा कि मैं मन्ना डे के गीतों को ही सुनता हूं।' वहीं, महेंद्र कपूर ने मन्ना डे की तारीफ करते हुए कहा था, 'हम सब उन्हें मन्ना दा के नाम से ही पुकारते हैं। शास्त्रीय संगीत गायकी में उनका कोई सानी नहीं है।' संगीत की दुनिया में अपने महान योगदान के लिए मन्ना डे को पद्मश्री और पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया गया था।
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संगीत की दुनिया के महान कलाकार को सब पूजते थे, लेकिन एक बार ऐसा समय आया कि जब उनके जेल जाने की नौबत तक आ गई। दरअसल, लखनऊ में एक प्रोग्राम में वह परफॉर्मेंस करने पहुंचे थे। चारबाग रेलवे स्टेशन के पास एक संगीत समारोह का आयोजन होना था, लेकिन कार्यक्रम से पहले आयोजक गायब हो गए और दर्शक इंतजार करते रहे। भड़के लोगों ने पुलिस में शिकायत की। कार्यक्रम में मन्ना डे को बतौर मेहमान बुलाया गया था और पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया, जिसके बाद उनसे पूछताछ की गई। अन्य गायकों और रंगकर्मियों ने मामले को सुलझाने में पुलिस की मदद की। इसके बाद मन्ना डे को राहत मिली।
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