साल की शुरुआत मनोज बाजपेयी के लिए शानदार रही है। अभिनेता की फिल्म 'द फैबल' बर्लिन फिल्म फेस्टिवल में पहुंची। वहीं, 'जोरम' की पटकथा एकेडमी लाइब्रेरी के मुख्य संग्रह का हिस्सा बनी। इसके साथ ही उनके वेब प्रोजेक्ट 'किलर सूप' को भी सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। अभिनेता की 'जोरम' वापस से सिनेमाघरों में रिलीज हुई है, जिसे लेकर वह फूले नहीं समा रहे हैं। मनोज बाजपेयी हालिया इंटरव्यू में प्रोजेक्ट के चुनाव और सफलता पर खुलकर बात करते नजर आए हैं।
Manoj Bajpayee: एकेडमी लाइब्रेरी का हिस्सा बनने के बाद दोबारा रिलीज हुई जोरम, सफलता से मनोज बाजपेयी गदगद
मनोज बाजपेयी की 'जोरम' दोबारा सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। अभिनेता इस सफलता से गदगद हैं, और अपने करियर पर बारीकी से प्रकाश डालते नजर आए हैं।
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हालिया इंटरव्यू में मनोज बाजपेयी ने कहा कि उन्हें खुशी है कि लोग आखिरकार उनकी पसंद पर ध्यान दे रहे हैं, और उन्हें स्वीकार कर रहे हैं। मनोज बाजपेयी ने अपने साहसी विकल्पों के बारे में बात करते हुए कहा, 'ये वे परियोजनाएं हैं जो मैं कई सालों से कर रहा हूं। इससे मुझे खुशी होती है कि उन पर ध्यान दिया जा रहा है। आत्मविश्वास एक ऐसी चीज है जिसके साथ मैं इन विकल्पों के साथ आगे बढ़ रहा हूं। ऐसा नहीं है कि स्वीकृति मुझे आत्मविश्वास दे रही है। दृढ़ विश्वास हमेशा था। अब ऐसा हो गया है कि लोग उस कंटेंट का स्वागत कर रहे हैं जो मैं कर रहा हूं।'
मनोज बाजपेयी के अनुसार, विकल्पों पर ध्यान सिर्फ पांच साल पहले ही मिलना शुरू हुआ था और इस बदलाव का श्रेय वे ओटीटी को देते हैं। अभिनेता ने कहा, 'मैं कई सालों से इसमें हूं, लेकिन पिछले पांच साल से, ओटीटी स्पेस आने के साथ, दर्शक मेरी फिल्मों के लिए खुल रहे हैं। यह बहुत गर्व की बात है। मैं उस टीम के प्रति आभारी और खुश हूं जो इसे संभव बनाने की कोशिश कर रही है।'
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अपनी पसंद के बारे में बात करते हुए, द फैमिली मैन स्टार ने कहा, 'ये किसी अन्य कारण से नहीं, बल्कि पूरी तरह से सिनेमाई गुणवत्ता के आधार पर चुने गए विकल्प हैं। यह बॉक्स ऑफिस या पैसे के लिए नहीं था। आपकी फिल्म रिलीज होने के बाद, भले ही वह नुकसान या विफलता हो, आप बस आगे बढ़ जाते हैं। यह मेरे विश्वास तंत्र में समाहित है। मैं अंत तक अपनी फिल्मों और निर्देशकों पर कायम रहता हूं।'
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जब 'द फैबल' की बात आती है, तो यह इस साल बर्लिन अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में प्रमुख श्रेणियों में से एक में प्रतिस्पर्धा करने वाली भारत की एकमात्र फिल्म है। इसका निर्देशन राम रेड्डी ने किया है। मनोज ने जोड़ा, 'यह फिल्म के लिए एक बड़ी शुरुआत है। इस फिल्म की योजना कई साल पहले बनाई गई थी। जब हमने इसकी शूटिंग शुरू की, तो पहले लॉकडाउन की घोषणा की गई और फिर हमें इसे रद्द करना पड़ा... फिल्म कई परीक्षणों से गुजरी है... हमें खुशी है कि फिल्म अच्छी बनी है और फिल्म की गुणवत्ता अच्छी है। इसका मतलब यह भी है कि यहां से यात्रा काफी शानदार होने वाली है।'
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