युवा दिवस पर विश्व सुंदरी मानुषी छिल्लर ने उन्हें डिजिटल की दिनों दिन बिगड़ती दिशा और दशा से सतर्क रहने की अपील की है। मानुषी का कहना है कि युवाओं को लाइक्स, शेयर और कमेंट्स के मायाजाल से दूर ही रहना चाहिए क्योंकि ये आभासी दुनिया है और इसकी असलियत से कोई लेना देना नहीं है।
विश्वसुंदरी मानुषी का खुलासा, आभासी दुनिया के लाइक्स, शेयर और कमेंट्स ऐसे घोल रहे जीवन में जहर
मानुषी कहतीं हैं, “हमारे देश के युवा, तकनीक की लहर पर सवार हैं और जहां बड़े पैमाने पर इसके फायदे हैं, वहीं नुकसान भी हैं। हम गंभीर ऑनलाइन विषाक्तता व नफरत के माहौल में काम कर रहे हैं। बावजूद इसके युवाओं को खुद को स्वतंत्र महसूस करना चाहिए, अपनी पहचान बनानी चाहिए, गलतियां करनी चाहिए और उन गलतियों से सीखना भी चाहिए। डिजिटल दुनिया की इस नकारात्मकता का सामना करने के लिए हमें पूरी तरह से मजबूत होना चाहिए और ये समझने की शक्ति विकसित करनी चाहिए कि क्या सही है और क्या गलत।”
फिल्म ‘पृथ्वीराज’ में अक्षय कुमार के अपोजिट डेब्यू करने के लिए तैयार मानुषी ये भी कहती हैं कि आभासी दुनिया में लाइक, शेयर और कमेंट्स युवाओं पर निश्चित रूप से दबाव बढ़ा रहे हैं। लेकिन, युवाओं को हमेशा इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि वास्तव में यह सब कुछ नहीं है। भले ही संख्या या मात्रा के लिहाज से हम इसे पसंद करते हों, बावजूद इसके यह वास्तविक नहीं है। जो मायने रखता है, वह यह है कि हम कौन हैं, हमारे बूनियादी मूल्य क्या हैं, हम दूसरों के साथ कैसा व्यवहार करते हैं और हम अपने परिवार, दोस्तों, पर्यावरण और देश के प्रति कितने जिम्मेदार हैं।
23 साल की मानुषी को लगता है कि कोरोना वायरस महामारी के साथ रहना निश्चित रूप से उनके साथ ही अन्य युवाओं के लिए नई प्राथमिकताएं निर्धारित कर रहा है। युवा और बच्चे भी एक ऐसे वातावरण में बड़े हो रहे हैं, जहां आज वे एक महामारी के बीच रह रहे हैं और हमने भविष्य की जो कल्पनाएं की हैं, वह इससे प्रभावित होगी। वह कहतीं हैं, “मुझे उम्मीद है कि यह युवाओं की तलाश और अभिव्यक्ति को बाधित नहीं करेगा। युवाओं को नई खोज करने और जीवन का निडरता से नेतृत्व करने में शर्म नहीं करनी चाहिए क्योंकि, हम अपने भविष्य की खोज करने वाले हैं।”
तकनीक के इस दौर में युवा तेजी से परिपक्व हो रहे हैं और मानुषी इस तर्क का स्वागत करती हैं। मानुषी कहतीं हैं, “सभी नवाचारों और सभी कठिन परिस्थितयों का निश्चित रूप से प्रभाव पड़ेगा। मुझे उम्मीद है कि यह केवल युवाओं की विकास प्रक्रिया का एक हिस्सा है और अनुभव हासिल करने के प्रति उनका मोहभंग नहीं करता। युवाओं को बिना किसी डर के जीना चाहिए, स्वतंत्र रहना चाहिए और हमेशा महसूस करना चाहिए कि वे सूरज का पीछा कर सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस पर मैं चाहती हूं कि हमारे देश के युवा इन बाहरी दबावों के आगे न झुकें और सपने देखते रहें। ये विचार ही इस दुनिया के भविष्य को आकार देंगे।”
