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Mimi Trailer: 20 लाख के लालच का ‘बच्चा’, समझिए सरोगेसी का गच्चा थोड़ा कॉमिक अंदाज में
लेखक: रोहन शंकर, लक्ष्मण उतेकर
कलाकार: कृति सैनन, पंकज त्रिपाठी, साई तम्हणकर, मनोज पाहवा, स्मिता जयकर और सुप्रिया पाठक।
निर्देशक: लक्ष्मण उतेकर
ओटीटी: जियो सिनेमा व नेटफ्लिक्स
रेटिंग: ***
पता नहीं आपने पहले कहीं पढ़ा कि नहीं लेकिन मुंबई में ना, एक चुटकुला बहुत चलता है। है तो पुराना लेकिन आज ये फिर से याद आया फिल्म ‘मिमी’ का ट्रेलर देखकर। तो गुस्ताखी माफ, चुटकुला कुछ यूं है कि जब कपूर खानदान में ऋषि कपूर का बेटा हुआ और पूरी इंडस्ट्री ने उसके एक दिन सुपरस्टार बनने की दुआ मांगी। तकरीबन उसी समय यूपी के पूरब साइड में दो बेटे पैदा हुए। दोनों भाइयों ने ठानी कि हम इसे सुपरस्टार बनने नहीं देंगे। चुटकुला खत्म हुआ। अगर पहेली सा लगा हो। तो बूझ भी सकते हैं। लौटते हैं अब आज के चुटकुले पर। देश में सरोगेसी को लेकर कोई तयशुदा कानून तो अब तक बना नहीं है। फिल्में जरूर बनती रहती हैं। आपको पता है सरोगेसी को लेकर जो प्रस्तावित कानून है, वो रेट्रोस्पेक्टिव में लागू हो जाए तो हिंदी सिनेमा के तमाम सितारे सींखचों के पीछे दिख सकते हैं। लेकिन, लक्ष्मण उतेकर का मामला सीरियस नहीं है। ये चुटकुला सा ही ज्यादा दिखता है।
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मिमी ट्रेलर
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सरोगेसी के बने अनबने कानून के मुताबिक सिंगल पैरेंट सरोगेसी से मां या बाप नहीं बन सकता। जिन पैरेट्स के ऑलरेडी एक बच्चा है, वह सरोगेसी से दोबारा मां या बाप नहीं बन सकता। और भी तमाम सारे लोचे हैं, लेकिन फिलहाल दिनेश विजन का लोचा यो है कि उन्हें किसी तरह कृति सैनन को नंबर वन हीरोइन बनाना है। इसी चक्कर में वह एक बार डायरेक्टर तक बन चुके हैं। कृति सैनन को भी अब लगने लगा है कि इत्ती मेहनत एक प्रोड्यूसर बिना ‘मतलब’ उनके लिए कर रहा है तो कुछ मेहनत उनको भी एक्टिंग में कर ही लेनी चाहिए। तो ‘पानीपत’ वाली हरियाणवी वह यहां एक राजस्थानी सी दिखती फिल्म में ले आई हैं।
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मिमी ट्रेलर
- फोटो : स्क्रीन ग्रैब
फिल्म ‘मिमी’ का किस्सा साफ है। फिरंगियों का एक जोड़ा है। एक सरोगेसी एजेंट है। उसने गांव की छोरी को सेट कर लिया है फिरंगियों के टेस्ट ट्यूब बेबी की मां बनने के लिए। अब छोरी मां बनेगी तो पेट भी दिखेगा। पेट छुपाने के लिए वह खुद को बुर्के में छुपाती है और मामला हिंदुस्तान पाकिस्तान होने लगता है। फर्ज कीजिए आपके शहर के हरे रंग के झंडों से पटे रहने वाले इलाके में एक पिद्दी सी कार खड़ी हो और उस पर भी जय श्री राम लिखा हो। फिल्म ‘मिमी’ के ट्रेलर का यही बेस्ट सीन है। या फिर वह वाला जिसमें पंकज त्रिपाठी घुटनों पर आकर मस्जिद में नमाज पढ़ रहे हैं। ऐसा एक बार मेरे साथ हो चुका है तो मैं समझ सकता हूं कि इस सीन को करने में कैसे दिल धाड़ धाड़ करता है और कैसे यूं लगता है कि जान बस हथेली पर ही है।
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मिमी ट्रेलर
- फोटो : स्क्रीन ग्रैब
ट्रेलर शुरू होता है कृति सैनन की मोहक, मादक और मस्त अदाओं से और आके रुकता है वहां जहां रुकना अबके दिनों में हर कहानी का लाजिमी है। अब कुछ ऐसा बचा नहीं है इस देश में जिसमें कोई दो चार कदम आगे बढ़े और मामला मोहल्ले का न हो जाए। हवन कराने वालों के हाथ जलते तो आपने भी सुने ही होंगे। पंकज त्रिपाठी ही ट्रेलर की जान हैं। भले उनकी इन सारी अदाओं से उनके प्रशंसकों की पुरानी पहचान है। पिछली बार पंकज और कृति मिले थे तो बाप बेटी बने थे परदे पर। इस बार पंकज त्रिपाठी ने वह खांचा तोड़ा है। अदाकारी में उनके कमाल और भी हैं। बस एक इमेज में फिट हो जाने से बचना उन्हीं को है। वैसे अगर इस इमेज में भी उनको अपने सारे स्ट्रगल का इन्वेस्टमेंट मय सूद वापस मिल रहा है तो इसमें भी बुराई नहीं है। याद तो किसी को जॉनी वाकर, महमूद या राजेंद्र नाथ भी रोज नहीं आते।
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मिमी ट्रेलर
- फोटो : स्क्रीन ग्रैब
फिल्म ‘मिमी’ में तारीफ लायक जो काम सबसे ज्यादा किसी ने किया है वह हैं इसके निर्माता दिनेश विजन। वाकई इस इंसान का विजन कमाल का है। हिंदी सिनेमा के अगर बीते 10 साल देखे जाएं तो सबसे ज्यादा प्रयोगात्मक और कामयाब फिल्में दिनेश विजन के प्रोडक्शन हाउस मैडॉक फिल्म्स ने ही बनाई हैं। स्टार किड्स पर उनकी भी नजर रहती है लेकिन सच ये भी है कि लक्ष्मण उतेकर जैसे तकनीशियन उन्हीं की नजर पड़ने से फिल्म निर्देशक बने हैं। ये जज्बा बने रहना चाहिए। पिक्चर देखने का इंतजार रहेगा।
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