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Screen Density In India: सिनेमाघरों की कम संख्या से सरकार चिंतित, लोकसभा चुनाव से पहले शुरू किया ये अभियान

Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Tue, 04 Jul 2023 08:42 AM IST
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Ministry Of Information and broadcasting directs NFDC to find means to increase film screen density in India
एनडीएफसी, पीवीआरी सिनेमा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सिनेमा की सॉफ्ट पॉवर के जरिये जनमानस के बीच अपनी पैठ बनाने की कोशिशें दुनिया भर की सरकारें करती रही हैं। लेकिन, भारत में ये प्रयोग बार बार विफल हो जाने के पीछे की सबसे बड़ी वजह है सिनेमाघरों की कम संख्या। अगर विकसित देशों अमेरिका, ब्रिटेन और चीन से तुलना की जाए तो भारत में सिनेमाघरों की संख्या नगण्य है। विश्व की मजबूत और शीर्षस्थ अर्थव्यवस्था बनने की और अग्रसर भारत में मनोरंजन जगत के विकास की असीमित संभावनाएं हैं लेकिन 10 लाख लोगों पर अभी सिर्फ सात स्क्रीन होने से इस क्षेत्र का अपेक्षित विकास नहीं हो पा रहा है। केंद्र सरकार ने इस बारे में एक योजना शुरू की है। इरादा है कम से कम समय में देश में अधिक से अधिक लोगों तक सिनेमा की सॉफ्ट पावर पहुंचाना।
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एनडीएफसी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अमेरिका के मुकाबले कहीं नहीं
बीते कुछ साल से हिंदी सिनेमा में एक तयशुदा विचारधारा के अनुसार लगातार फिल्में बन रही हैं, लेकिन विश्लेषक मानते हैं कि इनका अपेक्षित फायदा उस स्तर पर संबंधित विचारधारा को पोषित करने में नहीं हो पा रहा है, जिसकी कि इन फिल्मों से उम्मीद की जाती है। सरकारी गणना के मुताबिक अमेरिका में प्रति 10 लाख आबादी पर 125, ब्रिटेन में 68 और चीन में 30 स्क्रीन्स की तुलना में भारत में प्रति 10 लाख आबादी पर सिर्फ सात सिनेमा स्क्रीन्स मौजूद हैं। और, इनमें भी 70 फीसदी स्क्रीन्स सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों में पाए गए। सिनेमाघरों मे रिलीज हुई फिल्मों का कारोबार देश में नई ऊंचाइयां छू सकता है।

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सिनेमाघर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
2022 में किया 102 अरब का कारोबार
बीते साल ही देश में 1500 से ज्यादा फिल्में विभिन्न भारतीय भाषाओं में रिलीज हुईं और इनसे होने वाली कमाई इस दौरान 102 अरब रुपये तक जा पहुंची है। लेकिन, देसी फिल्मों से होने वाली कमाई में देश के छोटे शहरों की भागीदारी अब भी अपेक्षानुरूप नहीं हो सकी है। देश में बीते साल तक केवल 9382 स्क्रीन्स थे और सरकार का मानना है कि इनकी संख्या तुरंत बढ़ाने क जरूरत है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इसी के लिए राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (एनएफडीसी) को निर्देश दिया है कि वह अपने स्रोतों से इस बारे में एक कार्य योजना तैयार करने के मिशन में जुट जाए। सिनेमाघर स्थापित करना और उन्हें बढ़ावा देना हालांकि राज्य का विषय है लेकिन केंद्र सरकार का मानना है कि एनएफडीसी इस बारे में एक कार्य योजना बनाए तो इसे राज्य सरकारों के सहयोग से अमली जामा पहनाया जा सकता है।
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सिनेमाघर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
ठेके पर ढूंढा जाएगा स्क्रीन्स बढ़ाने का फॉर्मूला
राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम ने मंत्रालय का निर्देश मिलने के बाद इस दिशा में काम भी शुरू कर दिया है। काम करने की अपनी चिर परिचित शैली के अनुरूप एनएफडीसी इस काम के लिए भी ठेका देने जा रही है। इस बारे में जारी एक सूचना के मुताबिक एनएफडीसी को ऐसे उद्यमियों, विषय विशेषज्ञों और सलाहकारों की तलाश है जो उसे देश में सिनेमाघरों के स्क्रीन्स बढ़ाने की बाबत ‘ज्ञान’ दे सके। वैसे तो एनएफडीसी इस बारे में सिर्फ स्थापित उद्यमियों को ही अपने साथ लेने पर विचार कर रही हैं, लेकिन इस बाबत जारी सूचना में ये भी कहा गया है कि नवोन्मेषी विचार होने पर वह नए उद्यमियों से भी इस बाबत बात कर सकती है। इरादा यहां ड्राइव इन थियेटर और ओपन एयर थिएटर बनाने का भी है।
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सिनेमाघर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अभी सिर्फ छांटी जाएंगी कंपनियां

अपने बीते कुछ फैसलों को लेकर विवादों में रहे राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम ने इस बार ये सावधानी भी बरती है कि उसने इस सूचना में ये स्पष्ट कर दिया है कि विभिन्न उद्यमियों से मांगे जा रहे ये आवेदन सिर्फ रुचि प्रकटन (एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट) की प्रक्रिया भर है। पहले दौर की प्रक्रिया में सिर्फ इच्छुक लोगों की कंपनियों के नाम छांटे जाएंगे और यदि ये प्रस्ताव रुचिकर हुए तो बाद में राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम अपने मंत्रालय की सलाह के अनुसार इस पर काम आगे बढ़ाएगा।

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