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फकीरों की नकल करते हुए मोहम्मद रफी बन गए बॉलीवुड के दिग्गज गायक, लेते थे सिर्फ 1 रुपए फीस

Mon, 30 Jul 2018 01:01 PM IST
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 30 Jul 2018 01:01 PM IST
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Mohammed Rafi death anniversary 8 unknown facts about his life
Mohammed Rafi
हिंदी सिनेमाजगत में चार दशक से भी ज्यादा समय तक लोगों के दिलों पर कब्जा जमाने वाले मशहूर गायक मुहम्मद रफी की 31 जुलाई को डेथ एनिवर्सरी है। मुहम्मद रफी बॉलीवुड का वह कोहिनूर है जिसकी चमक से आज भी बॉलीवुड की गलियां रौशन हैं। मोहम्मद रफी के गाने आज भी लोगों की जुबां पर आते ही मानों समा सा बन जाता है। वैसे तो मुहम्मद रफी के ज्यादातर गाने सुपरहिट रहे लेकिन उनके गाए कुछ नगमें आज भी दिल की धड़कनों को बढ़ा देते हैं। ये गाने हैं आज मौसम बड़ा बेईमान है, तारीफ करूं क्या उसकी, चाहूंगा मैं तुझे, अभी ना जाओ छोड़कर। तो चलिए आपको फिल्म इंडस्ट्री के महान गायक मुहम्मद रफी से जुड़े कुछ अनसुने किस्से बताते हैं। 
Mohammed Rafi death anniversary 8 unknown facts about his life
Mohammed Rafi
बहुत ही कम लोग इस बात को जानते हैं कि मधुर आवाज के धनी मोहम्मद रफी को प्यार से लोग 'फेकू' कहकर बुलाते थे। 
 
Mohammed Rafi death anniversary 8 unknown facts about his life
Mohammed Rafi
कहा जाता है कि रफी साहब ने अपने गांव में फकीर के गानों की नकल करते-करते गाना गाना सीखा था। मोहम्मद रफी ने अपनी पहली परफॉर्मेंस बतौर गायक 13 साल की उम्र में दी थी। के एल सहगल ने उन्हें लाहौर में एक कंसर्ट में गाने की अनुमति दी थी। 
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Mohammed Rafi
साल 1948 में मुहम्मद रफी ने राजेन्द्र कृष्णन द्वारा लिखा हुआ गीत 'सुन सुनो आए दुनिया वालों बापूजी की अमर कहानी' गाया था। यह गाना देखते ही देखने इतना बड़ा हिट हो गया था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें अपने घर पर यह गाना गाने के लिए निमंत्रण दिया था।
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Mohammed Rafi
मुहम्मद रफी के निधन के दिन मुंबई में तेज बारिश हो रही थी। कहा जाता है कि निधन की अंतिम यात्रा की रिकॉर्डिंग को हिंदी फिल्म में इस्तेमाल भी किया गया है। मुहम्मद रफी की अंतिम यात्रा इतने बड़ी स्तर पर की गई थी कि लोग आज भी याद करते है। उस वक्त करीब 10 हजार लोग यात्रा में शरीक हुए थे।
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