मोहनलाल विश्वनाथन मशहूर भारतीय अभिनेता-निर्माता-निर्देशक, प्लेबैक सिंगर, राइटर, नाटककार, टीवी होस्ट और फिल्म डिस्ट्रीब्यूटर हैं। वह मलयालम सिनेमा का बहुत बड़ा नाम हैं। इन्हें दक्षिण सिनेमा का 'शहंशाह' भी कहा जाता है। अपने अभिनय के दम पर दुनियाभर में पहचान बनाने वाले मोहनलाल का आज जन्मदिन है। बता दें कि मोहनलाल का जन्म 21 मई 1960 को केरल के पठामथिट्टा जिले के एलंथूर में हुआ था। मोहनलाल ने मलयालम के अलावा अन्य भाषाओं जैसे हिंदी, तेलुगु ,कन्नड़, तमिल की फिल्मों में भी अभिनय किया है। दिलचस्प बात यह है कि सिनेमाई दुनिया में दबदबा बनाने वाले मोहनलाल के और भी कई शौक हैं। दरअसल, वह बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। आइए जानते हैं और क्या हुनर हैं उनके पास...
Mohanlal Birthday: एक्टिंग ही नहीं, जादूगरी के भी उस्ताद हैं मोहनलाल, क्या आपने देखे हैं उनके ये हुनर?
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अखाड़े में दिखा चुके हैं दम
स्कूली दिनों से ही मोहनलाल की रुचि कुश्ती में थी। यह उनका पसंदीदा स्पोर्ट्स रहा है। सिनेमा की दुनिया में कदम रखने से पहले मोहनलाल एक पेशेवर रेसलर रह चुके हैं। उन्होंने वर्ष 1977-78 में केरल राज्य कुश्ती चैंपियनशिपी जीती थी। मोहनलाल का चयन दिल्ली में राष्ट्रीय कुश्ती चैम्पियनशिप के लिए भी हो गया था। लेकिन उन्होंने अपनी डेब्यू फिल्म 'मंजिल वरिंन्या पूक्कल' के ऑडिशन के लिए इसे छोड़ दिया था।
ताइक्वांडो में ब्लैक बेल्ड
मोहनलाल को ताइक्वांडो का भी शौक है। कोरिया के द वर्ल्ड ताइक्वांडो हेडक्वार्टर की तरफ से इन्हें 'ब्लैक बेल्ट' से सम्मानित किया जा चुका है। वह पहले दक्षिण अभिनेता हैं, जिन्हें यह सम्मान मिला हुआ है।
एस्केप आर्ट की ट्रेनिंग ली है
वर्ष 2008 में मोहनलाल ने जादूगर गोपीनाथ मुथुकड से 18 महीने तक एस्केप आर्टिस्ट बनने का प्रशिक्षण लिया। एक बार वह तिरुवनंतपुरम में 'बर्निंग इल्यूशन' नाम का स्टंट करने वाले थे। मगर प्रशंसकों के भारी विरोध के बाद उन्हें यह टालना पड़ा, क्योंकि यह काफी खतरनाक था। इस इवेंट का आयोजन केरला पुलिस, स्टेट टूरिज्म डिपार्टमेंट और केरला स्टेट यूथ वेलफेयर बोर्ड ने कराया था।
सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल
वर्ष 2009 में भारतीय प्रादेशिक सेना द्वारा उन्हें मानद लेफ्टिनेंट कर्नल का पद दिया गया। बता दें कि मोहनलाल ने 'कीर्ति चक्र' और 'कुरुक्षेत्र' जैसी फिल्में करने के बाद आर्मी में दिलचस्पी ली। इसके बाद वह अपनी इच्छा से टेरिटोरियल आर्मी में शामिल हुए। दिलचस्प बात यह है कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में पहली बार किसी अभिनेता को यह सम्मान मिला। मोहनलाल को संकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय का डायरेक्टर भी चुना गया था। मोहनलाल चार बार राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता रहे हैं। इसके अलावा दो बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार उन्हें मिल चुका है। 2001 में भारत सरकार ने उन्हें भारतीय सिनेमा में योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया।