दिग्गज अभिनेता शरत सक्सेना अपने करियर में करीब 250 फिल्मों में कई यादगार भूमिकाएं निभा चुके हैं, लेकिन आज तक उन्हें कोई भी अवॉर्ड नहीं मिला। शरत सक्सेना को पहले पहल फिल्म ‘बॉक्सर’ से लोगों ने पहचानना शुरू किया। शरत सक्सेना की अदाकारी के कायल प्राण और अशोक कुमार भी रहे हैं और इन दोनों से मिली तारीफ को ही शरत अपने जीवन का सबसे बड़ा पुरस्कार मानते हैं। अपने बीते दिनों की याद उन्होंने हाल ही में राजश्री चैनल को दिए एक इंटरव्यू में की है, प्रस्तुत हैं उसी के कुछ अंश।
Monday Flashback: जब शरत सक्सेना के पास आया प्राण का फोन, पुरस्कारों के सवाल का जवाब पढ़ आखें भर आएंगी
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बिना पहचान के इंडस्ट्री में नहीं मिलता काम
मुझे सबसे पहला मौका मिला सलीम-जावेद साहब की वजह से मिला। मैं हर हफ्ते उसने मिलता था। एक दिन सलीम साहब ने मुझसे पूछा कि तुम करते क्या हो? मैंने कहा कि फिल्मों में संघर्ष कर रहा हूं। जावेद साहब भी पास में बैठे थे, सलीम साहब ने जावेद साहब से कहा कि इसे धन्ना का रोल दे दें क्या? जावेद साहब ने अप्रूव कर दिया और मुझे यश चोपड़ा के ऑफिस में मिलने के लिए भेज दिया गया। यश चोपड़ा साहब से मिला और मुझे 'काला पत्थर' में धन्ना की भूमिका मिली। 'काला पत्थर' के समय राजश्री की फिल्म 'तराना' भी रिलीज हुई। इन दो फिल्मों से लोग मुझे थोड़ा बहुत जानने लगे।
एच एस रवैल ने की मदद
सलीम-जावेद साहब के बाद निर्देशक एच एस रवैल (राहुल रवैल के पिता) ने भी मेरी मदद की। एच एस रवैल ने अपनी दो फिल्मों में काम दिया, जिसमें से एक फिल्म 'लैला मजनू' में मुझे 24 साल की उम्र में 80 साल का बुड्ढा बनाया गया। रवैल साहब ने मुझे पांच फिल्म निर्माताओं से और मिलवाया। 'काला पत्थर' के बाद सलीम- जावेद साहब ने तीन-चार और फिल्में दिलाईं। पहली बार लंदन भी फिल्म 'दोस्ताना' की शूटिंग के लिए गया था। इस फिल्म के निर्माता यश जौहर की अगली फिल्म 'अग्निपथ' के लिए मॉरीशस भी गए थे, मेरी जितनी भी विदेश की ट्रिप हुई वह फिल्मों की वजह से ही हुईं।
आमिर ने दिया मेरे नाम का सुझाव
फिल्म 'गुलाम' मुझे आमिर खान की वजह से मिली। पहली बार तो ये फिल्म शुरू होने के बाद डिब्बा बंद हो गई थी। फिर तीन साल के बाद जब फिल्म दोबारा शुरू हुई तो इस फिल्म की रिलीज के बाद प्रोड्यूसर ने अपने घर में एक पार्टी रखी। वहां आमिर खान भी आए थे। मैंने उनसे पूछा कि आपने मेरे नाम का सुझाव क्यों दिया? आमिर खान ने बताया कि उन्होंने मुझे छोटे-छोटे रोल में देखा था। काम उन्हें अच्छा लगा तो सुझाव दे दिया। यह फिल्म हिट रही, लेकिन उसी समय गुलशन कुमार की हत्या हो गई। नई फिल्में बन नहीं रही थी लिहाजा दो तीन साल तक कोई काम नहीं मिला।
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साउथ में चिरंजीवी ने मदद की
एन एन सिप्पी की फिल्म 'आज का गुंडाराज' मैं उन दिनों कर रहा था। फिल्म में काम करते समय चिरंजीवी से अच्छी पहचान हो गई। इसके बाद वह जो भी फिल्में करते मुझे विलेन की भूमिका दिलवाते थे। इस तरह से मेरी 10-15 फिल्में तेलुगू में हो गईं। प्रियदर्शन साहब की 5-6 मलयालम फिल्में की। 'जीवन्ते जीवन' मैंने मोहन लाल के साथ की। एक दिन प्रियदर्शन साहब अचानक मुझसे मिलने मेरे घर आ गए और मुझे एक मलयालम फिल्म 'आर्यन' में काम करने का मौका दिया जिसमें मोहन लाल हीरो और राम्या कृष्णन हीरोइन थी । यह फिल्म सुपरहिट हुई फिर इसके तीन तमिल, तेलुगु और कन्नड और रीमेक में भी मैंने काम किया।
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