सुशांत सिंह राजपूत के कथित आत्महत्या का मामला हर दिन काफी जटिल होता जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट रिया की केस ट्रांसफर याचिका पर भी गुरुवार को फैसला सुनाएगा। वहीं दूसरी तरफ प्रवर्तन निदेशालय की इस मामले पर जांच जारी है। हालांकि इन सब से परे मुंबई में रहने वाले एक शख्स को अचानक गालियों और धमकी भरे फोन आने लगे। अब आप सोच रहे होंगे कि इस बात का सुशांत और रिया केस से क्या लेना देना, तो चलिए बताते हैं...
रिया चक्रवर्ती का नंबर समझ लोग देने लगे गालियां, युवक ने पहले तो किया 150 नंबरों को ब्लॉक फिर पुलिस में की शिकायत
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दरअसल 32 साल के एक युवक को अचानक गालियों और धमकी भरे फोन आने लगे। थक हारकर उसने करीब 150 नंबरों को ब्लॉक किया। लेकिन ये जो धमकी भरे कॉल रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। दरअसल ये सभी कॉल उस युवक के लिए नहीं बल्कि रिया चक्रवर्ती के लिए थे। बकौल शख्स, उसके और रिया चक्रवर्ती के मोबाइल नंबर का सिर्फ एक अंक अलग है। सुशांत सिंह राजपूत के कॉल रिकॉर्ड दिखाते समय रिया का नंबर भी दिखाया था।
ऐसे में लोगों ने युवक के नंबर को गलती से रिया चक्रवर्ती का नंबर समझ लिया और फोन कर धमकी देने लगे। युवक ने बताया उन्होंने इन कॉल्स और मेसेजेस को पहले तो इग्नोर किया लेकिन अगले तीन दिनों में स्थिति और ज्यादा खराब हो गई। मामला जब पुलिस तक पहुंचा तो पुलिस ने उन्हें दूसरा नंबर इस्तेमाल करने की सलाह दी।
बता दें सुशांत सिंह राजपूत के परिवार ने अपना बयान जारी किया है। परिवार का आरोप है कि उन्हें धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने नौ पेज की एक चिट्ठी जारी की और कहा कि कई बेबुनियाद आरोपों के साथ ही चरित्र पर भी हमला हो रहा है। चिट्ठी की शुरुआत फिराक जलालपुरी के शेर से की गई है। चिट्ठी में लिखा है- 'तू इधर-उधर की ना बात कर ये बता कि काफिला क्यों लुटा, मुझे रहजनों से गिला नहीं तेरी रहबरी का सवाल है।' इसके आगे लिखा है कि 'अखबार पर अपना नाम चमकाने की गरज से कई फर्जी दोस्त, भाई, मामा बन अपनी अपनी हांक रहे हैं। ऐसे में बताना जरूरी हो गया है कि आखिर ‘सुशांत का परिवार’ होने का मतलब क्या है? सुशांत के माता पिता कमाकर खाने वाले लोग थे। उनके हंसते खेलते पांच बच्चे थे। उनकी परवरिश ठीक हो इसलिए नब्बे के दशक में गांव से शहर आ गए। रोटी कमाने और बच्चों को पढ़ाने में जुट गए। एक आम भारतीय माता पिता की तरह उन्होंने मुश्किलें खुद झेलीं। बच्चों को किसी बात की कमी नहीं होने दी।'
सुशांत के परिवार ने नाम लिए बगैर कुछ लोगों पर निशाना साधा और कहा, 'एक नामी आदमी को बदमाशों और लालचियों का झुंड घेर लेता है। इलाके के रखवाले को कहा जाता है कि बचाने में मदद करें। चार महीने बाद सुशांत के परिवार का भय सही साबित होता है।... सुशांत के परिवार को कहते हैं कि तुम्हारा बच्चा पागल था। हमसे कहा जाता है कि ऐसा करो पांच दस मोटे मोटे लालों का नाम लिखवा दो, हम उसका भूत बना देंगे। सुशांत के परिवार को शोक मनाने का भी समय नहीं मिलता। हत्यारों को ढूंढने के बजाय रखवाले उसके मृत शरीर की फोटो प्रदर्शनी लगाने लगते हैं। उनकी लापरवाही से सुशांत मरा। इतने से भी मन नहीं भरा तो मानसिक बीमारी की कहानी चला उसके चरित्र को मारने में जुट जाते हैं।'

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