माता रानी के जागरण से लोगों को मंत्रमुग्ध कर देने वाले भजन सम्राट नरेंद्र चंचल आज हमेशा हमेशा के लिए पंचतत्व में विलीन हो गए। बता दें कि 22 जनवरी को उनका दिल्ली के अपोलो अस्पताल में निधन हो गया था। वह 80 साल के थे। आज उनका अंतिम संस्कार दक्षिण दिल्ली के लोधी कॉलोनी स्थित शवदाह गृह में किया गया। नरेंद्र चंचल पिछले तीन महीने से बीमार थे और उनका इलाज चल रहा था।अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, शुक्रवार दोपहर करीब 12.30 पर उन्होंने अंतिम सांस ली।
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नरेंद्र चंचल
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चलो बुलावा आया है माता ने बुलाया है... वर्ष 1986 में 'अवतार' फिल्म में गाए गए इस भेंट ने नरेंद्र चंचल को विशेष पहचान दिलाई थी और वह भजन सम्राट के नाम से विख्यात हुए। मां वैष्णो के दरबार से नरेंद्र चंचल का विशेष लगाव था।उन्होंने 1971 में पहली बार मां वैष्णो देवी के दरबार में भेंटें गाई थीं। उसके बाद लगातार हर वर्ष 31 दिसंबर को धर्मनगरी में जागरण का आयोजन किया जाता है। नरेंद्र चंचल भी मां की भेटों से भक्तों को निहाल करते रहे। इसके लिए वह कोई भी फीस नहीं लेते थे।
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नरेंद्र चंचल ने बचपन से ही अपनी मां कैलाशवती को मातारानी के भजन गाते हुए सुना। इसी वजह से उनकी रुचि भी गायकी में बढ़ी। उनके शरारती स्वभाव और चंचलता की वजह से उनके शिक्षक उन्हें 'चंचल' कहकर बुलाते थे। बाद में नरेंद्र ने अपने नाम के साथ हमेशा के लिए चंचल जोड़ लिया था।नरेंद्र चंचल ने भजन के साथ-साथ बॉलीवुड में भी कई गाने गाए थे। उनका भजन तुने मुझे बुलाया शेरावालिये.....आज भी लोगों के दिल दिमाग में बसा हुआ है।
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नरेंद्र चंचल विशेष रुप से माता के भजन गाते थे जिसके कारण लोग उन्हें माता रानी का लाडला भी बुलाते थे। बता दें कि ब्रेन में क्लोटिंग होने के चलते नरेंद्र चंचल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था जहां लंबे इलाज के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका। इससे पहले उन्हें सर गंगाराम अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन वहां भी उन्हें कोई आराम नहीं मिला था।
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भजन सम्राट नरेंद्र चंचल ने अपना सारा जीवन मां के भजनों में ही बिताया था और उनके भजनों का गुणगान कर उन्होने ख्याति पाई थी। अब जीवन लीला समाप्त होने के बाद वो आखिरकार माता रानी के पास ही चले गए। उनके निधन ने पूरे देश को गहरा दुख दिया है। माता रानी का लाडले कहे जाने वाले नरेंद्र चंचल भले ही हमेशा के लिए इस दुनिया से दूर चले गए हों, लेकिन उनके गाए भजन और गीत हमेशा लोगों की यादों में अमर रहेंगे।