भारतीय सिनेमा की अनमोल धरोहरों के चलते मुंबई आने वाले सिने प्रेमियों की पसंदीदा जगह रहे राष्ट्रीय फिल्म संग्रहालय (नेशनल म्यूजियम ऑफ इंडियन सिनेमा) को लोगों के लिए फिर से खोल दिया गया है। संग्रहालय के दोबारा खोले जाने के मौके पर द विंटेज एंड क्लासिक कार क्लब ने संग्रहालय परिसर में विंटेज कारों की एक भव्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस मौके पर फिल्म 'बच्चन पांडे' के सितारे अक्षय कुमार और कृति सैनन यहां खास तौर से मौजूद रहे। करीब दो साल बाद आम जनता के लिए संग्रहालय को फिर से खोले जाने पर दोनों सितारों ने खुशी जताई और उम्मीद की कि इसके साथ ही अब मुंबई में सिनेमा के इस सबसे बड़े आकर्षणों में से एक में दुनिया भर के लोगों का आना जाना फिर से शुरू हो जाएगा। संग्रहालय मंगलवार से रविवार तक रोजाना सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे आम जनता के लिए खुला रहेगा।
NMIC: दो साल बाद फिर खुला राष्ट्रीय फिल्म संग्रहालय, अक्षय और कृति सैनन ने सिनेप्रेमियों को दिया ये खास न्यौता
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राष्ट्रीय फिल्म संग्रहालय में सिनेमा से जुड़ी यादों का बेहतरीन संकलन है। शिवाजी गणेशन द्वारा फिल्म 'वीरा पंड्या कट्टाबोम्मन' में धारण किया गया सुरक्षा कवच, फिल्म 'आदिमै पेन' में एम जी रामचंद्रन का पहना गया लाल रंग का कोट इसकी अनमोल धरोहरों में शामिल है। इसके अलावा यहां पर तमाम ऐतिहासिक व लोकप्रिय फिल्मों के पोस्टर, उनकी प्रतिलिपियां, पोस्टर, प्रचार सामग्रियां, गाने, ट्रेलर, सिनेमा से जुड़ी पुरानी पत्रिकाओं के साथ फ़िल्म निर्माण व वितरण से जुड़े आंकड़े भी उपलब्ध हैं।
इस मौके पर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव नीरजा शेखर ने बताया कि राष्ट्रीय फिल्म संग्रहालय बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसका उद्घाटन 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। कोरोना के चलते लंबे समय तक ये बंद रहा और अब इसे फिर से खोला जा रहा है। संग्रहालय में देश भर के सिनेमा और सिनेमा की हस्तियों से जुड़ी कई वस्तुएं संग्रहित हैं और आने वाले समय में इसे और संवर्धित करने का सिलसिला भी जारी रहेगा।
इस खास मौके पर विशेष रूप से उपस्थित रहे अभिनेता अक्षय कुमार ने संग्रहालय के फिर से खुलने पर खुशी जाई और कहा कि यहां संग्रहीत तमाम फिल्में उनकी परवरिश का हिस्सा रही हैं। उन्होंने अपील की कि हर सिनेप्रेमी को यहां जरूर आना चाहिए क्योंकि हर फिल्मकार और फिल्मों को पसंद करने वाले हर व्यक्ति के लिए यह जगह किसी मंदिर से कम नहीं है। वहीं, यहां आकर अभिनेत्री कृति सैनन भी खासी उत्साहित दिखीं। कृति कहती हैं, "मैं इस संग्रहालय में आकर बेहद प्रभावित हुई। इसे जिस तरह से तैयार किया गया है, वह बहुत ही प्रशंसनीय है। यहीं आकर मुझे पता चला कि 1940 दशक में दक्षिण भारत में बनी सबसे महंगी फिल्मों में से एक 'चंद्रलेखा' पहली फिल्म थी जिसने पहली बार अखिल भारतीय स्तर पर अपना रुतबा दिखाया और दक्षिण भारत के फिल्म निर्माताओं को उत्तर भारत के दर्शकों तक पहुंचने का क्रम शुरू किया।"
राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम के निदेशक रविंद्र भाकर ने बताया कि आने वाले दिनों में नेशनल म्यूजियम ऑफ इंडियन सिनेमा (एनएमआईसी) एक विशिष्ट संग्रहालय के रूप में अपनी एक अलग पहचान स्थापित करेगा। एशिया के इस सर्वश्रेष्ठ संग्रहालय का निर्माण दुनिया भर के प्रतिष्ठित संग्रहालयों की गुणवत्ता व गौरव को ध्यान में रखकर किया गया है। सिनेमा से जुड़ी ऐतिहासिक व दुर्लभ किस्म की वस्तुएं इसे एक अनूठे संग्रहालय के तौर पर स्थापित करती हैं। इस संग्रहालय की बनावट भी अपने आप में अद्भुत व दर्शनीय है।