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फिल्म 'पाकीजा' के संगीत में नौशाद का था खास योगदान, इस वजह से छिपानी पड़ी संगीतकार की पहचान

Tue, 25 Dec 2018 10:50 AM IST
अपूर्वा राय एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: अपूर्वा राय Updated Tue, 25 Dec 2018 10:50 AM IST
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Naushad ali birthday know some lesser known facts
Naushad Ali
नौशाद अली को कौन नहीं जानता। हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध संगीतकार रह चुके नौशाद अली का जन्म 25 दिसंबर, 1919 को हुआ। उन्होंने केवल 67 फिल्मों में अपनी संगीत दिया था पर फिर भी वे आज भी याद किए जाते हैं। ये सब उनते संगीत और कौशल का कमाल है। लखनऊ में पैदा हुए नौशाद साहब का संगीत सफर चुनौतियों से भरा रहा।
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naushad - फोटो : self

नौशाद अली को बचपन से ही संगीत में रुचि थी। बचपन में नौशाद क्लब में जाकर साइलेंट फिल्म देखा करते थे और नोट्स तैयार किया करते थे। इतना ही नहीं नौशाद अली बचपन में एक म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट्स की दुकान पर सिर्फ इसलिए काम करते थे ताकि उन्हें हारमोनियम बजाने का मौका मिले।

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नौशाद और रफी
नौशाद अली ने पहली बार 1940 में आई फिल्म 'प्रेम नगर' के गानों को कम्पोज किया था। इन गानों को काफी पसंद किया गया था। आपको जानकर हैरानी होगी कि नौशाद अली की शादी होने तक भी उनके घर वालों को नहीं पता था कि वो संगीतकार हैं। जब नौशाद की शादी हुई थी, उस वक्त शादी में उनके ही कंपोज किए गए एक गाने की धुन बजाई जा रही थी लेकिन नौशाद तब भी नहीं बता पाए कि ये गाना उन्होंने ही कंपोज किया है। इतना ही नहीं नौशाद के ससुराल वालों को भी ये बताया गया कि वह पेशे से एक टेलर हैंॉ क्योंकि उस दौर में संगीत से जुड़े काम खराब माना जाता था।
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नौशाद - फोटो : SELF
अद्भुत फिल्म ‘पाकीजा’ के संगीत में भी नौशाद अली का योगदान था। दरअसल गुलाम मोहम्मद साहब के निधन के बाद नौशाद ने ही उस फिल्म का संगीत पूरा किया था। उस बचे हुए संगीत पक्ष में उन्होंने हिंदुस्तानी लोकसंगीत का जमकर इस्तेमाल किया था। जो बैकग्राउंड में बजते थे।
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नौशाद और लता - फोटो : lata calander
हिंदी सिनेमा के सौ साल के इतिहास में अगर शीर्ष की पांच फ़िल्में चुनी जायें तो 'मुगल-ए-आजम’ का नाम सबसे ऊपर लिखा जाएगा। इस फिल्म में संगीत नौशाद ने दिया था। संगीतकार नौशाद इस फिल्म के लिए बड़े गुलाम अली साहब की आवाज चाहते थे। लेकिन, गुलाम अली साहब ने ये कहकर गाने से मना कर दिया कि वो फ़िल्मों के लिए नहीं गाते। क्या आप जानते हैं गुलाम साहब को इस फिल्म के गाने के लिए 25000 रुपये दिए गए थे। बता दें कि उस दौर में लता मंगेशकर और रफी जैसे गायकों को एक गाने के लिए 300 से 400 रुपये ही मिलते थे।
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