बॉलीवुड के इंस्पिरेशनल एक्टर कहे जाने वाले नवाजुद्दीन सिद्दीकी का आज जन्मदिन है। 19 मई, 1974 को जन्मे नवाजुद्दीन एक उम्दा एक्टर हैं। नवाज अपने किरदार को परफेक्ट बनाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करते हैं। आज जिस नवाज की मिसाल दी जाती है दरअसल वहां तक पहुंचने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की है। एक वक्त ऐसा था जब उन्हें दो वक्त का खाना भी ठीक से नसीब नहीं होता था।
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Nawazuddin Siddiqui
- फोटो : social media
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले से 40 किलोमीटर दूर बुढ़ाना नामक गांव में नवाजुद्दीन का जन्म हुआ। उनके पिता किसान हैं। नवाज अपने बचपन को याद करते हुए कहते हैं उनको जब फिल्में देखना होता था तो ईद या दिवाली के मौके पर पैसा जमा करके वह अपने गांव से शहर में जाकर फिल्में देखते थे।
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Nawazuddin Siddiqui
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एक इंटरव्यू में नवाज ने बताया था- मुंबई में स्ट्रगल का समय ऐसा था कि वह एक समय खाना खाते तो दूसरे समय के लाले पड़ जाते। उन्होंने कई बार हार मानने की सोची और सब कुछ छोड़कर वापस गांव जाने का सोचा लेकिन फिर याद आता कि वह गांव क्या मुंह लेकर जाएंगे। नवाज इस डर से घर वापस नहीं जाते क्योंकि गांव में सब मजाक उड़ाते कि 'बड़ा हीरो बनने गया था'।
साल 2000 में नवाज मुंबई इस उम्मीद में आए कि उन्हे वहां जल्द ही अच्छा काम मिल जाएगा। लेकिन ऐसा न हुआ। टीवी सीरियलों में भी उनको काम नहीं मिलता था। लगभग 5 साल तक नवाज को मुंबई में संघर्ष करना पड़ा। नवाज बताते हैं मैं साधारण-सा दिखने वाला व्यक्ति उन लोगों को हीरो मटिरियल की तलाश रहती थी। इसलिए मुझे काम नहीं मिल पाता था।
इसी बीच नवाज को अनुराग कश्यप की फिल्म ब्लैक फ़्राईडे में काम करने का मौका मिला। उसके बाद फिराक, न्यूयॉर्क और देव डी जैसी फिल्मों में काम मिला। सुजोय घोष की ‘कहानी’ में उनका काम सराहा गया। 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' तक आते आते नवाज स्टार बन चुके थे। चाहे बंदूकबाज में बाबू मोशाय का किरदार हो या फिर मंटो या बाला साहब ठाकरे सभी किरदारों से नवाज ने फैंस का दिल जीता है।