पद्मा खन्ना का नाम हिंदी सिनेमा के शौकीनों के दिमाग में एक अलग ही घंटी बजाता है। उनके उत्तेजक नृत्य देखने किसी जमाने में लोगों की टिकट खिड़की पर लाइन लगी रहती थी। दूरदर्शन आया तो रामानंद सागर ने अपने धारावाहिक 'रामायण' में उन्हें कैकेयी की भूमिका दी। ये छवियां सिनेमा ने उस अदाकारा की बनाईं जिसने भोजपुरी फिल्मों में नंबर वन हीरोइन बनकर राज किया। 10 मार्च 1949 को बनारस में जन्मी पद्मा खन्ना के जन्मदिन पर आइए जानते हैं, उनके जीवन से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से..
Padma Khanna: काशी की बिटिया पर यूं लगा कैबरे डांसर का ठप्पा, रामानंद सागर ने ‘कैकेयी’ के लिए इस तरह किया राजी
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पद्मा खन्ना ने बिरजू महाराज से कथक डांस सीखा। वह सात साल की थीं तभी से उन्होंने पंडित बिरजू महाराज से कथक की ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी थी। 12 साल की उम्र से ही वह स्टेज पर परफॉर्म देने लगी थीं। एक दिन उन पर सिनेमा की बेहतरीन अदाकारा वैजयंती माला की नजर पड़ी। वैजयंती माला खुद भी डांस में अव्वल रही हैं। उन्हें पद्मा खन्ना का डांस इतना पसंद आया कि उन्होंने पद्मा खन्ना को फिल्मों अपनी किस्मत आजमाने की सलाह दी।
भोजपुरी सिनेमा से हुई शुरुआत
भोजपुरी सिनेमा की पहली फिल्म 'गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो' से पद्मा खन्ना ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत साल 1963 में की। जब यह फिल्म रिलीज हुई, उस समय पद्मा खन्ना की उम्र 14 साल की थी। इस फिल्म के बाद पद्मा खन्ना ने 'बिदेसिया', 'बलम परदेसिया', 'धरती मैया', 'दगाबाज बलमा', 'बहुरिया', 'माई', 'भैया दूज', 'हे तुलसी मैया' जैसी कई भोजपुरी फिल्मों में यादगार किरदार निभाए हैं। उन्होंने साल 2004 में एक भोजपुरी फिल्म 'नाहिर हटल जाय' का निर्देशन भी किया।
और, फिर 'हुस्न के लाखों रंग'
हिंदी फिल्मों में पद्मा खन्ना ने अपनी शुरुआत साल 1966 में रिलीज फिल्म फिल्म 'बीवी और मकान' में एक छोटी सी भूमिका से की। लेकिन, देव आनंद की फिल्म 'जॉनी मेरा नाम' के एक गाने ने उन्हें रातोंरात मशहूर कर दिया। इस फिल्म में पद्मा खन्ना ने कैबरे डांसर की भूमिका निभाई और प्रेमनाथ के साथ उन पर फिल्माया गया गीत 'हुस्न के लाखों रंग' सुपरहिट हो गया। इस फिल्म के बाद वह कई फिल्मों में कैबरे डांसर की भूमिका में नजर आई। यश चोपड़ा की फिल्म 'दाग' के गाने 'नी मैं यार मनाना नी', 'सुल्ताना डाकू' के मुजरा 'भोर होते बलम चले जाएंगे' और फिल्म 'चिंगारी' के गीत 'अरे मेरे यार मुझे थाम' उनके दूसरे सुपरहिट गाने हैं।
पद्मा खन्ना जिस समय भोजपुरी की नंबर वन हीरोइन थीं, उसी समय निर्माता, निर्देशक और अभिनेता देव आनंद की नजर उन पर पड़ी। अपने भाई विजय आनंद के निर्देशन में बनी फिल्म 'जॉनी मेरा नाम' में देव आनंद की सिफारिश पर ही उन्हें मौका मिला। और, इस फिल्म ने पद्मा खन्ना को खूब लोकप्रियता दिलाई। हालांकि, पद्मा खन्ना लंबे समय तक इस बात के लिए खुद को कोसती रहीं कि उन्होंने ये फिल्म की ही क्यों? फिल्म में आशा भोसले का गाया गाना 'हुस्न के लाखों रंग' को अश्लील गीत माना गया और पद्मा खन्ना का लुक भी बहुत बोल्ड था, इस फिल्म के बाद उन्हें इसी तरह की भूमिकाएं ऑफर होने लगीं।