बॉलीवुड की उभरती सिंगर पलक मुछाल अपनी सुरीली आवाज के लिए तो जानी ही जाती हैं। इसके साथ ही उनको अपने चैरिटी वर्क के लिए भी जाना जाता है। आज 30 मार्च को पलक मुछाल अपना जन्मदिन सेलिब्रेट कर रही हैं, ऐसे में उन्होंने अमर उजाला से खास इंटरव्यू में अपने करियर को लेकर बात की। इसके अलावा पलक हृदय रोग से जूझ रहे बच्चों की मदद के लिए जो मिशन चलाती हैं, उसके बारे में भी उन्होंने बहुत कुछ बताया और साथ ही जो बच्चे म्यूजिक के क्षेत्र में अपना करियर बनाने जा रहे हैं, उन्हें भी आगे बढ़ने के लिए खास सलाह दी।
Exclusive: गायकी से ही नहीं अपने कामों की वजह से भी मिसाल हैं पलक मुछाल, हृदय रोग से जूझ रहे बच्चों का इलाज करवाती हैं इलाज
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सवाल-आपके के लिए सही मायने में स्टारडम क्या है?
आज भी मेरी जिंदगी का जो मकसद है वह बहुत अलग है मुझे लगता है कि स्टारडम कहें या अगर कहें की बहुत सारे लोगें का प्यार मुझे मिलता है तो उसके पीछे बहुत बड़ा रीजन है, एक मकसद है, जो हमेशा से ही मेरे साथ चलता आ रहा है। बहुत सारे लोग बचपन में शोहरत कमा लेते हैं और बड़े होकर उसे कायम नहीं रख पाते हैं, मुझे ऐसा लगता है कि मेरा हमेशा से ही गोल था मैं बहुत छोटी थी तभी से कहती थी कि मेरी जिंदगी का मकसद यही है कि मैं जब तक गाती रहूं, मैं उन बच्चों के लिए गाती रहूं जिनके लिए मैं मिशन चलाती हूं। वह मिशन में जारी रख पाई इतने सालों तक इस बात की मुझे खुशी है। 2376 सर्जरी हो चुकी हैं हार्ट पेशेंट्स की। मेरे एक कॉन्सर्ट सी 12 से 13 बच्चों की जान बच जाती है तो उस सक्सेस को मैं एकनॉलेज करती हूं। उन दुआओं का साथ होना मेरे लिए सही मायने में स्टारडम है।
सवाल-कार्डियोलॉजी से आपका जुड़ाव कैसे है और कार्डियक से जुड़े बच्चों के लिए सब करना. ये आपके जीवन में कैसे आया?
जब मैं बहुत छोटी थी जब मैंने गाना शुरू किया तब से मेरे अंदर ये भावना थी कि किसी के लिए कुछ कर पाऊं, क्योंकि मैं खुद एक मध्यम वर्गीय परिवार से बिलॉन्ग करती हूं। तो हमेशा से ही मुझे उस जरिए की तलाश थी। उसी वक्त मुझे एहसास हुआ कि भगवान की बहुत बड़ी देन है मेरी आवाज़, मेरा संगीत, सबसे पहले मैंने कारगिल के सोल्जर्स के लिए दुकान-दुकान जाकर पैसे इकट्ठे किए। उसी को देखकर हमारे पास लोकेश नाम के बच्चे के पेरेंट्स हमारे पास आए और उन्होंने मेरे पेरेंट्स से कहा कि क्या आपकी बच्ची हमारे बच्चे की मदद भी कर सकती है। तो इंदौर के राजवाड़ा पर एक छोटा सा मंच बनाकर मैंने और भाई ने गाना शुरू किया। उस दौरान एक ठेले वाले अंकल ने अपनी तांबे की अंगूठी भी मेरे डोनेशन बॉक्स में डाली थी। तो बस मुझे ऐसा लगा कि अगर आप किसी अच्छे मकसद के लिए कुछ करते हैं तो इन्टेशंन होना जरुरी होता है। शुरुआत में सिर्फ हार्ट पेशेंट ने ही अप्रोच किया तो यही मिशन बन गया। पलक ने बात करते हुए बताया कि मैं कार्डियक सर्जन इसलिए बनना चाहती थी क्योंकि जब मैं छोटी थी तभी से डॉक्टर अंकल मुझे ऑपरेशन थिएटर में आने की इजाजत देते हैं और वह मुझे समझाते थे कि ऐसे सर्जरी होती है, मैंने एक धड़कते हुए दिल को अपने हाथों में लिया है। इसलिए मेरी इस सब्जेक्ट में रुचि बन गई थी।
हां पहले से मेरा मिशन विस्तृत हुआ है। पहले जहां दो से तीन बच्चों की मदद हो पाती थी, अब 12 से 13 बच्चों की मदद हो जाती है। मैं ज्यादा बच्चों की मदद कर पा रही हूं और अब एक हॉस्पिटल खोलने का भी इरादा है जिसका काम अभी शुरू भी हो गया है। जहां पर बच्चों का इलाज होगा। बहुत बड़े-बड़े प्लान हैं उम्मीद करती हूं कि जैसे अब तक आपकी दुआएं साथ रही हैं आगे भी रहेंगी।
सवाल-बॉलीवुड में सिंगर्स में आपका आइडियल कौन रहा?
मेरी आदर्श हमेशा से ही लता जी रही हैं, मैंने बचपन से ही उन्हें पूजा है और मां सरस्वती का साक्षात रूप हैं वह। तो उनके गाने सुनकर मैंने सबसे ज्यादा सीखा।
आपकी कभी मुलाकात हुई लता जी से...
इस पर पलक बताती हैं कि हां जी मैं जब बहुत छोटी थी तब उनसे मिली थी। इसके बाद उन्होंने लता जी का गाना 'अजी रूठकर यूं कहां जाइएगा' भी सुनाया।

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