गैंग्स ऑफ वासेपुर की नगमा और फुकरे की भोली पंजाबन ऋचा चड्ढा अब कबड्डी खिलाड़ी के तौर पर 'पंगा' लेती हुईं नजर आएंगी। शुक्रवार को रिलीज हो रही फिल्म पंगा में वह कंगना रनौत के समानांतर मुख्य किरदार में हैं।
अमर उजाला से EXCLUSIVE मुलाकात में बोलीं ऋचा चड्ढा, गैंग्स ऑफ वासेपुर करना करियर की सबसे बड़ी गलती
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अपनी खुद की कसौटी पर आप कितनी सफल हैं?
मेरे अनुसार जिंदगी में सफलता वह होती है जब आप अपनी शर्तों पर अपना पंसदीदा काम करते हैं। मैं वहां धीरे धीरे पहुंच रही हूं। मैं अभी तक अपनी सफलता से संतुष्ट नहीं हूं। इंडस्ट्री ने मेरी शख्सियत का सिर्फ एक ही रूप देखा है लेकिन मेरे पास और भी बहुत कुछ है। इसलिए हर साल मैं कुछ नया करने की कोशिश करती हूं।
कंगना रनौत के साथ फिल्म पंगा में तालमेल कैसा रहा?
इस पूरी फिल्म के दौरान मैं बहुत ही प्रोफेशनल रही हूं। मैंने कोशिश की है कि मैं चुपचाप अपना काम पूरा कर लूं। कंगना से काम करने की बात हैं तो यह जरूरी नहीं है कि हर फिल्म में हर कलाकार के साथ हमारी बहुत अच्छी दोस्ती हो जाए। लेकिन हमारी बीच कोई भी अनबन नहीं रही।
फिल्म शकीला आपके करियर के लिए कितनी खास है?
यह मेरे करियर की बहुत ही खास फिल्म है इस फिल्म में मैं एक एडल्ट स्टार के तौर पर नजर आने वाली हूं जिसे कभी इज्जत नहीं मिली लेकिन वह बहुत ही हिम्मती और निडर है। इसके अलावा निर्देशक अनुभव सिन्हा की 'अभी तो पार्टी शुरू हुई है' है। यह फिल्म लंबे समय से अटकी पड़ी हुई है। सुभाष घई के निर्देशिन में बन रही फिल्म 'मैडम चीफ मिनिस्टर' से जुड़ी घोषणा भी इस महीने की जा सकती है।
सीएए, एनआरसी आदि मुद्दों पर आपके तेवरों का अर्थ क्या है?
मेरे अनुसार सरकार की नीयत अच्छी है। वह देश की बेहतरी चाहती है। वह अर्थव्यवस्था को अच्छा करना चाहती है। मेरा यही मानना है कि जब हमारी अर्थव्यवस्था और किसानों का हाल बेहाल तो इस सूरत में हम दूसरे पचड़े में क्यों पड़े जैसे नोटबंदी। सीएए या एनआरसी से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। मैं आवाज अपनी नौकरानी के लिए उठा रही हूं क्योंकि जब मैं उससे पूछती हूं कि तुम्हारे पास जन्म प्रमाण पत्र है तो वह कहती है, 'नहीं यह तो नहीं है लेकिन मैं जन्मष्टामी के दिन पैदा हुई थी।' आज एक हिंदुस्तानी दूसरे हिंदुस्तानी से लड़ रहा है। सरकार को इसे लेकर बातचीत का रास्ता अख्तियार करना चाहिए।