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पूजा भट्ट का औरत होने पर बड़ा बयान, कहा- मैं सती सावित्री नहीं हूं, न कभी बनूंगी
Thu, 21 Dec 2017 07:59 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला
टीम डिजिटल/ अमर उजाला
Updated Thu, 21 Dec 2017 07:59 PM IST
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'जख्म' , 'सड़क' और 'जुनून' जैसी सफल फिल्मों की बोल्ड एक्ट्रेस पूजा भट्ट अपनी एक्टिंग के लिए चर्चा में रही हैं। हाल ही में रेडियो मिर्ची के एक शो में शामिल होने पहुंची पूजा ने शो के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि हिंदुस्तान में औरतों के उग्र रूप को कोई देखना नहीं चाहता। यहां सिर्फ मर्दों के गुस्से को सराहा जाता है। उन्होंने साफ कहा-अब मैं सती-सावित्री तो हूं नहीं और न ही मुझे सती बनना है।
पूजा आगे कहती हैं, 'जब एक औरत दिल-दिमाग से साफ बात करती है तो लोगों को लगता है कि उसे गुस्सा आ रहा है और उसी अंदाज में जब कोई बात महेश जी कहते हैं तो लोग कहते हैं, कितनी इंटेंस बात कह रहे हैं। जब मेरी तरह कोई औरत थोड़ी-बहुत खूबसूरत होती है, अपनी SEXUALITY के साथ कंफर्टेबल है, उसका दिमाग भी साफ-सुथरा है और साफ तौर पर न भी बोलती है तो लोग कहते हैं गुस्सा क्यों आ रहा है।'
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उन्होंने आगे कहा- 'लोग औरत को सिर्फ ग्लैमर पोज और भोली-भाली नादान के रूप में ही देखना पसंद करते हैं। मैं यह बहुत अच्छी तरह समझती और जानती हूं कि मैं क्या चाहती हूं, मैं यह भी जानती हूं कि मुझे क्या नहीं चाहिए। हिंदुस्तान में एक अजीब चीज है कि औरत को देवी बना दिया गया है। लोग औरत के लक्ष्मी, सीता और सावित्री के रूप से बहुत सहज हैं लेकिन जैसे ही एक औरत का काली वाला रूप सामने आता है तो लोगों को बहुत तकलीफ होने लगती है।'
पूजा का जवाब सुन जब पास में बैठे महेश भट्ट हंसने लगते हैं तो पूजा कहती हैं, 'मैं लक्ष्मी भी हूं, सीता और सावित्री भी हूं लेकिन मैं सती नहीं हूं, मैं कभी सती नहीं बनूंगी, बिल्कुल भी नहीं। जो मुझे नहीं बर्दाश्त कर सकता न करे, जो नहीं सुनना चाहता न सुने, फॉलो नहीं करना तो न फॉलो करे लेकिन मैं सोचूंगी, जिऊंगी और जो हूं वही रहूंगी, इस मामले में मेरी कोई दूसरी पसंद भी नहीं है। यह मेरा व्यवहार है, जो मुझे पिता महेश भट्ट से जागीर में मिला है। दुनिया औरत की स्माइल देखना पसंद करती है उसका प्रचंड रूप बर्दाश्त नहीं करती।'
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