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कभी इस वजह से काम को तरसे थे पृथ्वीराज कपूर, बाद में बने हिंदी सिनेमा के 'मुगल ए आजम'

Sun, 03 Nov 2019 11:03 AM IST
shrilata biswas एंटरटेनमेंट डेस्क
एंटरटेनमेंट डेस्क Published by: shrilata biswas Updated Sun, 03 Nov 2019 11:03 AM IST
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पृथ्वीराज कपूर - फोटो : social media

हिंदी सिनेमा में कपूर खानदान का लंबा इतिहास रहा है। मूक सिनेमा के दौर से लेकर ब्लैक एंड व्हाइट और रंगीन सिनेमा तक जिन चंद कलाकारों ने अपनी पहचान बनाई उनमें अभिनेता पृथ्वीराज कपूर का नाम भी शामिल है। 3 नवंबर को जन्मे पृथ्वीराज कपूर के बारे में जानते हैं कुछ खास और रोचक तथ्य आगे की स्लाइड्स में। 

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Prithviraj Kapoor - फोटो : file photo

पृथ्वीराज कपूर का जन्म 3 नवंबर 1906 को लायलपुर (वर्तमान में फैसलाबाद) के समुंद्री में हुआ। यह इलाका बंटवारे के बाद पाकिस्तान का हिस्सा बना। उनके पिता बशेश्वरनाथ कपूर इंडियन इंपीरियल पुलिस में पुलिस अधिकारी थे। पृथ्वीराज कपूर 3 साल के थे उनकी मां का निधन हो गया। 

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पृथ्वीराज कपूर - फोटो : सोशल मीडिया

पृथ्वीराज कपूर को बचपन से ही अभिनय का शौक था। उन्होंने लायलपुर और पेशावर के थिएटर से अपने अभिनय की शुरुआत की। महज 8 साल की उम्र में उन्होंने पहली बार स्कूली नाटक में हिस्सा लिया। पेशावर के एडवर्ड कॉलेज से बैचलर की डिग्री लेने तक नाटकों से उनका लगाव बढ़ गया। पृथ्वीराज कपूर अपने रंगमंच प्रेम के चलते लाहौर आए लेकिन किसी नाटक मंडली में काम नहीं मिला क्योंकि वो पढ़े-लिखे थे।

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पृथ्वीराज कपूर 1929 में काम की तलाश में मुंबई आ गए और इंपीरियल फिल्म कंपनी में बिना वेतन के एक्स्ट्रा कलाकार बन गए। 1931 में आई फिल्म 'आलमआरा' में उन्होंने 24 साल की उम्र में जवानी से लेकर बुढ़ापे तक की भूमिका निभाई। फिल्म 'मुगल ए आजम' में उनके द्वारा निभाया गया किरदार आज भी याद किया जाता है।

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पृथ्वीराज कपूर - फोटो : फाइल फोटो

फिल्म इंडस्ट्री में 'पापाजी' के नाम से मशहूर पृथ्वीराज कपूर अपने थिएटर के तीन घंटे के शो के समाप्त होने के बाद गेट पर एक झोली लेकर खड़े हो जाते थे ताकि शो देखकर बाहर निकलने वाले लोग झोली में कुछ पैसे डाल सकें। इन पैसों के जरिए पृथ्वीराज कपूर ने एक वर्कर फंड बनाया था जिससे वो पृथ्वी थिएटर में काम कर रहे सहयोगियों को जरूरत के समय मदद किया करते थे।
फिल्म इंडस्ट्री में महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुए पृथ्वीराज कपूर को 1969 में भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही 1972 में फिल्म इंडस्ट्री के सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के अवॉर्ड से भी पृथ्वीराज कपूर को सम्मानित किया गया। पृथ्वीराज कपूर ने 65 साल की उम्र में 29 मई 1972 को दुनिया को अलविदा कह दिया।

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