1960 और 70 के शानदार अभिनेताओं का जब कभी भी जिक्र आता है तो उनमें राजेंद्र कुमार का नाम जरूर शामिल रहता है। उनका जन्म 20 जुलाई 1929 को सियालकोट में हुआ था। अपने फिल्मी करियर की शुरुआत उन्होंने दिलीप कुमार और नर्गिस के साथ साल 1950 में रिलीज हुई फिल्म 'जोगन' से की थी। हिंदी सिनेमा में उन्हें 'जुबली कुमार' के नाम से भी जाना जाता है। शोहरत की बुलंदियों तक पहुंचने से पहले राजेंद्र कुमार को काफी संघर्ष करना पड़ा। आज उनके जन्मदिन के मौके पर हम आपको उनसे जुड़ी कुछ खास बातें बताने जा रहे हैं।
Rajendra Kumar: पुलिस की नौकरी छोड़ मुंबई भाग आए थे राजेंद्र कुमार, ऐसे बने बॉलीवुड के ‘जुबली कुमार’
विभाजन के बाद राजेंंद्र कुमार का पूरा परिवार भारत आ गया था। इसके बाद उनके पिता ने कपड़ों का बिजनेस शुरू किया जो अच्छा चलने लगा। इस दौरान राजेंद्र कुमार की भी सरकारी नौकरी लग गई। उनकी नौकरी पुलिस विभाग में लगी लेकिन ट्रेनिंग में जाने से दो दिन पहले वह एक्टर बनने का सपना लिए हुए मुंबई पहुंच गए। दरअसल, बचपन से ही राजेंद्र कुमार अभिनय के क्षेत्र में जाना चाहते थे। दोस्त भी उन्हें एक्टिंग में करियर बनाने की सलाह दिया करते थे। फिर क्या था राजेंद्र सबकुछ छोड़कर अपना सपना पूरा करने मायानगरी जा पहुंचे। हालांकि मुंबई पहुंचकर उन्हें जल्द ही समझ आ गया कि एक्टिंग की राह इतनी आसान नहीं है। शर्म के मारे उन्होंने घर न जाने का फैसला किया और मुंबई में ही संघर्ष करने लगे।
फिल्मों में कई साल के संघर्ष के बाद उन्हें असली पहचान साल 1957 में रिलीज फिल्म 'मदर इंडिया' से मिली। इस फिल्म में उन्होंने नर्गिस के बेटे का रोल निभाया था। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा। उनकी पहली सबसे बड़ी हिट फिल्म 'गूंज उठी शहनाई' (1959) थी। इस फिल्म से उन्हें रोमांटिक हीरो के तौर पर पहचाना जाने लगा। 1960 के दशक में उनकी कई फिल्में एक साथ सिनेमाघरों में हिट साबित हुईं। ये फिल्में सिनेमाघरों में लगातार 25 हफ्तों तक लगी रहीं जिसके बाद उन्हें जुबली कुमार के नाम से पुकारा जाने लगा।
ऐसा कहा जाता है कि राजेश खन्ना की फिल्मों में एंट्री से ही राजेंद्र कुमार का जादू कम होने लगा। एक्टिंग में सफलता के शिखर तक पहुंचने के बाद उन्होंने अपने बेटे कुमार गौरव के लिए फिल्म का निर्देशन भी किया। इस फिल्म का नाम 'लव स्टोरी' था। कला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए उन्हें पद्मश्री अवॉर्ड से भी नवाजा गया। अपने करियर में उन्होंने 85 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। 'धूल का फूल', 'पतंग', 'धर्मपुत्र' और 'हमराही' उनकी सुपरहिट फिल्मों में से हैं।