राजू श्रीवास्तव होते तो आज अपना 59वां जन्मदिन मना रहे होते। उत्तर प्रदेश में कानपुर के रहने वाले राजू श्रीवास्तव का जन्म 25 दिसंबर 1963 को हुआ था। इसी साल 21 सितंबर को राजू दुनिया छोड़ गए। लाखों, करोड़ों चेहरों को मुस्कान देने वाले राजू श्रीवास्तव सबको रुला कर चले गए। 'हंसाने वाला चला गया अपनों को रुलाकर, कमाने वाला चला गया अपनों को बसाकर, हर शख्स सहमा सा रहने लगा, अपना गम छुपाकर, फिर मुड़कर कभी नहीं देखा, अपना वादा भुलाकर।' करियर के उफान पर राजू श्रीवास्तव इतने व्यस्त रहे कि कभी उनको अपना जन्मदिन मनाने का समय ही नहीं मिला। आज कानपुर में उनका परिवार गरीबों में राशन, कंबल बांटकर उनका जन्मदिन मना रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी लखनऊ, कानपुर में कई रास्तों के नाम राजू श्रीवास्तव की याद में कर दिए हैं। राजू श्रीवास्तव के जन्मदिन पर उनके छोटे भाई दीपू श्रीवास्तव ने ढेर सारी बातें शेयर की। आइए सुनते हैं उन्हीं की जुबानी.....
Raju Srivastav Birthday: भाई ने सुनाई कामयाबी की रुला देने वाली कहानी, जहां हैं खुश हैं नहीं तो लौटकर न आ जाते
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घर पर जन्मदिन मनाने का समय नहीं
राजू भैया 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज' के बाद इतने बिजी हो गए कि कभी उनके पास परिवार से मिलने के लिए समय नहीं रहता था। कई बार ऐसा हुआ कि भाभी और बच्चों के साथ हम लोग उनसे एयरपोर्ट पर ही मिलने जाते थे। 'द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज' के बाद राजू भैया को दुनिया का प्यार मिला और बिजी हो गए। एक दिन भी परिवार से मिलने के लिए समय नहीं निकाल पाते थे। एक महीने में लगातार 25 शोज भी किए। पांच दिन बचते थे तो उसमे भी हम लोग उनसे मिलने एयरपोर्ट पर जाते थे। वह फोन करते थे कि मैं चेन्नई से उतर रहा हूं, तुम लोग मिलने आ जाओ भाभी और बच्चों के साथ। मैं बोलता था क्यों घर आइए, बोलते थे कि दो घंटे में गोवा के लिए निकलना है। मैं कहता था कि ठीक है गोवा से आ जाइए सुबह मिल लेते हैं। कहते थे वहां से कहीं और शो के लिए जाना है। इतने व्यस्त रहते थे कि अपने जन्मदिन के लिए भी समय नहीं निकाल पाते थे। उनके जन्मदिन पर भी कोई ना कोई शो आ जाता था। कई बार तो हम लोगों ने शो में ही जाकर उनका जन्मदिन मनाया। वो हमेशा काम को ही प्राथमिकता देते थे। यही वजह रही है कि उन्होंने 40 वर्षों तक देश को हंसाया।
20 रुपये देते थे राजू भाई
राजू भाई से मैंने काफी कुछ सीखा है वही हमारे आदर्श और गुरु हैं। 22 साल तक उनके छत्र छाया में रहकर काफी कुछ सीखा। आज मैं भी 12-13 देशों में कुल मिलाकर 1800 शो कर चुका हूं। डॉक्टर कहते हैं कि लाफ्टर इज द बेस्ट मेडिसिन, मैं कहता हूं कि सबसे पहले लाफ्टर बाकी सब आफ्टर। किसी को खुलकर हंसाना सबसे बड़ी इबादत है। राजू भाई मुंबई 40 साल पहले 1982 में आए थे। हम उनसे 8 साल छोटे हैं। हम छह भाई और एक बहन हैं। सात लोगों में सबसे छोटे हम हैं। जब राजू भाई कानपुर आते थे तब मुझे 20 रुपये देते थे। उस समय मैं सोचता था कि हमारा भाई हीरो बन गया होगा तभी 20 रुपये मिल रहे हैं। घर में एक दो रुपये मिलते थे।
यही तो हीरो है, सलमान खान
1989 में जब 'मैने प्यार किया' की शूटिंग चल रही थी तब मुंबई घूमने आया। पुष्पक एक्सप्रेस से दादर स्टेशन पर उतरा तो राजू भाई मुझे लेने आए। उस समय राजू भाई एंटॉप हिल में एक छोटे से कमरे में तीन चार लोगों के साथ रह रहे थे। एक दिन तैयार होकर सुबह निकल रहे थे तो मैंने पूछा कि सुबह सुबह कहां जा रहे हैं, बोले एक फिल्म 'मैंने प्यार किया' की शूटिंग है उसमे छोटा सा रोल कर रहा हूं, तुम भी घूमने चलो। मुझे लगा कि मेरा भाई तो हीरो बन गया, शूटिंग चल रही है। लंच ब्रेक में एक दुबले पतले लड़के के साथ बैठकर मैं भी खाना खा रहा था, मैंने पूछा कि ये लड़का कौन है? भाई ने बोला यही तो हीरो है सलमान खान।
मुंबई कानपुर मुंबई का सफर
जब 1993 में दूसरी बार घूमने आया तो उस समय 'बाजीगर' की शूटिंग चल रही थी। भाई बोले चलो शूटिंग देखने तो मैंने पूछा कि इस बार कौन मिलेगा। भाई ने बताया कि इस बार भी एक नया हीरो एक दो फिल्में कर चुका है। 17 मई 1993 में जब भाई की शादी हुई तो मैं हमेशा के लिए मुंबई भाई के साथ आ गया। उस समय राजू भाई मलाड के जनकल्याण नगर में रहते थे। उस समय भाई के पास मारुति 800 कार हुआ करती थी, मैं कार चलाता था। भाई का शो देख देख कर मुझे भी लगा कि मैं भी सबको हसाऊंगा। मुंबई में दो तीन साल खूब घूमा, उसके बाद 1996 में वापस कानपुर चले गया। वहां दो साल तक आर्केस्ट्रा में एंकरिंग की। लोग बोलते थे तुम यहां क्या कर रहे हो, जाओ मुंबई तुम्हारे भाई का तो कैसेट निकल रहा है। फिर 1998 में अटैची उठाए और पुष्पक एक्सप्रेस पकड़कर मुंबई आ गए।