जिसने भी बॉलीवुड की मशहूर फिल्म शोले देखी है, वो उस सीन को नहीं भूल सकते जिसमें बसंती (हेमा मालिनी) भगवान शिव से अच्छे पति के लिए प्रार्थना कर रही हैं और वीरू (धर्मेंद्र) मूर्ति के पीछे छिपकर भगवान शिव की आवाज निकालते हुए बसंती को जवाब दे रहे हैं। उस सीन को एक बार फिर से देखने की जरूरत इसलिए है, क्योंकि जहां मंदिर का वो सेट बनाया गया था, वो जगह 'विकास' की भेंट चढ़ने वाली है। दरअसल राष्ट्रीय राजमार्ग 275, जिसे बेंगलुरु-मैसूर हाइवे कहा जाता है, उसके लिए बाइपास बनाया जाना है, जो रामनगर के नजदीक होगा।
शूटिंग के 44 साल बाद सिर्फ यादों में रह जाएगी 'शोले' की ये लोकेशन?
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कर्नाटक का वो रामनगर, जिसके चट्टानी इलाके में प्रोड्यूसर रमेश सिप्पी ने अपनी ब्लॉक बस्टर रही फ़िल्म शोले की शूटिंग की थी और फ़िल्म की स्टार कास्ट में संजीव कुमार, अमिताभ बच्चन, अमजद ख़ान और जया बच्चन भी शामिल थे। कौन भूल सकता है कि ये वही फिल्म है जिससे गब्बर सिंह के रोल में अमजद ख़ान एक विलेन होकर भी हीरो की तरह उभरे। शोले में आपको सलीम-जावेद की जोड़ी का लिखा रहीम चाचा (ए के हंगल) का वो लोकप्रिय डायलॉग भी याद होगा- "इतना सन्नाटा क्यों है भाई।"इस डायलॉग को भी याद करने की जरूरत इसलिए है, क्योंकि उस इलाके में भी 'सन्नाटा' पसर सकता है, क्योंकि डर ये है कि अब वहां लंबे-पंखों वाले गिद्ध, हिमालयन ग्रिफिन और मिस्र के गिद्ध आना बंद कर दें।
नेस्टिंग सीजन में ये पक्षी दूर के इलाकों से यहां मौजूद रामदेवरा बेट्टा गिद्ध अभयारण्य में अंडे देते हैं। जो एक इको सेंसिटिव जोन है। कर्नाटक वल्चर ट्रस्ट के शशिकुमार बी ने बीबीसी हिंदी से कहा, "आम तौर पर ये पक्षी नवंबर और मार्च के बीच यहां आकर अपने घोसले बनाते हैं। पिछले कुछ सालों में, विभिन्न कारणों से इस दौरान पक्षियों का यहां आना वैसे भी कम हो गया है। अगर सड़क बनाने के लिए विस्फोट किए जाते हैं तो वो पक्षी यहां आकर घोसले नहीं बनाएंगे।" एक वन अधिकारी ने पुष्टि की कि क्षेत्रीय इको सेंसिटिव जोन ने बाइपास रोड बनाने के लिए चट्टानों के विस्फोट पर रोक लगा दी है।
रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर ए एल दालेश कहते हैं, "यहां कोई विस्फोट नहीं हो रहे हैं। कॉन्ट्रेक्टर हाइवे बनाने के लिए खास उपकरणों से चट्टाने काट रहे हैं। इस इलाके में विस्फोट करने पर पूरी तरह से पाबंदी है।"लेकिन जहां सड़क बन रही है, उसके ठीक पास एक बोर्ड लगा है, जिसमें स्थानीय लोगों के लिए चेतावनी लिखी है कि हो सकता है कि पास ही विस्फोट हो रहा हो और कुछ स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यहां विस्फोट किए जा रहे हैं। पहचान न जाहिर करने की शर्त पर रामनगर जिले के एक पूर्व अधिकारी ने कहा, "लोगों के बीच इस चीज को लेकर भ्रम है कि विस्फोट कहां किया जा सकता है। हुआ ये है कि इस साल केंद्रीय कानून में संशोधन किया गया है कि किसी भी इको सेंसिटिव जोन के एक किलोमीटर के दायरे में विस्फोट करने पर प्रतिबंध होगा। इससे पहले ये दायरा 10 किलोमीटर था और राज्य सरकार इसका कुछ नहीं कर सकती है।"
अजीब बात ये है कि साल 2000 तक रामदेवरा बेट्टा गिद्ध अभयारण्य के आस-पास के इलाके को इको सेंसेटिव जोन घोषित नहीं किया गया था। तब तक कर्नाटक के और देश के दूसरे हिस्सों के कई पर्यटक उस तीन एकड़ हिस्से में आते थे, जहां फिल्म की शूटिंग हुई थी। कुछ लोग तो वहां जाकर गब्बर सिंह की तरह चलते थे और उनकी मिमिक्री करते थे।नपर्यावरण सपोर्ट ग्रुप के ट्रस्टी सिंह सलदान्हा बताते हैं, "रामदेवरा बेट्टा गिद्ध अभयारण्य को साल 2000 में एक सुरक्षित इलाका घोषित किया गया, क्योंकि सरकार ने अंडीकुंडी को स्लॉथ बियर सेंचुरी बनाने पर सहमति दी थी। बेंगलुरु से मैसूर जाते वक्त अंडीकुडी हाइवे के बाईं तरफ पड़ता है। रामदेवरा बेट्टा दाईं ओर है।"