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असल जिंदगी में अरविंद त्रिवेदी को 'लंकेश' समझ बैठे थे लोग, रावण दहन पर इलाके में मनाते थे शोक

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: अपूर्वा राय Updated Tue, 08 Oct 2019 01:54 PM IST
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People considered Arvind Trivedi as 'Lankesh', mourning was done in area on Ravan Dahan
arvind trivedi ravan - फोटो : Social Media

पूरे देश में आज दशहरा बड़ी ही धूम-धाम से मनाया जा रहा है। त्रेता युग में इस दिन भगवान श्रीराम ने लंका के राजा रावण का सर्वनाश कर राक्षस कुल का नाश किया था। बुराई पर अच्छाई की जीत के उपलक्ष्य में यह त्योहार मनाया जाता है। बात करें टीवी शोज के रावण की तो एक इंसान ऐसा है जिसे आज भी लोग रावण के रूप में ही जानते हैं। ये शख्स कोई और नहीं बल्कि रामानंद सागर की रामायण से पॉपुलर हुए अरविंद त्रिवेदी हैं। रामानंद सागर के धारावाहिक रामायण में लंकापति रावण का रोल निभाकर अरविंद त्रिवेदी ने खासी लोकप्रियता बटोरी थी। अरविंद मूल रुप से मध्य प्रदेश के शहर इंदौर से ताल्लुक रखते हैं। अरविंद के बड़े भाई उपेंद्र त्रिवेदी गुजराती थियेटर के जाने माने आर्टिस्ट रहे। भाई को देखकर ही अरविंद ने एक्टिंग करने की सोची।


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arvind trivedi

रावण के रोल ने उन्हें इस कदर सफलता की बुलंदियों पर पहुंचाया कि लोग उन्हें असल जिंदगी में रावण समझने लगे थे। एक इंटरव्यू में अरविंद त्रिवेदी ने बताया था- मैं केवट के रोल के लिए ऑडिशन देने गया था लेकिन रामानंद सागर ने मुझे रावण के लिए चुन लिया। उन्होंने बताया था- सबका ऑडिशन होने के बाद मुझे बुलाया गया था। उन्होंने मुझे एक स्क्रिप्ट दी। 

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People considered Arvind Trivedi as 'Lankesh', mourning was done in area on Ravan Dahan
arvind trivedi - फोटो : social media

स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद मैं अभी कुछ कदम ही चला था कि रामानंद जी ने खुशी से चहकते हुए कहा, "बस, मिल गया मुझे मेरा लंकेश। यही है मेरा रावण।" मैं चौंककर इधर-उधर देखने लगा कि मैंने तो डायलॉग भी नहीं बोले और यह क्या हो गया? जब मैंने उनसे पूछा, तो वह बोले, "मुझे मेरा रावण ऐसा चाहिए, जिसमें सिर्फ शक्ति ही न हो, बल्कि भक्ति भी हो। वह विद्वान है, तो उसके चेहरे पर तेज हो। अभिमान हो और मुझे सिर्फ तुम्हारी चाल से ही यह विश्वास हो गया कि तुम इस किरदार के लिए सही हो।"

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arvind trivedi ravan - फोटो : Social Media

अरविंद त्रिवेदी ने बताया था- इस सीरियल के बाद मैं लोगों के लिए अरविंद त्रिवेदी नहीं, लंकापति रावण हो गया था। मेरे बच्चों को लोग रावण के बच्चे और मेरी पत्नी को मंदोदरी के नाम से पुकारने लगे थे। मैंने कभी नहीं सोचा था कि रावण का किरदार निभाकर मैं इतना मशहूर हो जाऊंगा। सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि विदेश में भी लोग मुझे जानेंगे। मेरा नाम याद रखेंगे, मैंने कभी नहीं सोचा था। जिस दिन सीरियल में रावण मारा गया था, उस दिन मेरे इलाके में लोगों ने शोक मनाया था।

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arvind trivedi

उन्होंने बताया था- जब भी मैं कार्यक्रमों में गया तो यही पाया कि लोगों के दिलों में रावण के चरित्र की कितनी इज्जत है। लोग आज भी रावण को विद्वान मानते हैं। आज भी दक्षिण में लोग रावण के नाम पर अपना नाम रखते हैं। रावण ने तो राम के जरिए अपने पूरे कुनबे को मोक्ष दिलाया। अगर रावण आत्मकेंद्रित होता तो खुद हिरण बनकर मोक्ष प्राप्त कर लेता। रावण काफी उसूलों वाला इंसान था, वह घोर तपी और नियमों को मानता था। अहंकार को छोड़कर रावण से बहुत कुछ सीखा जा सकता है।

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