सत्य की खोज में निकले किसी सीबीआई अधिकारी को अगर सिलसिलेवार हो रही हत्याओं के मामले में धर्म, अध्यात्म और अघोर संप्रदाय से सामना हो तो उस अधिकारी की मनोस्थिति क्या होगी? और, क्या होगा जब इस अधिकारी के सामने सनातन धर्म के तमाम पहलू एक के बाद एक अलग दृष्टिकोण से आमने शुरू हो जाएं? वास्तविक दुनिया और अध्यात्म की पारलौकिक दुनिया के बीच सेतु बनाने की ऐसी ही एक कोशिश है, फिल्म ‘मनस्वी’। फिल्म के निर्माता जयेश राजपाल कहते हैं, ‘फिल्म ‘मनस्वी’ एक विचार है। जैसे कि कहावत है- तुम परमात्मा की ओर एक कदम बढ़ाओ वो तुम्हारी ओर सौ कदम बढ़ा देता है। फिल्म ‘मनस्वी’ का नायक सत्यकाम भी इसी तरफ बढ़ रहा है। वह एक सीबीआई अधिकारी है जो वास्तविक सत्य और अर्थ को जानने का जिज्ञासु है।’
Manasvi: सत्य की खोज में निकले सीबीआई अफसर को मिला अलौकिक ज्ञान, जल्द रिलीज होगी फिल्म ‘मनस्वी’
जयेश के मुताबिक, ‘सत्यकाम को सिलसिलेवार हो रही बच्चों की हत्याओं का मामला सुलझाने के लिए सौंपा जाता है। स्वयं के सत्य की खोज और इस मामले की जांच-पड़ताल के दौरान उसके जीवन में अघोरी बाबा गुरु रूप में आते हैं। अघोरी बाबा उसे सत्य की ओर बढ़ने के लिए समय-समय पर अघोर और आध्यात्म के सत्य और वास्तविक पहलू का उसे बोध कराते है। साथ ही एक बौद्ध भिक्षु से भी सत्याकाम का साक्षात्कार होता है जिससे बुद्ध के संदेश, तंत्र और उनका वास्तविक अर्थ एक नए आयाम में दुनिया के सामने प्रस्तुत होता है। फिल्म ‘मनस्वी’ दर्शकों के सामने मध्यभारत के पश्चिमी घाटों के स्थानों को ताजा करेगी और एक आध्यात्मिक रोमांचता से परिपूर्ण कहानी से दर्शकों से रू ब रू कराएगी।’
फिल्म ‘मनस्वी’ के निर्देशक मनोज ठक्कर इस बारे में बताते हैं, ‘धर्म सनातन है, वह हमेशा था, है और रहेगा। धर्म का अर्थ देश, काल और परिस्थिति के आधार पर अलग-अलग शब्दों में, रूपों में प्रकट होता आ रहा है और आगे भी होता रहेगा। शिव के अघोर स्वरुप और तंत्र को लेकर जो समाज में भ्रांतियां हैं, उनकी जीवनशैली को लेकर, साधना को लेकर, उन्हें फिल्म ‘मनस्वी’ के जरिये पेश करने की हमने कोशिश की है। यंत्र, तंत्र, मंत्र शब्दों का उच्चारण मात्र निषेधात्मक विषय और विचारों का द्योतक है, परंतु इनका असल, गहन, ज्ञानात्मक स्वरूप तो कुछ और ही है, हमने उसी पर काम किया है।’
फिल्म ‘मनस्वी’ का निर्माण डिवाइन ब्लेसिंग स्टूडियोज के जरिए यूनाइटेड वर्क्स कॉरपोरेशन ने किया है, ये युवाओं का एक समूह है जो एक परिवार की तरह, काम कर रहा है। तमाम व्यावसायिक कार्यों के साथ ही ये समूह शिव ओम साई ट्रस्ट के माध्यम से आध्यात्मिक और सामाजिक कार्य में भी संलग्न है। इसी के तहत पशुपतिनाथ के मंदिर का निर्माण इंदौर के निकट ग्राम तिल्लौर खुर्द में हो रहा है जो कि वास्तुकला में नेपाल के मंदिर के अनुरूप होगा। मंदिर परिसर में ही मानसिक रूप से अक्षम बच्चों के लिए एक आवास का निर्माण भी प्रस्तावित है।
फिल्म ‘मनस्वी’ में लीड रोल कर रहे रवि मित्तल कहते हैं, ‘जो होना होता है वह होकर ही रहता है। जब पूरी टीम 'मनस्वी' की पटकथा पर कार्य कर रही थी और सत्यकाम का किरदार स्वरुप में आने लगा तब अचानक एक शाम को मनोज ठक्कर सर ने कहा- 'सत्यकाम का किरदार रवि करें। इस पर सभी आश्चर्यचकित थे क्योंकि जब सबने फिल्म बनाने का संकल्प लिया था तब हम में से कोई भी अभिनय करने के विषय में सोच ही नहीं रहा था। सबका यही भाव था कि राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से निकले कलाकारों की ही इसके लिए सेवाएं ली जाएंगी। ठक्कर सर हमेशा कहते आए हैं कोई भी चीज अचानक सामने आए तो उसके बारे में सोचो अवश्य, लेकिन तुरंत 'ना' मत कहो, क्या पता उसके पीछे परमात्मा की कोई योजना हो। फिल्म का एक मुख्य संदेश यह भी है कि सभी कार्य परमात्मा द्वारा स्फुरित होते हैं, उसमे आदमी अगर अपने 'मैं' को हटाकर सिर्फ कर्म करता चले तो वह कार्य अपनी पूर्णता को प्राप्त होता है।’