'जानी', ये सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि ये अंदाज है जिसको राजकुमार ने इस तरह से बोला कि गली के बच्चे-बच्चे की ज़ुबां पर यूं चढ़ा कि अब तक नहीं उतरा। बॉलीवुड को अपनी डायलॉग डिलीवरी से कायल करने वाले राजकुमार की आज पुण्यतिथि है। आज के ही दिन 3 जुलाई 1996 को केवल 70 वर्ष की उम्र में राज कुमार दुनिया को अलविदा कह गए थे। राजकुमार का फिल्मों में आने का किस्सा बेहद दिलचस्प है। राजकुमार फिल्मों में आने से पहले सब इंस्पेक्टर थे और मुंबई के माहिम पुलिस स्टेशन में तैनात थे। राजकुमार मुंबई के जिस थाने मे कार्यरत थे वहां अक्सर फिल्म उद्योग से जुड़े लोगो का आना-जाना लगा रहता था। एक बार पुलिस स्टेशन में फिल्म निर्माता बलदेव दुबे आये हुये थे। वह राजकुमार के बातचीत करने के अंदाज से काफी प्रभावित हुए और उन्होंने राजकुमार से अपनी फिल्म 'शाही बाजार' में अभिनेता के रूप में काम करने की पेशकश की। बस फिर क्या था हिंदी सिनेमा को राजकुमार मिले और दर्शकों को बेहतरीन अभिनेता।
पुण्यतिथि: 'हमको मिटा सके ये जमाने में दम नहीं...' पढ़िए राजकुमार के 12 शानदार डायलॉग्स
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हम आंखों से सुरमा नहीं चुराते। हम आंखें ही चुरा लेते हैं।- तिरंगा
इस दुनिया के तुम पहले और आखिरी बदनसीब कमीने होगे, जिसकी न तो अर्थी उठेगी ओर न किसी के कंधे का सहारा, सीधे चिता जलेगी।- मरते दम तक
हमारी जुबान भी हमारी गोली की तरह है। दुश्मन से सीधी बात करती है। - 'तिरंगा'
हम कुत्तों से बात नहीं करते- मरते दम तक
आजकल का इश्क जन्मों का रोग नही है, वक्ती नशा है, शाम को होता है, सुबह उतर जाता है।- बेताज बादशाह
हम तुम्हें वह मौत देंगे जो न तो किसी कानून की किताब में लिखी होगी और न ही किसी मुजरिम ने सोची होगी। - 'तिरंगा'
जानी...हम तुम्हें मारेंगे और जरूर मारेंगे, पर बंदूक भी हमारी होगी और गोली भी हमारी होगी और वह वक्त भी हमारा होगा। - सौदागर
हमको मिटा सके ये जमाने में दम नहीं, हमसे जमाना है जमाने से हम नहीं- बुलंदी