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Rocketry: रॉकेट्री के खिलाफ साजिशों का सनसनीखेज खुलासा, प्रेस कॉन्फ्रेंस फ्लॉप कराने से लेकर थिएटर तक गड़बड़झाला
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Published by: हर्षिता सक्सेना
Updated Tue, 12 Jul 2022 09:58 PM IST
सार
नंबी नारायणन इन दिनों मुंबई में हैं। फिल्म ‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ की मेकिंग से शुरू से जुड़े रहे नारायणन इस बात से व्यथित हैं कि उनकी इस राम कहानी यानी ‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ को दर्शकों की मांग के बावजूद उन तक पहुंचने नहीं दिया जा रहा।
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आर माधवन
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
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केंद्र में कांग्रेस की और केरल में वाम गठबंधन की सरकारों की कथित मिलीभगत से देश के शीर्षस्थ अंतरिक्ष वैज्ञानिक नंबी नारायणन को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार करने और फिर उन्हें जेल भेजकर देश को अंतरिक्ष विज्ञान में दशकों पीछे धकेल देने की साजिश अब दुनिया जान चुकी है। लेकिन, दुनिया को अभी ये जानना बाकी है कि आखिर इस साजिश की कहानी को सिनेमाघरों तक पहुंचने में किसने किसने साजिश रची? लंबे समय तक अपनी बेगुनाही साबित करने और फिर अपना सम्मान हासिल करने के लिए हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जंग लड़ते रहे नंबी नारायणन इस सबसे काफी व्यथित हैं।
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रॉकेट्री द नंबी इफेक्ट
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
नंबी नारायणन को आत्मिक कष्ट
नंबी नारायणन इन दिनों मुंबई में हैं। फिल्म ‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ की मेकिंग से शुरू से जुड़े रहे नारायणन इस बात से व्यथित हैं कि उनकी इस राम कहानी यानी ‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ को दर्शकों की मांग के बावजूद उन तक पहुंचने नहीं दिया जा रहा। उत्तर भारत के दर्शकों की शिकायत रही है कि उन्हें सिनेमाघर पहुंचने के बाद तक ये पता नहीं चलता कि नंबी नारायणन की बायोपिक ‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ वहां लगी भी है। वैसे इस फिल्म को लेकर इसके अभिनेता और निर्माता, निर्देशक आर माधवन भी कम व्यथित नहीं हैं। पहले दिल्ली और फिर मुंबई में जब जब उन्होंने फिल्म के बारे में बातें करने चाहीं, उनकी कोशिशों पर पानी फेरने की ‘साजिशें’ कम नहीं हुईं।
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रॉकेट्री द नंबी इफेक्ट
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
किसी कॉरपोरेट घराने की मदद नहीं
फिल्म ‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ को आर माधवन ने सिर्फ एक देशभक्त अंतरिक्ष वैज्ञानिक नंबी नारायणन के प्रति अपनी श्रद्धा के चलते बनाया है। तमाम बातों मुलाकातों के बाद भी देश की किसी बड़ी फिल्म कंपनी ने इसमें पैसा नहीं लगाया। अपने बूते, अपने परिचितों और अपने परिजनों की ताकत से माधवन ने करीब पांच छह साल की मेहनत से ये फिल्म बनाई है। सूत्र बताते हैं कि प्राइम वीडियो ने इस फिल्म के ओटीटी राइट्स के लिए मोटी रकम माधवन को कोरोना संक्रमण काल के दौरान ऑफर की। लेकिन, माधवन की शर्त यही रही कि वह ये फिल्म पहले सिनेमाघरों में रिलीज करेंगे। फिल्म की 1 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज करने की तारीख तय हो गई तो माधवन ने इसके प्रचार के लिए देश के बड़े शहरों में लोगों से मिलने की योजना बनाई।
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रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
दिल्ली पहुंचे तो भारत बंद का बहाना
फिल्म ‘रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट’ के प्रचार के लिए आर माधवन बीते महीने जब 20 जून को दिल्ली पहुंचे तो उनसे मिलने या उनसे मुलाकात करने बहुत कम संख्या में ही पत्रकार पहुंचे। माधवन के करीबी लोगों ने जब इस बारे में संबंधित लोगों से जानकारी चाही तो बताया गया कि उस दिन भारत बंद का तगड़ा असर दिल्ली और एनसीआर में है और इसी के चलते अंतरिक्ष या फिल्म विषय कवर करने वाले पत्रकार उनसे मिलने उस संख्या में नहीं पहुंच सके, जितनी कि उनकी टीम को अपेक्षा रही होगी। हालांकि, हकीकत यही है कि ‘भारत बंद’ उस दिन बिल्कुल बेअसर रहा था।
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रॉकेट्री: द नंबी इफेक्ट
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
प्रेस कांफ्रेस शुरू होने के बाद बंटे आमंत्रण
उसके बाद 23 जून को माधवन ने मुंबई के पत्रकारों से मिलने की योजना बनाई। पीआर एजेंसी की तरफ से व्हाट्सएप पर सूचना दी गई कि माधवन सिर्फ पत्रकारों से इंटरव्यू आदि के लिए मिलेंगे। जिस किसी ने समय से ये व्हाट्सऐप संदेश पढ़ लिया तो ठीक नहीं तो अधिकतर लोग मौके पर पहुंचे ही नहीं। इसके बाद असल किस्सा तब हुआ जब पीआर एजेंसी ने उसी दिन शाम को प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन किया और इसकी सूचना ही पत्रकारों को समय से नहीं दी। कुछ पत्रकारों को तो इसके आमंत्रण प्रेस कांफ्रेस शुरू होने के बाद भेजे गए। इस बारे में जब माधवन को जानकारी मिली तो वह देर रात तक पत्रकारों को फोन फोन करके माफी मांगते रहे।
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