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Ruchi Narain Interview: घुमक्कड़ी ने मुझे वह बनाया है, जो आज मैं हूं, नई फिल्म पर पहली बार एक्सक्लूसिव खुलासा

Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Sun, 18 Feb 2024 11:43 AM IST
सार

पढ़कर सीखना तो खैर पूरे जीवन चलता ही रहता है लेकिन हां, घूमा भी मैंने बहुत है। बचपन में ही अपने पिता के साथ मैं संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका, ओमान जैसे देश घूमती रही।

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Ruchi Narain Exclusive Interview with Pankaj Shukla Guilty Hanuman Da Damdaar Karmma Calling Sudhir Mishra
रुचि नारायण - फोटो : अमर उजाला

कालजयी फिल्म ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’ के लेखन में अपने अनूठे सिनेमा की पहली आवाज पाने वाली निर्देशक रुचि नारायण अब अपनी अगली फिल्म की तैयारी में हैं। वेब सीरीज ‘हंड्रेड’ और ‘कर्मा कॉलिंग’ की लोकप्रियता ने उनको युवाओं की पसंद समझने का एक नया नजरिया भी दिया है। रुचि नारायण ने हिंदी सिनेमा में अपनी राह अपनी मेहनत, जिद और अपनी काबिलियत से तो बनाई ही है, इस सफर में उन्हें चंद बेहद काबिल दोस्तों का भी साथ मिला है। उनकी कंपनी रैट फिल्म्स के आर ए टी का मतलब क्या है, और क्या है उनका रिश्ता अपनी सीरीज ‘कर्मा कॉलिंग’ की हीरोइन रवीना टंडन से, बता रही हैं रुचि ‘अमर उजाला’ के सलाहकार संपादक पंकज शुक्ल को इस एक्सक्लूसिव मुलाकात में..

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Ruchi Narain Exclusive Interview with Pankaj Shukla Guilty Hanuman Da Damdaar Karmma Calling Sudhir Mishra
लारा दत्ता और रुचि नारायण - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपके सिनेमा में दुनिया जहान की तमाम बातें बहुत ही खूबसूरती से लेकिन सहजता से बयां हो जाती हैं, इसके लिए आपने खूब पढ़ा है या फिर खूब घूमा है?

पढ़कर सीखना तो खैर पूरे जीवन चलता ही रहता है लेकिन हां, घूमा भी मैंने बहुत है। बचपन में ही अपने पिता के साथ मैं संयुक्त अरब अमीरात, श्रीलंका, ओमान जैसे देश घूमती रही। दिल्ली की पैदाइश है। कोलकाता में शुरुआती दिन बीते और मसूरी व कतर में पढ़ाई की। अब मुंबई में हूं तो कह सकते हैं कि घुमक्कड़ी ने मुझे वह बनाया है, जो आज मैं हूं।

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रुचि नारायण - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
दिल्ली तो खैर वहां साल दो-साल भी रह लेने वालों के दिल से जाता ही नहीं है..

आप यकीन करेंगे कि हमारा परिवार पुरानी दिल्ली के उन परिवारों में शामिल हैं जिनके पुरखों ने दिल्ली शहर बसाया है। लेकिन, मेरा मानना है कि इंसान जितना ज्यादा घूमता है, जितना ज्यादा पढ़ता है, उसका लेखन और निर्देशन उतना ही परिपक्व होता जाता है।

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रुचि नारायण - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, इसमें अपने पुराने उस्ताद निर्देशक सुधीर मिश्रा की कितनी मदद मानती हैं आप?

सुधीर जी, मेरे ही नहीं मेरी पीढ़ी के दर्जनों युवाओं के उस्ताद रहे हैं। वह जिंदगी को बेफिक्री में गुजारने में यकीन रखते हैं। उनकी फिल्म ‘इस रात की सुबह नहीं’ पर मैं एक बच्ची की तरफ फुदकती रहती थी। ‘हजारों ख्वाहिशें ऐसी’ की लेखन टीम में उन्होंने ही शामिल किया। ये फिल्म मेरा वह रनवे, जिससे मेरे करियर ने पहली बिना हिचकोले खाए उड़ान भरी।

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हनुमान दा दमदार - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, इन दिनों आपकी फिल्म ‘हनुमान दा दमदार’ फिर से चर्चा में हैं, इसकी वजह?

मुझे पूरा तो पता नहीं लेकिन शायद हालिया रिलीज फिल्म ‘हनुमान’ की वजह से लोग मेरी फिल्म फिर से देख रहे हैं और उसमें नई नई बातें तलाश रहे हैं, मुझे भी बता रहे हैं। ये एक एनीमेशन फिल्म थी, जिसमें फिल्म जगत के तमाम बड़े सितारों मसलन सलमान खान, रवीना टंडन, जावेद अख्तर, सौरभ शुक्ला और मकरंद देशपांडे जैसे लोगों ने अपनी आवाजें दी। मेरा मानना है कि हमारे आसपास जो कहानियां हैं, उन्हें अगर हम मौजूदा पीढ़ी के हिसाब से बना पाएं तो हमें इनकी प्रेरणा लेने के लिए कहीं बाहर जाने की जरूरत नहीं है।

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