जिन सिनेप्रेमियों ने हिंदी सिनेमा के इतिहास की सबसे सफल फिल्मों में से एक 'शोले' देखी होगी, उन्हें इस फिल्म का किरदार अहमद तो जरूर याद होगा। रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अहमद का वह किरदार अभिनेता सचिन पिलगांवकर ने निभाया है लेकिन यह बात कितने लोगों को पता होगी कि सचिन ने इस फिल्म में सिर्फ अहमद का ही किरदार नहीं, बल्कि एक और अहम भूमिका निभाई है। और वह है एक फिल्म निर्देशक की भूमिका। इसका खुलासा खुद सचिन ने एक रियलिटी शो के दौरान किया है।
'शोले' में सचिन पिलगांवकर ने निभाया था ये दोहरा किरदार, छोटे पर्दे के शो में किया सबसे बड़ा खुलासा
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सचिन टीवी के रियलिटी शो 'इंडियाज बेस्ट डांसर' में अपनी पत्नी सुप्रिया पिलगांवकर के साथ मेहमान बनकर पहुंचे। इस शो में उन्होंने पहले तो इसके प्रतियोगियों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया। उसके बाद उन्होंने अपनी फिल्म 'शोले' से जुड़ा एक किस्सा साझा किया। सचिन ने बताया कि जब 'शोले' बन रही थी तब वह 17 साल के थे लेकिन जब यह फिल्म बननी शुरू हुई थी, तब उनकी उम्र 16 साल की थी। इस फिल्म की शूटिंग से पहले उन्होंने जाने-माने फिल्म निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी से फिल्म संपादन का काम सीखा था।
शूटिंग के दौरान का किस्सा बताते हुए सचिन कहते हैं, 'शूटिंग के दौरान मैं रमेश सिप्पी सर की कुर्सी के पीछे बैठता था। मैं देखता था कि वह कैसे हर शॉट लेते हैं और उसका संपादन करते हैं? यह सब बड़ी तल्लीनता से देखते हुए मुझे रमेश सर ने देखा और मुझसे पूछा कि क्या मैं संपादन करना चाहूंगा? तो मैंने उन्हें बताया कि मैंने ऋषिकेश सर से इसका प्रशिक्षण लिया है और उनके साथ काम भी किया है। उस समय रमेश सर को अपनी इस फिल्म के लिए दो लोगों की जरूरत थी जो उनकी अनुपस्थिति में उनका काम संभाल सकें।'
अपनी बात जारी रखते हुए सचिन कहते हैं, 'उस समय रमेश सर ने मुझसे पूछा कि क्या मैं उन दो लोगों में से एक बनना चाहूंगा, जिन पर वह एक्शन सीक्वेंस के दौरान भरोसा कर सकते हैं? उनकी बात सुनकर मैं खुश हो गया और मैंने उनसे कहा कि मैं इतनी बड़ी जिम्मेदारी कैसे संभाल सकता हूं? मैं तो सिर्फ 17 साल का हूं। यह सुनकर उन्होंने कहा कि उम्र कोई मायने नहीं रखती और न ही वह इस पर भरोसा करते हैं। उन्होंने कहा कि मैं इस इंडस्ट्री में तब से हूं जब मैं साढ़े चार साल का था। इस हिसाब से वह मुझे 17 साल का नहीं, बल्कि 27 साल के एक पेशेवर अभिनेता की तरह देखते थे।'
सचिन के अलावा फिल्म में रमेश ने दूसरे आदमी के रूप में अमजद खान को चुना था। अमजद ने अपनी पढ़ाई के दिनों में ही निर्देशन, संपादन आदि के लिए कई पुरस्कार पाए थे। सचिन बताते हैं कि वह उन्हें मंजू भाई कहकर बुलाते थे। सचिन ने कहा, 'फिल्म में एक दृश्य है जहां संजीव कुमार के साथ धरम जी और अमित जी हाथों में हथकड़ी लगाए ट्रेन में जा रहे हैं। यह हिस्सा रमेश सर ने शूट किया था। बाकी का पूरा एक्शन सीक्वेंस मैंने और अमजद ने पूरा किया। मुझे लगा था कि रेल की पटरी पर लकड़ी के मोटे लट्ठे लुढ़कते हुए दिखाई देंगे तो यह बहुत प्रभावशाली दिखेगा। रमेश जी को यह बात पसंद आई और उन्होंने मेरी पीठ भी थपथपाई। वह वाकई बहुत अच्छे इंसान हैं।'