हिंदी सिनेमा में इस वक्त वंशवाद और पक्षपात जैसे मुद्दों को लेकर बहुत बड़ी बहस छिड़ी हुई है। लेकिन, इनमें से कई स्टार किड्स वाकई इतने हुनरमंद हैं कि उन्होंने अपने पिता के नाम से शुरुआत जरूर की लेकिन सिर्फ अपने दम पर ही इस इंडस्ट्री में टिके रहे। उनमें से ही एक हैं अभिनेता संजय दत्त। बहस तो इस समय अपने काम के लिए मिलने वाले पुरस्कारों को लेकर भी छिड़ी हुई है लेकिन संजय दत्त ने अपनी जिंदगी में बहुत कम पुरस्कार पाए हैं। और पाए भी उन फिल्मों के लिए हैं जिनमें लोगों को भी लगता था कि वह वाकई इसके हकदार हैं। आइए संजय दत्त के जन्मदिन पर आज उनके कुछ बेहतरीन किरदारों पर नजर डालते हैं।
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रॉकी (1981)
एक बाल कलाकार के रूप में संजय दत्त ने वर्ष 1977 में आई फिल्म 'रेशमा और शेरा' से अभिनय में अपने करियर की शुरुआत कर दी थी। लेकिन, एक वयस्क कलाकार के रूप में हिंदी सिनेमा में उनकी एंट्री उनके पिता सुनील दत्त के निर्देशन में फिल्म 'रॉकी' से हुई। इस फिल्म में संजय के साथ रीना रॉय, टीना मुनीम, अमजद खान, राखी, रंजीत, शक्ति कपूर और अरुणा ईरानी अहम भूमिकाओं में नजर आए। फिल्म के शीर्षक के हिसाब से संजय ने रॉकी का ही किरदार निभाया है। रॉकी एक ऐसा लड़का होता है जो बड़ा तो हो जाता है लेकिन उसे पता ही नहीं है कि उसको जन्म किस मां ने दिया है। यह फिल्म संजय दत्त की मां नरगिस के निधन के कुछ ही दिन बाद रिलीज हुई। हालांकि फिर भी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ताबड़तोड़ कमाई की।
नाम (1986)
संजय दत्त ने एक लाइन से कई फ्लॉप फिल्में दीं लेकिन उनका मनोबल डगमगाया नहीं। तब उन्हें महेश भट्ट के निर्देशन में मिली यह क्राईम ड्रामा फिल्म। इस फिल्म में वह नूतन, कुमार गौरव, पूनम ढिल्लों, अमृता सिंह और परेश रावल के साथ नजर आए। यह फिल्म संजय दत्त, परेश रावल और महेश भट्ट तीनों के ही करियर के लिए बहुत जरूरी थी। फिल्म में संजय दत्त ने विकी कपूर का किरदार निभाया है जो रातों-रात अमीर होने के लिए गलत रास्ते अख्तियार कर लेता है। समीक्षकों और दर्शकों दोनों की ही नजर में यह फिल्म काफी बड़ी हिट है। इसका गाना 'चिट्ठी आई है' तो आज भी हिंदी के सबसे लोकप्रिय गीतों में से एक है।
साजन (1991)
संजय दत्त को तमाम फिल्मों की ऊंच नीच के बाद मौका मिला लॉरेंस डिसूजा के निर्देशन में बनी इस रोमांटिक ड्रामा फिल्म में मुख्य किरदार निभाने का। संजय दत्त का किरदार इस फिल्म में अमन वर्मा उर्फ सागर का है। वह अनाथ होने के साथ दिव्यांग भी है जिसको वर्मा परिवार गोद ले लेता है। अच्छे स्वभाव का है इसलिए दोस्त जल्दी बन जाते हैं। मेहनती भी है और शायरियां लिखता है। इस फिल्म में संजय के साथ सलमान खान और माधुरी दीक्षित मुख्य भूमिकाओं में हैं। एक चुनौतीपूर्ण किरदार को इस फिल्म में संजय दत्त ने बखूबी निभाया है। इसके लिए अपने अपने करियर में पहली बार उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया। इस फिल्म के निर्देशक लॉरेंस डिसूजा ने इसके सीक्वल की भी घोषणा की थी लेकिन फिलहाल उसका कोई अता-पता नहीं है।
खलनायक (1993)
संजय के लगातार दौड़ते करियर में उनके हाथ लगी सुभाष घई के निर्देशन में बनी यह फिल्म। संजय दत्त का नाम जब भी आता है तो लोगों के जेहन में दो-तीन किरदार जरूर आते हैं जिसमें से इस फिल्म का किरदार बलराम राकेश प्रसाद उर्फ बल्लू भी शामिल है। बल्लू एक कुख्यात अपराधी है जिसको पकड़ने के लिए जैकी श्रॉफ का किरदार राम भरसक प्रयास करता है। शुरुआत में वह पकड़ा जाता है लेकिन यह चूहे बिल्ली का खेल तो पूरी फिल्म में ही चलता है। यह फिल्म एक विलेन के नजरिए से ही बनाई गई है। हालांकि, हिंदी के दर्शकों को खुश करने के लिए नैतिक रूप से बल्लू की जीत जरूर होती है लेकिन कानूनी रूप से वह अपराधी ही माना जाता है। इस फिल्म में शानदार किरदार निभाने के लिए संजय दत्त को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्मफेयर पुरस्कार के लिए नामित किया गया।