"गब्बर से कह देना कि रामगढ़वालों ने पागल कुत्तों के सामने रोटी डालना बंद कर दिया है…!" ऐसे ही कुछ दमदार और यादगार डायलॉग्स ने दर्शकों की खूब तालियां और सीटियां बटोरीं। हम बात कर रहे हैं बहुमुखी प्रतिभा के धनी अभिनेता संजीव कुमार के बारे में। हरिहर जेठालाल जरीवाला नाम से पैदा हुए संजीव कुमार ने अपने पूरे फिल्मी सफर में दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। उन्होंने हिंदी सिनेमा को अर्जुन पंडित, शोले, आंधी, त्रिशूल, दस्तक जैसी और भी कई फिल्मों के रूप में नायाब तोहफे दिए। रोमांस हो, ड्रामा हो या कॉमेडी हो, कुमार अपने आप को किरदार में ढालना बखूबी जानते थे। अपने बाकमाल अभिनय के दम पर उन्होंने दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और तीन फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते। 'अंगूर' फिल्म में उनका डबल रोल, हिंदी सिनेमा में अब तक के 25 बेस्ट एक्टिंग परफॉर्मेंस में से एक है। आइए, आज हम आपको संजीव कुमार के कुछ यादगार किरदारों के बारे में बताते हैं, जो लोगों के जेहन में उनके जाने के बाद भी जिंदा हैं।
ये हैं संजीव कुमार के 15 सबसे बेहतरीन किरदार, इन्होंने ही बनाया हरिभाई को सुपरस्टार
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इंस्पेक्टर राय, शिकार(1968)
वर्ष 1968 में आई फिल्म 'शिकार' एक मर्डर मिस्ट्री है। इस फिल्म को आत्मा राम ने निर्मित और निर्देशित किया है, जो मशहूर अभिनेता, निर्माता और निर्देशक गुरुदत्त के छोटे भाई थे। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई। इसके गाने तो अभी तक गुनगुनाए जाते हैं। कहानी में नरेश माथुर नाम का एक व्यक्ति एक लड़की के साथ जबरदस्ती करने की कोशिश करता है। उसी छीना झपटी में नरेश की मौत हो जाती है। लड़की इस घटना के बाद पुलिस के डर से वहां से फरार हो जाती है। बाकी की फिल्म इसी हत्या के असली हत्यारे को खोजने में निकलती है।
फिल्म में संजीव कुमार का किरदार इंस्पेक्टर राय का है, जो इस हत्या की छानबीन करते हैं और असली गुनहगार को पकड़ते हैं। इस फिल्म में सहायक कलाकार के तौर पर संजीव कुमार को फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला। उनके अलावा इस फिल्म में धर्मेंद्र और आशा पारेख मुख्य भूमिका में हैं।
हामिद, दस्तक(1970)
1970 में आई फिल्म 'दस्तक' एक ड्रामा फिल्म है। यह फिल्म राजिंदर सिंह बेदी के निर्देशन में बनी पहली फिल्म थी। इसके निर्माता और लेखक भी राजिंदर ही थे। फिल्म में संजीव कुमार के किरदार का नाम हामिद है। उसने सलमा(रेहाना सुल्तान) से नई-नई शादी की है और एक भाड़े के फ्लैट में रहने के लिए आते हैं। इसी फ्लैट में इनसे पहले शमशाद बेगम नाम की एक मशहूर मुजरे वाली रहा करती थी। उसी की याद में लोग हर रोज हामिद के दरवाजे पर दस्तक देते थे।
इस फिल्म के मुख्य किरदारों ने बेहतरीन अभिनय का नमूना पेश किया था। इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नवाजा गया। फिल्म में संजीव कुमार, रेहाना सुल्तान और अंजू महेंद्रू मुख्य भूमिका में हैं।
विजयकमल एस. सिंह, खिलौना(1970)
साल 1970 में आई फिल्म 'खिलौना' एक ड्रामा फिल्म है। इसके निर्माता एल. वी. प्रसाद और निर्देशक चंदर वोहरा हैं। बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही यह फिल्म, तेलुगू फिल्म 'पुनर्जन्म(1963)' की रीमेक है। कहानी में दिमागी तौर पर बीमार एक व्यक्ति विजयकमल है। उसके पिता ठाकुर सूरज सिंह एक तवायफ चांद(मुमताज) को अपने बेटे की पत्नी बनाकर उसे स्वस्थ बनाने का काम सौंपते हैं लेकिन विजय की मां और उसका भाई, चांद के नेक इरादों को कभी समझ नहीं नहीं पाते हैं और हमेशा उसे प्रताड़ित करते रहते हैं।
इस फिल्म में एक पागल का बेहतरीन किरदार निभाने के लिए संजीव कुमार को फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर के लिए नामित किया गया था। संजीव कुमार के अलावा मुमताज, जितेंद्र और शत्रुघन सिन्हा ने फिल्म में मुख्य भूमिका निभाई है।
साल 1972 में आई फिल्म 'कोशिश' एक ड्रामा फिल्म है, जिसे गुलजार ने निर्देशित किया है। भारतीय सिनेमा के इतिहास में यह फिल्म एक मील का पत्थर साबित हुई। यह फिल्म एक गूंगे और बहरे जोड़े के इस असंवेदनशील समाज में खुद की जगह बनाने के टकराव, दर्द और संघर्ष को बयां करती है। फिल्म में हरिचरण और आरती माथुर का किरदार क्रमशः संजीव कुमार और जया भादुड़ी ने निभाया है। इस फिल्म में शानदार किरदार के लिए संजीव कुमार का नाम फिल्मफेयर के लिए नामित किया गया था।