शादी के लिए बहू सर्वगुण संपन्न ही चाहिए, भले ही लड़के में लाख कमी हो, यह हमारे समाज की ऐसी मानसिकता रही है। लेकिन कोई भी नारी सर्वगुण संपन्न नहीं होती है। लेकिन अगर पति और पत्नी के बीच सही तालमेल हो तो जिंदगी बड़े आराम से कट जाती है। भोजपुरी अभिनेता यश कुमार मिश्रा की फिल्म 'सर्वगुण संपन्न' की कहानी एक अंधी लड़की और एक गूंगे व्यक्ति है। गूंगा कैसे अंधी लड़की की आंख बनकर और अंधी लड़की कैसे गूंगे व्यक्ति की जुबान बनकर अपनी जिंदगी की गाड़ी को पटरी पर लाते हैं, फिल्म 'सर्वगुण संपन्न' की यही कहानी है। आज इस फिल्म का ट्रेलर कैप्टन वॉच हिट्स के यूट्यूब चैनल पर लांच हुआ है।
Sarvagun Sampanna Trailer: यश कुमार और प्रियंका रेवारी की फिल्म का ट्रेलर लांच, दिव्यांगों को समर्पित है फिल्म
ट्रेलर की शुरुआत कमेंट्री से होती है। अंधी ने अपने मन की आंखों से पूरी दुनिया में उजाला फैला रखा है और गूंगे ने बिना बोले दुनिया में हलचल मचा रखी है और इस हलचल ने गूंगे के मन में हलचल मचा दी है। जब उसकी मुलाकात अंधी लड़की से होती है। जब अंधी और गूंगा मिलते हैं, तो इनके जीवन में एक नया मोड़ आता है। नायिका को नायक निहार रहा है। नायिका भले ही अंधी है। वह मन की आंखों से समझ जाती है कि नायक उसे एकटक देख रहा है। वह कहती है, इ भौरा त एकटक निहारत बा।' ट्रेलर में दिखाया गया है कि तोहरा के बोल बोली हम के गाने में नायक और नायिका एक दूसरे के करीब आते हैं।
नायिका जब नायक के शादी करने का विचार करती है तो उसका भाई कहता है, गलती करत बाटे ते। नायिका की मां कहती है, जज्बात से जिंदगी ना चलेगा, एक बात सुन ल बेटी, हम शादी के वचन देहले बाटी, अगर हमार वचन टूट जाई त हमार सांस टूट जाई। नायिका की मां उसकी शादी किसी और से करवाती है। लड़के का बाप कहता है, 'तोहर आन्हर बिटिया से साथ बियाह जेवर और घन के खातिर करत बाटी।' नायिका उसकी बात सुनकर कहती है, 'चला जा हमरा दरवाजा से आपन सरकारी कटोरा लेके।' फिर नायिका की शादी गूंगे से होती है और दोनों अपनी जिंदगी की शुरुआत कर रहे होते हैं कि जिंदगी में एक नया मोड़ आता है।
अभिनेता यश कुमार मिश्रा कहते हैं, 'दिव्यांक को लेकर हमारे समाज में अलग ही सोच रही है। लोग ऐसे लोगों के साथ सहानुभूति तो रखते हैं,लेकिन जब साथ निभाने की बात आती है तो कोई तैयार नहीं होता। अगर ऐसी लड़की के साथ कोई शादी करने के लिए तैयार होता भी है तो सिर्फ धन की लालच में। हमने इस फिल्म के माध्यम से यही बात कहने की कोशिश की है कि दिव्यांक को किसी की दया और सहानुभूति की जरूरत नहीं है। अगर सही जीवन साथी मिल जाए तो जिंदगी खुशहाल बन जाती है। इस फिल्म में एक अंधी लड़की और एक गूंगे लड़के की प्रेम कहानी दिखाई गई है, जिसे देखकर दर्शक भावुक हो जाएंगे।'
फिल्म में यश कुमार मिश्रा के अपोजिट काम कर रही भोजपुरी अभिनेत्री प्रियंका रेवारी ने इस फिल्म का निर्माण भी अजय श्रीवास्तव के साथ मिलकर किया है। वह कहती हैं, 'इस फिल्म की शूटिंग के दौरान बहुत सारे भावुक पल आए, जिसे जब दर्शक पर्दे पर दिखेंगे तो उन्हें नजर आएगा। अक्सर देखा गया है कि जिंदगी के जब खुशियां आती है तो दुख भी आता है। इस फिल्म में हमारी शादी के बाद जब बच्चा होता है तब हमें ऐसा लगता है कि मां बाप की आंखें और जुबान आ गया। लेकिन जैसे ही नवजात शिशु की मृत्य होती है, जीवन में एक बार फिर अंधेरा छा जाता है। जीवन का यही सार है कि सुख दुख लगा ही रहता है। यह फिल्म दिव्यांको को समर्पित है।' अजय श्रीवास्तव के निर्देशन में बनी इस फिल्म में यश कुमार मिश्रा, प्रियंका रेवारी के अलावा धनंजय सिंह, रश्मि पाठक और सी पी भट्ट की मुख्य भूमिकाएं हैं।