भारतीय सिनेमा में कमाऊ फिल्मों के समानांतर चलने वाली कलात्मक फिल्मों वाले कलाकारों में अभिनेत्री शबाना आजमी का बहुत बड़ा नाम है। शबाना वह अभिनेत्री हैं जिन्होंने गंभीर मुद्दों पर बन रही फिल्मों में बेहतरीन काम करके खुद को स्थापित किया है। वह सिर्फ फिल्मों में ही नहीं, बल्कि असल जिंदगी में भी महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ने का काम करती हैं। 18 सितंबर को वह 70 साल की हो गईं। सिनेमा में उनके तमाम मील के पत्थर हैं, इनमें से 10 पड़ावों पर आइए डालते हैं, एक नजर।
इन 10 किरदारों की गिरहों संग मजबूत हुई शबाना की कलाकारी की डोर, हर किरदार लाजवाब, हर फिल्म बेजोड़
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किरदार : लक्ष्मी
फिल्म : अंकुर (1974)
वर्ष 1973 में एफटीआईआई से ग्रेजुएट होने के साथ ही शबाना ने ख्वाजा अहमद अब्बास की फिल्म 'फासला' और कांतिलाल राठौर की फिल्म 'परिणय' पर काम करना शुरू किया। लेकिन, उनकी पहली रिलीज फिल्म रही 'अंकुर'। श्याम बेनेगल के निर्देशन में बनी इस फिल्म में शबाना ने एक शादीशुदा नौकरानी लक्ष्मी का किरदार निभाया है। लक्ष्मी को गांव में अपने जमीदार पिता का व्यापार आगे बढ़ाने आए कॉलेज के एक छात्र सूर्या से प्रेम हो जाता है। लक्ष्मी गर्भवती हो जाती है, ऐसे समय में सूर्या उसका साथ छोड़ देता है। शबाना ने फिल्म में शानदार अभिनय किया है। यहां उन्हें अपनी पहली ही फिल्म के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
किरदार : सौदामिनी
फिल्म : स्वामी (1977)
अपनी पहली ही फिल्म के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिलने के बाद शबाना के पास फिल्म निर्माता और निर्देशकों की लाइन लग गई। उन्हें बहुत सी फिल्मों के ऑफर मिलने लगे। शतरंज के खिलाड़ी, अमर अकबर एंथनी, चोर सिपाही, हीरा और पत्थर जैसी फिल्में करने के बाद वह नजर आईं बासु चटर्जी की फिल्म 'स्वामी' में। शबाना ने यहां एक गांव की लड़की सौदामिनी का किरदार निभाया है जो पढ़ने की बहुत शौकीन है। इसी बीच उसे कोलकाता में रहने वाले एक विद्यार्थी नरेंद्र से प्रेम हो जाता है। लेकिन, सौदामिनी के परिजन उसकी शादी पड़ोस के गांव के एक व्यापारी घनश्याम से कर देते हैं। फिर यहां से नया ड्रामा शुरू हो जाता है। इस फिल्म में शबाना के साथ गिरीश कर्नाड, उत्पल दत्त, विक्रम, सुधा शिवपुरी आदि कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आए। शबाना ने इस फिल्म के लिए अपना दूसरा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीता। साथ ही उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार से भी नवाजा गया।
किरदार : फिरदौस
फिल्म : जुनून (1979)
शशि कपूर के निर्माण में बनी फिल्म का निर्देशन श्याम बेनेगल ने किया है। वर्ष 1857 में देश के क्रांतिकारियों और अंग्रेजों के बीच हुई लड़ाई की पृष्ठभूमि पर आधारित इस फिल्म में शबाना ने फिल्म के मुख्य किरदार जावेद खान की पत्नी फिरदौस का किरदार निभाया है। जावेद एक बेपरवाह आदमी है जो शादीशुदा होते हुए भी एक अंग्रेज औरत से इश्क कर बैठता है। इससे उसकी पत्नी फिरदौस को बहुत जलन होती है। फिर भी फिरदौस अपने धैर्य से काम लेती है और उस बारे में सोचती है जिससे उस समय पूरा समाज प्रभावित था। इस किरदार में शबाना आजमी की बहुत तारीफ हुई।
किरदार : पूजा इंदर मल्होत्रा
फिल्म : अर्थ (1982)
शबाना आजमी ने तीसरा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार इस फिल्म के लिए जीता। यह ऐसा समय था जब हिंदी सिनेमा में दिल खोलकर कमर्शियल फिल्में बन रही थीं और ऐसे में शबाना आजमी ने महेश भट्ट के निर्देशन में बनाई 'अर्थ'। उनके साथ इस फिल्म में कुलभूषण खरबंदा, स्मिता पाटिल और राज किरण भी अहम भूमिकाओं में हैं। इस फिल्म को महेश भट्ट की शादी के बाद परवीन बॉबी के साथ शुरू हुई प्रेम कहानी पर आधारित माना जाता है। पूजा इंदर मल्होत्रा के किरदार में शबाना ने इस फिल्म में शानदार अभिनय किया है। इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार तो मिला ही, साथ ही सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार से भी नवाजा गया।